सीकर में किसानों का जेल भरो आंदोलन, सांसद अमराराम गिरफ्तार!
Sikar News In Hindi:राजस्थान के सीकर में संयुक्त किसान मोर्चा का जेल भरो आंदोलन. एमएसपी और कर्ज माफी की मांग को लेकर सांसद अमराराम समेत कई किसानों ने दी गिरफ्तारी. पढ़ें पूरी खबर.

राजस्थान के सीकर में सोमवार (10 अगस्त) को संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय श्रमिक संगठनों के आह्वान पर किसान-मजदूरों ने कलेक्ट्रेट के बाहर जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया. इस महापंचायत में हजारों की संख्या में किसान, मजदूर, छात्र, युवा और महिलाएं शामिल हुए. अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शनकारियों ने 'जेल भरो आंदोलन' का शंखनाद किया, जिसका नेतृत्व सीकर के सांसद अमराराम कर रहे थे.
कलेक्ट्रेट पर हुए इस उग्र प्रदर्शन के दौरान सांसद अमराराम समेत कई बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अपनी गिरफ्तारी दी. हालांकि, पुलिस ने एहतियातन हिरासत में लेने के कुछ देर बाद ही सभी को रिहा कर दिया.
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सड़क रोको और बड़े आंदोलन की चेतावनी
गिरफ्तारी और रिहाई के बाद संयुक्त मंच ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है. किसान नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आने वाले दिनों में जेल भरो आंदोलन को और भी तेज किया जाएगा. इसके साथ ही सरकार पर दबाव बनाने के लिए 'सड़क रोको' जैसे कई बड़े प्रदर्शनों की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है. इस महापंचायत में अखिल भारतीय किसान सभा, सीटू, इंटक, जय किसान आंदोलन, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) सहित एसएफआई और जनवादी महिला समिति जैसे तमाम संगठनों के कार्यकर्ता एक ही झंडे के नीचे एकजुट नजर आए.
अमेरिका के साथ ट्रेड डील का कड़ा विरोध
महापंचायत को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधायक पेमाराम ने केंद्र सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने अमेरिका के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) को भारतीय कृषि, उद्योग और व्यापार के लिए एक गंभीर खतरा बताया. पेमाराम ने जनसभा में कहा कि यह लड़ाई सिर्फ किसानों की आय बढ़ाने की नहीं है, बल्कि यह देश की खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और संप्रभुता को बचाने की अहम लड़ाई है.
एमएसपी की कानूनी गारंटी और कर्ज माफी पर जोर
किसानों और मजदूरों ने मंच से अपनी प्रमुख मांगों को पुरजोर तरीके से उठाया. इनमें भारत-अमेरिका ट्रेड डील और प्रस्तावित बीज कानून को तुरंत वापस लेना, चार लेबर कोड रद्द करना और किसानों व खेत मजदूरों का पूरा कर्ज माफ करना शामिल है. इसके अलावा, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार C-2+50 प्रतिशत के आधार पर एमएसपी (MSP) की कानूनी गारंटी, मनरेगा में 200 दिन का रोजगार और 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी देने तथा बिजली के निजीकरण को रोकने की मांग प्रमुखता से रखी गई.
कलेक्ट्रेट पर किसानों की इस भारी भीड़ और प्रदर्शन की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह से अलर्ट मोड पर रही. सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए परिसर और उसके आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया था.
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