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जयपुर में बीजेपी की लिस्ट पर मचा कोहराम, कांग्रेस ने 'पर्ची पॉलिटिक्स' पर उठाए सवाल

Rajasthan News: जयपुर में बीजेपी की कार्यकारिणी लिस्ट पर सिफारिशी नाम उजागर होने से हंगामा मचा. कांग्रेस ने कहा कि बीजेपी पर्चियों से चल रही है.

राजस्थान में बीजेपी की एक लिस्ट पर ऐसा सियासी कोहराम मचा है, जिसमें सत्ताधारी पार्टी पूरी तरह बैकफुट पर है. लिस्ट को लेकर बीजेपी के नेता और पदाधिकारी खुद को असहज महसूस कर रहे हैं तो वहीं कांग्रेस पार्टी चुटकी लेते हुए सियासी तीर छोड़ रही है.

कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि राजस्थान में बीजेपी की पॉलिटिक्स पर्ची से आगे नहीं बढ़ पा रही है. राजस्थान की सियासत में शुक्रवार को उस वक्त सियासी भूचाल आ गया, जब बीजेपी ने राजधानी जयपुर की जिला कार्यकारिणी की लिस्ट जारी की.

अध्यक्ष अमित गोयल के अकाउंट से लिस्ट जारी की गई

यह लिस्ट जिला अध्यक्ष अमित गोयल के अकाउंट से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी की गई. लिस्ट को लेकर कोहराम इसलिए मचा क्योंकि जिन 34 कार्यकर्ताओं और नेताओं को पदाधिकारी बनाया गया, उनके नाम के आगे उनकी सिफारिश करने वाले बड़े नेताओं के नाम को भी लिस्ट में जगह दी गई थी.

34 सदस्यों वाली लिस्ट में नौ के आगे लिखा गया कि उन्हें कार्य के आधार पर पद दिया गया है, जबकि बाकी के नाम के साथ उनकी पैरोकारी करने वाले बड़े नेताओं का नाम रखा गया.

कुछ ही देर में यह लिस्ट डिलीट कर दी गई

किसी के नाम के आगे मुख्यमंत्री लिखा हुआ था तो किसी के आगे सीएम ऑफिस. सिफारिश करने वालों में दोनों डिप्टी सीएम के साथ ही मंत्रियों-सांसदों और विधायकों के नाम भी इस लिस्ट में डाले गए.

कार्यकारिणी की लिस्ट में सिफारिश करने वाले नेताओं के नाम क्यों डाले गए और इन्हें सोशल मीडिया पर जारी क्यों किया गया, इसे लेकर बीजेपी में किसी के पास कोई जवाब नहीं है. हालांकि कुछ ही देर में सोशल मीडिया अकाउंट से यह लिस्ट डिलीट कर दी गई.

बीजेपी कार्यालय में सन्नाटा

इसके बाद जिला अध्यक्ष अमित गोयल ने लिखा कि ऑपरेटर की गलती से यह पोस्ट कर दिया गया था. लिस्ट को अब बाद में दोबारा जारी किया जाएगा. लिस्ट जारी होने और पोस्ट को डिलीट करने के बाद जिला अध्यक्ष अमित गोयल ना तो पार्टी के दफ्तर में नजर आए और ना ही वह किसी का फोन रिसीव कर रहे हैं.

लिस्ट को लेकर प्रदेश कार्यालय में बैठे नेताओं प्रवक्ताओं और पैनलिस्टों ने भी मीडिया से हाथ जोड़ लिए और कुछ भी बोलने से साफ मना कर दिया. सवाल यह है कि जिलाध्यक्ष ने अपनी कार्यकारिणी की जो लिस्ट तैयार की, उसमें संबंधित पदाधिकारियों की सिफारिश करने वाले नेताओं का नाम क्यों रखा गया.

सोशल मीडिया पर कैसे आई लिस्ट?

अगर यह अपने रिकॉर्ड के लिए रखा गया था तो उसे सोशल मीडिया पर सार्वजनिक क्यों किया गया.  इस बारे में बीजेपी के ही कुछ नेताओं ने अनौपचारिक तौर पर दावा किया है कि बड़े नेताओं ने जिला अध्यक्ष पर अपने चहेतों को पदाधिकारी बनाने के लिए इस कदर दबाव बनाया कि जिला अध्यक्ष परेशान हो गए.

कुछ लोगों का दावा है कि तीन चौथाई नाम सिफारिशी होने के बाद जिला अध्यक्ष इस कदर झल्ला गए कि उन्होंने बड़े नेताओं की पोल खोल दी. बहरहाल इस मुद्दे पर बीजेपी के नेताओं को जवाब देते नहीं बन रहा है. 

कांग्रेस को मिला 'मौका'

बहरहाल इस लिस्ट को लेकर बीजेपी बैक फुट पर है तो वहीं कांग्रेस को बैठे बिठाए सत्ताधारी पार्टी पर निशाना साधने का मौका मिल गया है. राजस्थान में कांग्रेस पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और मीडिया कोऑर्डिनेटर स्वर्णिम चतुर्वेदी का कहना है कि बीजेपी का पर्चियों से पीछा नहीं छूट रहा है.

सीएम के नाम से लेकर जिले की कमेटी में दिए जाने वाले पदों में भी पर्चियां ही काम कर रही हैं. उनका यह भी आरोप है कि बीजेपी में अब आम कार्यकर्ताओं की कोई कद्र नहीं है और थोपे हुए लोग ही महत्वपूर्ण पदों पर बिठा जा रहे हैं.

और गरमाएगी सियासत!

मुख्य प्रवक्ता स्वर्णिम चतुर्वेदी के मुताबिक बीजेपी में सिर्फ नाम के लिए पद और जिम्मेदारी दी जाती है. लोग अपनी मर्जी से संगठन में कार्यकारिणी का एक सदस्य तक नहीं बना सकते हैं. सब कुछ ऊपर से थोपा जाता है. वैसे लिस्ट को लेकर हो रही सियासत आने वाले दिनों में और गरमाने की उम्मीद है.

मोहम्मद मोईन को पत्रकारिता का करीब तीन दशक का अनुभव है. वह प्रिंट - इलेक्ट्रानिक और डिजिटल तीनों ही माध्यमों में सालों तक काम कर चुके हैं. ABP नेटवर्क से वह पिछले करीब 18 सालों, स्टार न्यूज़ के समय से ही जुड़े हुए हैं. राजनीति - धर्म और लीगल टापिक के साथ सम सामयिक विषयों के एक्सपर्ट हैं. पत्रकार होने के साथ ही राजनीतिक विश्लेषक, एक्सपर्ट पैनलिस्ट, आलोचक और टिप्पणीकार भी हैं. इनकी चुनावी भविष्यवाणी ज्यादातर मौकों पर सटीक साबित हुई है. 8 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव कवर कर चुके हैं. 7 कुंभ और महाकुंभ की कवरेज कर अपनी अलग पहचान बनाई है. यह अपनी बेबाक- निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. मोहम्मद मोईन ने चार विषयों पत्रकारिता एवं जनसंचार, राजनीति विज्ञान, हिंदी और मध्यकालीन व आधुनिक इतिहास विषयों में मास्टर डिग्री यानी स्नातकोत्तर किया हुआ है. लॉ ग्रेजुएट भी हैं. देश के कई राज्यों में काम करने का अनुभव रखते हैं. देश की तमाम नामचीन हस्तियों का इंटरव्यू ले चुके हैं और कई चर्चित घटनाओं को कवर चुके हैं. 

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