कन्नौज लोकसभा सीट पर चढ़ चुका है सियासी पारा, 2014 में यहां मोदी लहर भी रही थी बेअसर
कन्नौज संसदीय सीट समाजवादी पार्टी की सबसे मजबूत सीटों में से एक है। 2014 में मोदी लहर के बावजूद बीजेपी यहां कमल नहीं खिला सकी थी।

कन्नौज, एबीपी गंगा। लोकसभा चुनाव 2019 के चुनावी समर में कन्नौज सीट पर सियासी पारा चढ़ गया है। 2019 में कन्नौज लोकसभा सीट से 10 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। समाजवादी पार्टी की तरफ से अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव मैदान में हैं। डिंपल को चुनौती देने के लिए बीजेपी ने सुब्रत पाठक पर दांव लगाया है। माना जा रहा है कि मुख्य मुकाबला डिंपल और सुब्रत पाठक के बीच ही है। शिवसेना, राष्ट्रीय क्रांति पार्टी, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, राष्ट्रीय समाज पक्ष के अलावा तीन निर्दलीय भी चुनाव मैदान में हैं।
सपा का मजबूत किला
कन्नौज से सांसद बनने के बाद तीन कद्दावर नेताओं ने मुख्यमंत्री के पद तक का सफर तय किया है। मौजूदा दौर में कन्नौज संसदीय सीट समाजवादी पार्टी की सबसे मजबूत सीटों में से एक है। 2014 में मोदी लहर के बावजूद बीजेपी यहां कमल नहीं खिला सकी थी।
कन्नौज का सियासी समीकरण
आजादी के बाद 1952 में पहली बार हुए चुनाव में कन्नौज लोकसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार शंभूनाथ मिश्रा ने जीत दर्ज करके बाजी मारी। इस सीट पर 15 साल तक कांग्रेस की तूती बोलती रही, जिस पर समाजवादी विचारधारा के जनक डॉ. राम मनोहर लोहिया ने ब्रेक लगाया और 1967 के चुनाव में कांग्रेस के शंभूनाथ को करारी मात देकर वह संसद बनें। 1971 में कांग्रेस ने एक बार फिर से जीत हासिल की, लेकिन 1977 में जनता पार्टी के रामप्रकाश त्रिपाठी, 1980 में छोटे सिंह यादव जीते। 1984 में शीला दीक्षित ने कन्नौज से चुनावी मैदान में उतरकर कांग्रेस की इस सीट पर वापसी कराई। 1989 और 1991 में छोटे सिंह यादव ने लोकदल का झंडा बुलंद करते हुए जीत हासिल की।
6 लोकसभा चुनाव से सपा का कब्जा
बता दें कि कन्नौज सीट पर 1996 में बीजेपी के चंद्रभूषण सिंह ने पहली बार कमल खिलाकर भगवा ध्वज फहराया, लेकिन दो साल बाद 1998 के चुनाव में प्रदीप यादव ने बीजेपी से यह सीट छीनी और उसके बाद से लगातार हुए 6 चुनाव से यह सीट सपा की झोली में है। 1999 में सपा के तत्कालीन मुखिया मुलायम सिंह यादव जीते, लेकिन उन्होंने बाद में इस्तीफा दे दिया। इसके बाद अखिलेश यादव ने अपनी सियासी पारी का आगाज कन्नौज संसदीय सीट पर 2000 में हुए उपचुनाव से किया। अखिलेश यादव ने 2004, 2009 में लगातार जीत दर्ज की, लेकिन 2012 में यूपी का सीएम बनने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। जिसके बाद उनकी पत्नी डिंपल यादव निर्विरोध चुनकर लोकसभा पहुंचीं।
2014 के सियासी नतीजे
सपा की डिंपल यादव को 4,89,164 वोट मिले
बीजेपी के सुब्रत पाठक को 4,69,257 वोट मिले
बसपा के निर्मल तिवारी को 1,27,785 वोट मिले
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Source: IOCL

























