Jaipur News: राजस्थान में सड़क पर नमाज का विरोध, VHP और BJP विधायक बोले- लागू हो UP का 'योगी मॉडल'
Jaipur News In Hindi: राजस्थान में बकरीद पर सड़क पर नमाज पढ़ने को लेकर विवाद गहरा गया है. VHP और BJP विधायक बालमुकुंद आचार्य ने यूपी का 'योगी मॉडल' लागू कर पाबंदी की मांग की है.

बकरीद के मौके पर जानवरों की कुर्बानी और सड़कों पर नमाज पढ़ने का विवाद अब यूपी, महाराष्ट्र और बंगाल से निकलकर राजस्थान तक पहुंच गया है. राजधानी जयपुर समेत प्रदेश के कई हिस्सों में बकरीद पर सड़कों पर नमाज अदा की जाती है. लेकिन इस बार विश्व हिंदू परिषद (VHP) और सत्ताधारी बीजेपी के नेताओं ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए राजस्थान में भी यूपी का 'योगी मॉडल' लागू करने की मांग कर दी है. अब सबकी नजरें भजनलाल शर्मा सरकार पर टिकी हैं कि क्या वह इस पर कोई पाबंदी लगाएगी या पुरानी परंपरा कायम रहेगी.
VHP की मांग: यूपी की तर्ज पर लगे पाबंदी
विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता अमितोष परीक ने सड़क पर नमाज का विरोध किया है. उनका कहना है कि हाईवे और सड़कों पर नमाज होने से आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. ट्रैफिक जाम की वजह से एंबुलेंस तक फंसी रहती हैं. वीएचपी ने दलील दी है कि राजस्थान सरकार को भी यूपी की तरह सड़कों पर नमाज पढ़ने पर सख्त पाबंदी लगानी चाहिए.
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BJP विधायक की नसीहत: 'केक काटकर मनाएं बकरीद'
जयपुर की हवामहल सीट से बीजेपी के फायरब्रांड विधायक बालमुकुंद आचार्य ने भी सड़क पर नमाज को पूरी तरह गलत ठहराया है. विधायक का कहना है कि दूसरों को तकलीफ देकर त्योहार की खुशियां नहीं मनाई जा सकतीं. सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए. उन्होंने मुस्लिम समुदाय को यह नसीहत भी दी है कि वे जानवरों की कुर्बानी देने के बजाय केक काटकर बकरीद का त्योहार मनाएं.
नमाज से कई घंटे बंद रहता है जयपुर-दिल्ली हाईवे
जयपुर में ईदगाह और जामा मस्जिद के बाहर बड़ी संख्या में लोग नमाज के लिए जुटते हैं. सुबह 8 बजे ईदगाह में होने वाली नमाज में करीब एक लाख लोग शामिल होते हैं, जबकि अंदर की क्षमता बमुश्किल 5,000 लोगों की है. ऐसे में बाकी सारे लोग जयपुर-दिल्ली नेशनल हाईवे पर सड़क के दोनों तरफ नमाज अदा करते हैं. नमाज को लेकर इस नेशनल हाईवे को सुबह 5 बजे से ही बंद कर दिया जाता है, जिससे वैकल्पिक रास्तों पर भारी ट्रैफिक जाम लग जाता है.
मुस्लिम समुदाय का पक्ष: 'मजबूरी में सड़क पर पढ़ते हैं नमाज'
दूसरी तरफ, मुस्लिम समुदाय और ईदगाह कमेटी के सदस्य नईम खान ने इस विरोध को गलत और भेदभावपूर्ण बताया है. उनका कहना है कि लोग बरसों से इसी तरह से नमाज पढ़ते आ रहे हैं. हर कोई मस्जिद में ही नमाज पढ़ना चाहता है, लेकिन जब जगह भर जाती है तो लोग मजबूरी में सड़क पर नमाज अदा करते हैं. उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि परंपरागत तरीके से ही व्यवस्थाएं मुहैया कराई जाएं.
हालांकि, इन विवादों के बीच जयपुर की गंगा-जमुनी तहजीब की तस्वीर भी देखने को मिलती है, जहां शहर के लोग मिलजुलकर त्योहार मनाते हैं और कुछ हिंदूवादी संगठन नमाजियों पर फूल बरसाकर उनका अभिनंदन भी करते हैं.
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