Sirohi News: जिंदा व्यक्ति को 6 साल से सरकारी रिकॉर्ड में दिखाया मृत, डिजिटल सिग्नेचर के दुरुपयोग का आरोप
Sirohi News In Hindi: सिरोही में एक जीवित व्यक्ति को सरकारी दस्तावेजों में मृत दिखाकर सका नाम जन आधार कार्ड से हटा दिया गया है. मामले में डिजिटल सिग्नेचर के दुरुपयोग का आरोप लगा है.

सरकारी रिकॉर्ड में किसी जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर देना महज एक प्रशासनिक भूल नहीं, बल्कि किसी के अस्तित्व, अधिकारों और सामाजिक पहचान पर सीधा प्रहार है. राजस्थान के सिरोही जिले के पिण्डवाड़ा नगर पालिका मंडल में सामने आया ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है. यहां एक जीवित व्यक्ति को सरकारी दस्तावेजों में मृत दिखाकर उसका नाम जन आधार कार्ड से हटाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं.
मामले में तत्कालीन कंप्यूटर ऑपरेटर पर अधिशाषी अधिकारी के डिजिटल सिग्नेचर (डीएससी) और आईडी-पासवर्ड के कथित दुरुपयोग का आरोप लगा है. मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय के इस्तगासे के माध्यम से पुलिस थाना पिण्डवाड़ा में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की तकनीकी और दस्तावेजी जांच में जुटी हुई है.
जन आधार बनवाने पहुंचे तो रिकॉर्ड में बताया गया मृत घोषित
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार झाड़ोली निवासी लक्ष्मण माली पुत्र बाबूलाल माली ने शिकायत दर्ज करवाई है. उन्होंने बताया कि उनका विवाह सोनू माली के साथ हुआ था और दोनों का संयुक्त जन आधार कार्ड बना हुआ था, जिसमें पत्नी को परिवार का मुखिया दर्ज किया गया था.
साल 2020 में पति-पत्नी के बीच वैचारिक मतभेद होने के बाद दोनों अलग रहने लगे. इसी बीच जनवरी 2026 में लक्ष्मण माली जब नया जन आधार कार्ड बनवाने के लिए ई-मित्र केंद्र पहुंचे तो ऑनलाइन प्रक्रिया में लगातार त्रुटि आने लगी. जब उन्होंने कारण जानने का प्रयास किया तो पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें 6 मई 2020 से मृत घोषित किया जा चुका है. इसके चलते उनका नाम जन आधार कार्ड से हटा दिया गया था.
यह जानकारी सामने आने के बाद पीड़ित के लिए स्थिति किसी बड़े झटके से कम नहीं थी. एक जीवित व्यक्ति को सरकारी दस्तावेजों में मृत दिखाए जाने से उसके कई अधिकार और योजनाओं का लाभ प्रभावित हो सकता था.
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नगर पालिका के पत्र ने खोले पूरे मामले के राज
मामले ने उस समय नया मोड़ लिया जब नगर पालिका मंडल पिण्डवाड़ा के वर्तमान अधिशाषी अधिकारी द्वारा जारी एक आधिकारिक पत्र सामने आया. पत्र में उल्लेख किया गया कि तत्कालीन कंप्यूटर ऑपरेटर परेश कुमार माली ने तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी दीपिका वीरवाल की डिजिटल सिग्नेचर (डीएससी) और आईडी-पासवर्ड का कथित रूप से कूट-रचना पूर्वक उपयोग करते हुए जीवित व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्शाने की कार्रवाई की.
पालिका के पत्र में इस कृत्य को आपराधिक श्रेणी का बताते हुए गंभीर अनियमितता माना गया है. इससे यह सवाल भी खड़े हो गए हैं कि सरकारी डिजिटल सुरक्षा तंत्र कितना सुरक्षित है और संवेदनशील लॉगिन जानकारी तक कर्मचारियों की पहुंच किस प्रकार नियंत्रित की जाती है.
पत्नी, ई-मित्र संचालक सहित कई लोगों पर आरोप
पीड़ित की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने तत्कालीन कंप्यूटर ऑपरेटर परेश कुमार माली, पत्नी सोनू माली, वीरवाड़ा के ई-मित्र संचालक हेमंत कुमार माली तथा तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी दीपिका वीरवाल सहित अन्य व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पूरे घटनाक्रम को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया, जिससे पीड़ित को आर्थिक, सामाजिक और कानूनी नुकसान पहुंचाया जा सके.
बीएनएस की गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
पुलिस थाना पिण्डवाड़ा में दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2), 212(ए), 217(ए), 316(3) तथा 61(2) सहित धोखाधड़ी, कूट-रचना, फर्जी दस्तावेज के उपयोग और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं.
पुलिस आधार पोर्टल के लॉग्स, डिजिटल सिग्नेचर की कर रही जांच
मामले की जांच सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) ओमप्रकाश को सौंपी गई है. पुलिस अब जन आधार पोर्टल के लॉग्स, डिजिटल सिग्नेचर के उपयोग, सिस्टम एक्सेस रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की गहन पड़ताल कर रही है.
यह मामला केवल एक व्यक्ति को मृत घोषित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी डिजिटल व्यवस्थाओं की सुरक्षा और पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है. जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी, लेकिन फिलहाल इस प्रकरण ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है.























