Jhalawar News: कंजर बस्ती के डेरों से 'होमगार्ड बने मनोज', 11 भाई-बहनों के बीच निकला कानून का रखवाला
Jaipur News: झालावाड़ में कंजर पुनर्वास कार्यक्रम से मनोज कुमार होमगार्ड बन गए है. समुदाय के पहले सरकारी कर्मचारी बनकर उन्होंने अपराध छोड़कर शिक्षा व रोजगार से नई राह की मिसाल पेश की है.

झालावाड़ जिला पुलिस के अभिनव नवाचार कंजर पुनर्वास कार्यक्रम के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखाई देने लगे हैं. जिले के अत्यंत पिछड़े कंजर समुदाय के एक युवक मनोज कुमार ने अपनी मेहनत से राजस्थान होमगार्ड में चयनित होकर समाज के सामने एक अनूठी मिसाल पेश की है. मनोज इस समुदाय के पहले व्यक्ति हैं, जिन्होंने सरकारी सेवा का हिस्सा बनकर अपने डेरे और जिले का नाम रोशन किया है.
पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि चौमहला-गंगधार और झालावाड़ सर्किल के 20 डेरों में करीब 4300 कंजर समुदाय के लोग निवास करते हैं. लंबे समय से चोरी और कच्ची शराब के दलदल में फंसे होने के कारण यह समुदाय समाज की मुख्यधारा से कटा हुआ था. इस पहचान को बदलने के लिए जिला पुलिस ने कंजर पुनर्वास कार्यक्रम शुरू किया, जिसका उद्देश्य युवाओं को शिक्षा और रोजगार से जोड़कर अपराध मुक्त करना है. इसी कड़ी में बिरियाखेड़ी निवासी मनोज कुमार (25) ने सफलता प्राप्त की है.
हताशा को मात देकर पाई सफलता
मनोज कुमार शिक्षित होने के बावजूद बेरोजगारी के कारण हताश थे. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक व कार्यक्रम के नोडल अधिकारी भागचन्द्र के मार्गदर्शन में संचालित पुनर्वास कार्यक्रम के तहत मनोज को प्रेरित किया गया. 11 भाई-बहनों वाले परिवार में जहां पिता और अन्य भाई अपराधों में लिप्त रहे, मनोज ने शिक्षा का रास्ता चुना. उनकी यह सफलता केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि पूरे समुदाय के लिए एक बड़ा संदेश है.
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पुलिस अधीक्षक ने किया सम्मानित
मनोज कुमार के जज्बे को सराहने के लिए पुलिस अधीक्षक कार्यालय में विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया गया. एसपी अमित कुमार ने मनोज को सम्मानित करते हुए कहा कि यह उपलब्धि अन्य बेरोजगार युवाओं को अपराध छोड़कर सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रेरित करेगी. इस अवसर पर नोडल अधिकारी भागचन्द्र, वृत्ताधिकारी हर्षराज सिंह, एएसआई मदन लाल और हैड कांस्टेबल बाबूलाल सहित पूरी पुनर्वास टीम मौजूद रही.
निरंतर जारी है पुनर्वास अभियान
झालावाड़ पुलिस का यह अभियान थमा नहीं है. एसपी ने बताया कि डेरों के बच्चों ने अब विद्यालयों का रुख करना शुरू कर दिया है और बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार से जोड़ा जा रहा है. पुलिस का लक्ष्य इस पूरे समुदाय को अपराध की छाया से निकालकर विकास की मुख्यधारा में स्थायी रूप से स्थापित करना है.
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