Rajasthan: मिडिल ईस्ट युद्ध से सोजत की मेहंदी इंडस्ट्री बेहाल, संकट में हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी
Iran Isreal War: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब राजस्थान के सोजत की मशहूर मेहंदी इंडस्ट्री पर दिखने लगा है. निर्यात ठप होने से करीब 300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर अब भारत के छोटे कस्बों तक साफ दिखने लगा है. राजस्थान के पाली जिले का सोजत कस्बा जिसे ‘मेहंदी नगरी’ के नाम से जाना जाता है, इस समय बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा है. यहां का मेहंदी कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है. कारोबारियों के मुताबिक अब तक करीब 300 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है.
हर साल ईद के मौके पर सोजत से बड़ी मात्रा में मेहंदी दुबई, सऊदी अरब, कतर जैसे खाड़ी देशों में भेजी जाती है. यही समय कारोबार के लिए सबसे अहम होता है. लेकिन इस बार युद्ध के कारण शिपिंग रूट प्रभावित हुए हैं. फ्रेट चार्ज बढ़ गए हैं और सप्लाई में भारी देरी हो रही है. इसका नतीजा ये हुआ कि इस बार मेहंदी का निर्यात लगभग ठप हो गया और कारोबारियों को बड़ा झटका लगा.
गोदामों में सड़ रही करोड़ों की मेहंदी
कारोबारियों के अनुसार, इस सीजन में तैयार किया गया 50 करोड़ रुपये से ज्यादा का मेहंदी स्टॉक गोदामों में पड़ा है. मेहंदी की शेल्फ लाइफ ज्यादा नहीं होती, ऐसे में समय पर निर्यात न होने से इसकी गुणवत्ता खराब हो रही है. कई जगहों पर मेहंदी में फफूंद लगने लगी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग घटने का खतरा बढ़ गया है.
इस संकट का असर सिर्फ व्यापारियों तक सीमित नहीं है. सोजत और आसपास के इलाकों में हजारों मजदूर, महिलाएं और कारीगर इस उद्योग से जुड़े हुए हैं. पत्तियां तोड़ने, पीसने, पैकिंग और लोडिंग जैसे कामों में बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता था. लेकिन अब काम लगभग ठप है.
करीब 10 से 15 हजार लोगों के रोजगार पर संकट मंडरा रहा है. पिछले डेढ़ महीने से कई मजदूरों को काम नहीं मिला है, जिससे उनके सामने घर चलाना भी मुश्किल हो गया है. हालात ऐसे हैं कि कई मजदूर अब पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं.
व्यापारियों की बढ़ती चिंता, सरकार से मदद की मांग
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो नुकसान 100 करोड़ रुपये से भी ज्यादा बढ़ सकता है. छोटे व्यापारी कर्ज में डूब रहे हैं और महिलाओं की आमदनी पूरी तरह बंद हो गई है.
कारोबारियों ने सरकार से राहत की मांग की है. उनका कहना है कि निर्यात में सब्सिडी दी जाए, सस्ती स्टोरेज सुविधा मिले और आर्थिक पैकेज दिया जाए, ताकि इस संकट से बाहर निकला जा सके.
छोटे कस्बे तक पहुंचा युद्ध का असर
मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर हजारों किलोमीटर दूर भारत के छोटे कस्बों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है. सोजत की मेहंदी, जो कभी दुनिया भर में अपनी पहचान रखती थी, आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है.
अगर जल्द हालात नहीं सुधरे तो यह संकट और गहरा सकता है और हजारों परिवारों की जिंदगी पर इसका असर लंबे समय तक देखने को मिल सकता है.
Source: IOCL


























