Rajasthan Doctors Strike: राजस्थान में डॉक्टरों ने खत्म की हड़ताल, सरकार से इन 8 बिंदुओं पर बनी बात
Rajasthan Doctors Strike: डॉक्टरों की हड़ताल खत्म होने को लेकर सीएम गहलोत ने कहा कि मुझे खुशी है कि सरकार व डॉक्टर्स के बीच सहमति बनी और राजस्थान राइट टू हेल्थ लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है.

Right to Health Bill: राजस्थान में डॉक्टर्स ने अपनी हड़ताल खत्म कर दी है. गहलोत सरकार और डॉक्टर्स के बीच सहमति बन गई है. कुल 8 मांगों पर सहमति बनी है. इस पर सरकार और डॉक्टर के बीच हुई सहमती पर हड़ताल खत्म करने का फैसला ले लिया गया है.
बता दें कि राइट टू हेल्थ बिल के विरोध में पिछले 15 दिन से अधिक समय डॉक्टरों की हड़ताल जारी थी. निजी अस्पताल बंद पड़े थे और सेवारत चिकित्सकों के साथ रेजिडेंट्स ने भी हड़ताल को समर्थन देते हुए कार्य बहिष्कार किए थे. वहीं अब मरीजों को राहत मिल जाएगी.
स्वास्थ्य मंत्री ने कही ये बात
डॉक्टरों से समझौते के बाद मंत्री परसादी लाल मीणा ने कहा कि हम पहले भी डॉक्टरों की मांग मान रहे थे और आज डॉक्टरों ने खुद सरकार के राइट टू हेल्थ बिल के समर्थन में अपना आंदोलन वापस ले लिया है और राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है, जहां स्वास्थ्य का अधिकार कानून लागू होगा.
मुख्यमंत्री ने दी जानकारी
वहीं डॉक्टरों की हड़ताल खत्म होने को लेकर सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि मुझे प्रसन्नता है कि राइट टू हेल्थ पर सरकार व डॉक्टर्स के बीच अंततः सहमति बनी और राजस्थान राइट टू हेल्थ लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है. मुझे आशा है कि आगे भी डॉक्टर-पेशेंट रिलेशनशिप पूर्ववत यथावत रहेगी.
इन आठ बिंदुओं पर बनी सहमति
1. एचएम ने पहले ही 50 बिस्तरों से कम वाले निजी मल्टी स्पेशियलिटी अस्पतालों को आरटीएच से बाहर कर दिया है.
2. सभी निजी अस्पतालों की स्थापना सरकार से बिना किसी सुविधा के लारिड के रूप में की जा रही है
और रियायती दर पर बुलिंग को भी आरटीएच अधिनियम से बाहर रखा जाएगा.
3. इसके बाद, अस्पतालों की निम्नलिखित श्रेणी आरटीएच अधिनियम द्वारा कवर की जाएगी.
एक. निजी मेडिकल कॉलेज अस्पताल.
बी. पीपीपी मोड पर बने अस्पताल
सी. सरकार से मुफ्त या रियायती दरों पर जमीन लेने के बाद स्थापित अस्पताल (प्रति
उनके अनुबंध की शर्तें).
डी. अस्पताल ट्रस्टों द्वारा चलाए जाते हैं.
भूमि और बुलिंग के रूप में सरकार द्वारा वित्तपोषित)
4 : राजस्थान के विभिन्न स्थानों पर बने अस्पतालों को कोटा में नियमित करने पर विचार किया जायेगा
5. आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए पुलिस मामले और अन्य मामले वापस लिए जाएंगे
6. अस्पतालों के लिए लाइसेंस और अन्य स्वीकृतियों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम.
7. फायर एनओसी नवीनीकरण हर 5 साल में माना जाएगा
8. नियमों में कोई और परिवर्तन, यदि कोई हो, आईएमए के दो प्रतिनिधियों के परामर्श के बाद किया जाएगा
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Source: IOCL























