कोटा हॉस्टल में पंखों पर ‘सुसाइड प्रिवेंशन ग्रिल’ से उठे सवाल, छात्रों के मानसिक दबाव पर बहस तेज
Kota News In Hindi: हालांकि इस वीडियो की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर वायरल हुए वीडियो ने देखते ही देखते लाखों लोगों का ध्यान खींच लिया.

देशभर में कोचिंग हब के रूप में पहचान रखने वाले राजस्थान के कोटा शहर से एक बार फिर छात्रों के मानसिक दबाव और आत्महत्या जैसे गंभीर मुद्दे चर्चा में हैं. इस बार वजह बना है एक वायरल वीडियो,जिसमें हॉस्टल में लगे छत के पंखों को लोहे की मजबूत ग्रिलों से घिरा हुआ देखा जा सकता है. दावा किया जा रहा है कि ये ग्रिलें छात्रों द्वारा आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से लगाई गई हैं.
हालांकि इस वीडियो की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर वायरल हुए वीडियो ने देखते ही देखते लाखों लोगों का ध्यान खींच लिया. वीडियो में दिख रहे ‘सुसाइड प्रिवेंशन डिवाइस’ को लेकर इंटरनेट पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. कई लोगों ने इसे छात्रों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया,तो कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि अगर छात्रों की इतनी चिंता है तो उन्हें बेहतर मानसिक माहौल काउंसलिंग और सुविधाएं क्यों नहीं दी जा रहीं.
हॉस्टल में तनाव को लेकर चिंता
सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा, “इतनी चिंता है तो हॉस्टलों में एसी लगवा दो, ताकि बच्चे तनाव में कम रहें.” वहीं कुछ लोगों ने कहा कि केवल पंखों पर पिंजरे लगाने से समस्या खत्म नहीं होगी, असली जरूरत छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को कम करने की है.
लाखों छात्र-छात्राएं तैयारी के लिए आते हैं
कोटा में हर साल देशभर से लाखों छात्र IIT-JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं. लेकिन इसी के साथ पढ़ाई का दबाव,घर से दूरी और लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा कई छात्रों के लिए मानसिक तनाव का कारण बन रही है. पिछले कुछ वर्षों में आत्महत्या के बढ़ते मामलों ने प्रशासन,कोचिंग संस्थानों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है.
इसी को देखते हुए पहले भी कई हॉस्टलों में ‘हैंगिंग-फ्री डिवाइस’ और सुरक्षा उपाय लागू किए जा चुके हैं. हालांकि वायरल वीडियो के बाद एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं कि क्या सिर्फ सुरक्षा उपकरण लगाने से समस्या का समाधान संभव है या फिर छात्रों को मानसिक सहारा और सकारात्मक माहौल देने की दिशा में और बड़े कदम उठाने की जरूरत है.























