यूपी में 225 सीटों पर प्रत्याशी बदले जाएंगे! अखिलेश यादव का दावा बढ़ाएगा उम्मीदवारों की धड़कन
UP Politics: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा बीजेपी के वर्तमान विधायक हारे हुए चुनाव में अपनी कमाई खर्च नहीं करना चाहते हैं बल्कि बाकी जीवन के लिए पैसे बचाकर रखना चाहते हैं.

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज है. अब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक ऐसा बयान दे दिया है जो चर्चा का विषय बना गया है. सपा चीफ अखिलेश यादव ने दावा किया है कि यूपी में बीजेपी के 225 सीटों पर प्रत्याशी बदले जाएंगे.
सपा चीफ अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा-"अभी हाफ हुए हैं, विधानसभा में टिकट नहीं मिलेगा तो साफ हो जाएंगे. जब सारे ‘घटिया एक्सप्रेसवे’ बन गए और भ्रष्टाचार का आपसी लेनदेन का टारगेट पूरा हो गया तब हटाया तो क्या हटाया? सुना है इलाहाबाद की सारी सीटों पर बीजेपी अपने प्रत्याशी बदलने जा रही है क्योंकि बीजेपी को लगता है कि ये सारे विधायक और प्रत्याशी केवल खाने-कमाने में लगे रहे और लोकसभा सीट हाथ से निकल गई."
इसके साथ ही पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने आगे लिखा-"यही फार्मूला उप्र की उन सभी 43 लोकसभा सीटों पर लागू किया जा रहा है जहाँ इंडिया गठबंधन की जीत हुई थी और बाकी उन 9-10 सीटों पर भी जहां बीजेपी हेरफेर करके सर्टिफिकेट से जीती थी, वोट से नहीं. इसका मतलब तो ये हुआ कि लगभग 225 सीटों पर प्रत्याशी बदले जाएंगे. वैसे तो सुना है कि बीजेपी के वर्तमान विधायक खुद भी चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं क्योंकि ‘पीडीए’ के सामने उनके जीतने की कोई भी उम्मीद नहीं बची है. बीजेपी के मूल वोटर अब एक-चौथाई भी नहीं रह गए हैं, इसीलिए बीजेपी के वर्तमान विधायक हारे हुए चुनाव में अपनी कमाई खर्च नहीं करना चाहते हैं बल्कि बाकी जीवन के लिए पैसे बचाकर रखना चाहते हैं क्योंकि उनको ये भी पता है कि इस बार बीजेपी पक्का जाएगी और फिर कभी नहीं आएगी."
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अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा-"दरअसल बीजेपी के वर्तमान विधायकों ने जनता के आक्रोश को पढ़ लिया है क्योंकि बीजेपी की महा-भ्रष्ट, बेईमान और दमनकारी नीतियों की वजह से आई हर तरह की दिक्कतों जैसे दिनदहाड़े की लूट, रंगदारी, हत्या, जमीनों की कब्जेबाजी, घूसखोरी-कमीशनखोरी, महंगाई, बेरोजगारी, पीडीए पर अत्याचार, पक्षपात, सांप्रदायिक राजनीति की वजह से हो रही नाइंसाफी, पेपर लीक, संविधान की अवहेलना, आरक्षण की हकमारी, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ व महिलाओं के प्रति बेतहाशा बढ़ते अपराध, चुनावी हेराफेरी और चंदा-चढ़ावा चोरी की वजह से जन-जन का गुस्सा उबाल-उफान पर आ चुका है."























