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बीजेपी ने पीलीभीत लोकसभा सीट से वरुण गांधी को मैदान में उतारा, हेमराज वर्मा से है सीधी टक्कर

पीलीभीत लोकसभा सीट पर कभी कांग्रेस पार्टी का दबदबा नहीं रहा। 1951 में हुए लोकसभा चुनाव में भले ही कांग्रेस ने यहां से जीत हासिल की हो लेकिन उसके बाद 1957, 1962, 1967 के चुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने जीत दर्ज की थी।

पीलीभीत, एबीपी गंगा। पीलीभीत लोकसभा सीट पर देश के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार गांधी परिवार का गढ़ माना जाता है। इस सीट पर पिछले तीन दशक से संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी और बेटे वरुण गांधी का ही कब्जा रहा है। एक बार फिर इस सीट पर वरुण गांधी मैदान में हैं। 2014 में मेनका गांधी यहां से जीतीं थीं। इस बार वरुण का मुकाबला सपा-बसपा के संयुक्त प्रत्याशी हेमराज वर्मा से हैं।

मैदान में है 13 उम्मीदवार

वरुण गांधी ने अपने सियासी सफर की शुरुआत भी इसी सीट से की थी। 2009 में वरुण बीजेपी के टिकट से इस सीट से जीते थे। इसके बाद 2014 में वे सुलतानपुर से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे। इस बार बीजेपी ने मां और बेटे की सीटों को आपस में बदल दिया है। पीलीभीत लोकसभा सीट से इस बार कुल 13 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला बीजेपी के वरुण गांधी और समाजवादी पार्टी के हेमराज वर्मा के बीच ही है।

पीलीभीत लोकसभा सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि

पीलीभीत लोकसभा सीट पर कभी कांग्रेस पार्टी का दबदबा नहीं रहा। 1951 में हुए लोकसभा चुनाव में भले ही कांग्रेस ने यहां से जीत हासिल की हो लेकिन उसके बाद 1957, 1962, 1967 के चुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने जीत दर्ज की थी। हालांकि, 1971 में फिर कांग्रेस ने यहां वापसी की, लेकिन 1977 में चली सरकार विरोधी लहर में कांग्रेस की करारी हार हुई। 1980 और 1984 के चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर यहां से बड़ी जीत हासिल की, लेकिन उसके बाद कांग्रेस यहां कभी वापसी नहीं कर पाई। संजय गांधी की मौत के बाद गांधी परिवार से अलग हुई मेनका ने 1989 में जनता दल के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।

2009 में वरुण लड़े चुनाव

1996 से 2004 तक मेनका गांधी ने लगातार चार बार यहां से चुनाव जीता, इनमें दो बार निर्दलीय और 2004 में बीजेपी के टिकट से चुनाव में जीत हासिल की थी। 2009 में मेनका गांधी ने अपने बेटे वरुण गांधी के लिए ये सीट छोड़ी और वरुण यहां से सांसद चुने गए। 2014 में एक बार फिर वह यहां वापस आईं और छठीं बार यहां से सांसद चुनी गईं।

पीलीभीत का राजनीतिक समीकरण

पीलीभीत लोकसभा क्षेत्र में हिंदू वोटरों के साथ-साथ मुस्लिम वोटरों का भी खास प्रभाव है। पीलीभीत जिले में करीब 30 फीसदी मुस्लिम नागरिक हैं, ऐसे में मुस्लिम वोटों की अनदेखा ठीक नहीं होगी। 2014 के चुनाव के अनुसार इस सीट पर 16 लाख से अधिक वोटर हैं, जिनमें 9 लाख पुरुष और 7 लाख से अधिक महिला मतदाता हैं। इस क्षेत्र में कुल 5 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें बहेड़ी, पीलीभीत, बड़खेड़ा, पूरनपुर और बिसालपुर शामिल हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में इन सभी पांच सीटों पर बीजेपी ने ही बाजी मारी थी।

2014 में कैसा रहा जनादेश

2014 के लोकसभा चुनाव में यहां मेनका गांधी के प्रभाव और मोदी लहर का असर साफ देखने को मिला था। मेनका गांधी को 51 फीसदी से भी अधिक वोट मिले और उन्होंने एकतरफा जीत हासिल की थी। 2014 के चुनाव में मेनका गांधी को 52.1% और उनके विरोधी समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को 22.8% वोट हासिल हुए थे। 2014 में इस सीट पर कुल 62.9% मतदान हुआ था।

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