भिवाड़ी: बारूद में विस्फोट के बाद फैक्ट्री में हुआ था धमाका, 7 मजदूरों ने गंवाई थी अपनी जान
Rajasthan News: भिवाड़ी के खुशखेड़ा में अवैध पटाखा फैक्ट्री धमाके में सात मजदूर जिंदा जल गए. साथ ही इस हादसे में चार लोग गंभीर रूप ले घायल है. लोगों दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग क रहे हैं.

भिवाड़ी के खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार (16 फरवरी) सुबह अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्ट्री में तेज धमाका होने के बाद भीषण आग लग गई. हादसे के वक्त फैक्ट्री में एक दर्जन से अधिक मजदूर काम कर रहे थे. बारूद में विस्फोट के बाद पूरी इमारत क्षतिग्रस्त हो गई. इस हादसे में सात मजदूरों की मौके पर ही जिंदा जलकर मौत हो गई. जबकि चार लोग गंभीर रूप से झुलस गए, जिन्हें इलाज के लिए दिल्ली रेफर किया गया है.
हादसे में जान गंवाने वाले सभी मजदूर बिहार के मोतिहारी और चंपारण जिले के बताए गए हैं. जानकारी के अनुसार, ये मजदूर रोजगार की तलाश में यहां आए थे और फैक्ट्री परिसर में ही रहकर काम कर रहे थे. फैक्ट्री में रहने, खाने और सोने की व्यवस्था वहीं की गई थी.
कपड़ा उद्योग के लिए आवंटित भूखंड पर चल रही थी अवैध फैक्ट्री
बताया जा रहा है कि जिस औद्योगिक भूखंड पर यह फैक्ट्री संचालित हो रही थी, उसे वर्ष 2005 में कपड़ा उद्योग के लिए आवंटित किया गया था. आरोप है कि भूखंड स्वामी ने करीब दो साल पहले इसे लीज पर दे दिया, जिसके बाद यहां अवैध रूप से पटाखा निर्माण का काम शुरू कर दिया गया. औद्योगिक क्षेत्र में पटाखा निर्माण की अनुमति नहीं होने के बावजूद यह गतिविधि लंबे समय से जारी थी.
परिजनों की शिकायत में कहा गया है कि फैक्ट्री में मजदूरों की सुरक्षा के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे. न तो आग से बचाव के उपकरण मौजूद थे और न ही आपात स्थिति से निपटने की कोई व्यवस्था. हादसे के समय मजदूरों के पास बचने का कोई रास्ता नहीं बचा.
मृतक मिंटू कुमार की एक साल पहले हुई थी शादी
हादसे में जान गंवाने वाले मिंटू कुमार के परिजनों के अनुसार, उसकी शादी एक साल पहले हुई थी और वह जल्द ही घर लौटने वाला था. परिजनों का कहना है कि रोजगार के लिए आए मजदूरों की जिंदगी लापरवाही और अवैध गतिविधियों की भेंट चढ़ गई.
मृतक मिंटू के भाई की शिकायत पर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद निवासी फैक्ट्री मालिक राजेंद्र कुमार सहित चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. इसमें कोटपूतली-बहरोड़ क्षेत्र के शाहजहांपुर निवासी हेमंत कुमार, खुशखेड़ा निवासी ठेकेदार अजीत और मोतिहारी (बिहार) निवासी कंपनी सुपरवाइजर अभिनंदन के नाम शामिल हैं. शिकायत में इसे घोर लापरवाही बताते हुए कठोर कार्रवाई की मांग की गई है.
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने जांच का दिलाया भरोसा
वन मंत्री राजस्थान संजय शर्मा ने बताया कि घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है. अवैध रूप से संचालित फैक्ट्री, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और निगरानी तंत्र की भूमिका की भी जांच की जा रही है.
औद्योगिक क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों पर उठे सवाल
इस हादसे ने औद्योगिक क्षेत्रों में चल रही अवैध गतिविधियों और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि औद्योगिक भूखंडों के उपयोग की नियमित जांच हो और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराया जाए. ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके.
खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में अवैध पटाखा फैक्टरी में सात मजदूरों की जिंदा जलकर हुई मौत किसी हादसे की उपज नहीं, बल्कि मिलीभगत, लापरवाही और भ्रष्टाचार से जन्मा अपराध है. जिसमें फैक्टरी संचालक से लेकर जिम्मेदार अफसरों तक सभी की जवाबदेही तय होनी चाहिए. जिस तंत्र को फुटपाथ पर पटाखे बेचने वालों पर कार्रवाई सूझती है, वही तंत्र वर्षों तक प्रतिबंधित इलाके में चल रही मौत की फैक्टरी नहीं देख पाया. यह अंधापन नहीं, अपराध में साझेदारी है.
आवंटन के गलत उपयोग पर आंख मूंदे अधिकारी, निगरानी में फेल प्रशासन और मौन साधे जनप्रतिनिधि इन सबकी निष्क्रियता ने गरीब मजदूरों को आग के हवाले किया. अब जांच के नाम पर समय खींचना पीड़ितों के जख्मों पर नमक है. तत्काल सख्त कार्रवाई, दोषियों पर आपराधिक मुकदमे, संपत्ति जब्ती और उदाहरणीय सजा ही भविष्य की त्रासदियों पर लगाम लगा सकती है. वरना हर अगली लपट में सिस्टम की सड़ांध और बेनकाब होगी.
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Source: IOCL
























