बदइंतजामी पर मूक-बधिर छात्रों का फूटा गुस्सा, गहलोत ने सरकार को घेरा
Rajasthan News In Hindi: जयपुर के मूक-बधिर उच्च माध्यमिक विद्यालय में दिव्यांग छात्र-छात्राओं का गुस्सा फूटा. छात्रों ने मूलभूत सुविधाओं के अभाव से परेशान होकर स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया.

जयपुर के राजकीय सेठ आनंदीलाल पोद्दार मूक-बधिर उच्च माध्यमिक विद्यालय में आज बदइंतजामी के खिलाफ दिव्यांग छात्र-छात्राओं का गुस्सा फूट पड़ा. लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं के अभाव से परेशान मूक बधिर छात्रों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया. हालात ऐसे बने कि छात्रों ने सांकेतिक भाषा, तख्तियों और लिखित संदेशों के जरिए अपनी पीड़ा जाहिर की. कुछ समय के लिए स्कूल का मुख्य गेट बंद कर प्रिंसिपल और स्टाफ को भी अंदर ही रोक दिया गया. मामला बढ़ने पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों और पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा.
छात्रों का आरोप है कि स्कूल में पीने के पानी तक की समुचित व्यवस्था नहीं है. शौचालय बदहाल हैं और इस्तेमाल करने लायक नहीं हैं. कई क्लासरूम की दीवारों और कमरों में दरारें आ चुकी हैं. हॉस्टल में पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं दिया जाता, सफाई व्यवस्था भी बेहद खराब है.
शिक्षक पढ़ाई कराने के बजाय मोबाइल फोन में रहते हैं व्यस्त
छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि इंडियन साइन लैंग्वेज (आईएसएल) में प्रशिक्षित शिक्षकों की भारी कमी है, कुछ शिक्षक नियमित पढ़ाई कराने के बजाय मोबाइल फोन में व्यस्त रहते हैं. शिकायत पत्र में एक पुरुष स्टाफ सदस्य पर छात्राओं के उत्पीड़न के आरोपों की निष्पक्ष जांच की भी मांग की गई. साथ ही माता-पिता से बात कराने और अस्पताल ले जाने के नाम पर पैसे वसूलने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए.
प्रदर्शन के बाद मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी आशा गुप्ता ने स्कूल का निरीक्षण किया. जांच में सफाई, भवन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में कई गंभीर खामियां मिलने पर शिक्षा विभाग ने तत्काल प्रभाव से प्रिंसिपल भारत जोशी को पद से हटा दिया. एक शिक्षक और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को एपीओ कर दिया गया, जबकि वाइस प्रिंसिपल को कार्यवाहक प्रिंसिपल की जिम्मेदारी सौंपी गई. स्कूल की सभी समस्याओं के समाधान के लिए विशेष कमेटी भी गठित की गई है, जो जल्द रिपोर्ट सौंपेगी.
राजस्थान: मानगढ़ धाम पर मुकरी केंद्र सरकार, कांग्रेस ने दी चेतावनी
मामले को अशोक गहलोत ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण, की सुधार की मांग
मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई, जिन्हें खुद साइन लैंग्वेज तक नहीं आती. उन्होंने सरकार से संवेदनशीलता दिखाने और व्यवस्था सुधारने की मांग की. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इसे बीजेपी सरकार के लिए शर्मनाक बताते हुए कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को अपनी बुनियादी सुविधाओं के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है.
वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट और प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मूक-बधिर बच्चे नहीं, बल्कि सरकार मूक-बधिर बन गई है. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की.
डिप्टी CM के नाम पर फर्जी कॉल, नर्सिंग ऑफिसर को किया सस्पेंड























