जोधपुर: साध्वी प्रेम बाईसा को आज दी जाएगी समाधि, मौत का सच क्या? पिता से होगी पूछताछ
Rajasthan News: प्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा को आज (30 जनवरी 2026) उनके पैतृक गांव परेऊ में विधि-विधान के साथ समाधि दी जाएगी. 12 साल की उम्र से ही धर्म और अध्यात्म के मार्ग पर चल रही थी.

राजस्थान की प्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा को आज (30 जनवरी 2026) को उनके पैतृक गांव परेऊ (जिला बालोतरा) में पूरे विधि-विधान के साथ समाधि दी जाएगी. साध्वी के निधन के बाद से ही गांव परेऊ में शोक और श्रद्धा का माहौल बना हुआ है. वे 12 साल की उम्र से ही धर्म और अध्यात्म के मार्ग पर चल रही थी, मगर 25 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा और ग्रामीण उनके अंतिम दर्शन के लिए भी पहुंचे.
आश्रम लोटने के बाद से सांस लेने में हो रहती थी तकलीफ
साध्वी प्रेम बाईसा मंगलवार (27 जनवरी) को अजमेर से कथा पूरी करके जोधपुर के आरती नगर आश्रम लोटी थीं. इसके बाद अलगे ही दिन उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी. जिसे देखते हुए साध्वी को एक कंपाउंडर ने इंजेक्शन लगाया. तबीयत ज्यादा खराब होने के कारण उन्हें पाल रोड स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मृत्यु हो गई.
बताया जा रहा है कि साध्वी प्रेम बाईसा का पार्थिव शरीर बुधवार (28 जनवरी) को जोधपुर से परेऊ लाया गया. इसके बाद गुरुवार (29 जनवरी) को पोस्टमार्टम के दौरान विवाद की स्थिति भी बनी, हालांकि प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में स्थिति को संभाल लिया गया. वहीं आज परेऊ गांव में समाधि की प्रक्रिया संपन्न कराई जाएगी.
गांव परेऊ में बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे
स्थानीय लोगों के अनुसार साध्वी प्रेम बाईसा का जीवन संघर्ष, भक्ति और साधना से भरा रहा था. वे महज पांच साल की उम्र में मां के निधन के बाद, परिवार सहित जोधपुर के आश्रम में रहने लगीं थी. संतों के सान्निध्य में रहते हुए उन्होंने कथा-वाचन और भजन गायन में विशेष पहचान बनाई. इसके बाद 12 साल की उम्र में पहली कथा करने के बाद धीरे-धीरे उनकी ख्याति बढ़ती चली गई.
प्रशासन ने समाधि स्थल पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया है. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्थाएं की गई हैं. गांव परेऊ में आज साध्वी प्रेम बाईसा को श्रद्धांजलि देने के लिए बड़ी संख्या में लोग भी जुट रहे हैं, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूबा हुआ है.
Source: IOCL


























