जीरा-सौंफ के GI टैग पर विवाद, राजस्थान के किसान नाराज
Jodhpur News In Hindi: गुजरात के उंझा को जीरा और सौंफ का GI टैग दिए जाने पर पश्चिमी राजस्थान के किसानों और व्यापारियों ने कड़ी आपत्ति जताई है. SABC ने वैज्ञानिक जांच की मांग की है.

देश में जीरा और सौंफ के सबसे बड़े उत्पादक पश्चिमी राजस्थान के किसानों के बीच इन दिनों भारी आक्रोश है. विवाद का कारण मेहसाना (गुजरात) के उंझा शहर के जीरा और सौंफ को मिला GI टैग (भौगोलिक संकेतक) है.
जोधपुर जिला मंडी के व्यापारियों और किसानों का आरोप है कि इस फैसले से पश्चिमी राजस्थान के किसानों की पहचान मिटाने की कोशिश की जा रही है. जोधपुर स्थित साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC) ने भी इस मामले में दखल देते हुए जीआई रजिस्ट्रार को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है और इस फैसले की दोबारा वैज्ञानिक और कानूनी समीक्षा की मांग की है.
किसानों का दर्द: 'हमारी पहचान लौटाई जाए'
किसान नेता तुलसाराम सेंवर ने निराशा जताते हुए कहा, "हमने भी जीआई टैग के लिए आवेदन किया था, लेकिन हमें यह नहीं मिला. सरकार को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए और निष्पक्ष जांच कर राजस्थान के किसानों की असली पहचान उन्हें लौटानी चाहिए."
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SABC का तर्क: 'उंझा सिर्फ एक मंडी है, उत्पादन का मुख्य केंद्र नहीं'
SABC के संस्थापक निदेशक डॉ. भागीरथ चौधरी ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी राज्य का विरोध करना नहीं है, बल्कि पश्चिमी राजस्थान के लाखों किसानों के हितों की रक्षा करना है.
रिपोर्ट में कई अहम तथ्य सामने रखे गए हैं:
उंझा देश का सबसे बड़ा जीरा व्यापार केंद्र (मंडी) जरूर है, लेकिन केवल 'व्यापारिक पहचान' के आधार पर किसी उत्पाद को GI टैग नहीं दिया जा सकता. उंझा मंडी में बिकने वाला अधिकांश जीरा और सौंफ (विशेषकर सिरोही और अन्य जिलों से) वास्तव में राजस्थान और अन्य राज्यों से वहां पहुंचता है. जीआई का मुख्य आधार उस क्षेत्र की विशिष्ट जलवायु, मिट्टी और भौगोलिक परिस्थितियां होनी चाहिए, न कि उसका केवल एक व्यापारिक केंद्र होना.
वैज्ञानिक प्रमाणों का अभाव
SABC ने अपनी रिपोर्ट में जीआई टैग के दावों की वैज्ञानिक प्रामाणिकता पर भी सवाल खड़े किए हैं. उंझा के जीरा और सौंफ की बेहतर सुगंध, स्वाद और आवश्यक तेल (Essential Oil) के दावों को साबित करने के लिए कोई व्यापक तुलनात्मक अध्ययन या प्रमाणित लैब रिपोर्ट पेश नहीं की गई है. आवेदन में पौधों की किस्मों की पहचान के लिए इस्तेमाल होने वाले DUS (Distinctness, Uniformity and Stability) विशेषताओं का उपयोग किया गया है, जो किसी उत्पाद की 'भौगोलिक विशिष्टता' सिद्ध करने के लिए सही पैमाना नहीं है.
आगे क्या?
SABC ने जीआई रजिस्ट्रार से मांग की है कि उंझा को दिए गए जीआई टैग के दावों, लैब परीक्षणों और भौगोलिक संबंधों की एक स्वतंत्र पीयर-रिव्यू (Peer-Review) जांच कराई जाए. उनका मानना है कि इससे न केवल जीआई प्रणाली की विश्वसनीयता बनी रहेगी, बल्कि पश्चिमी राजस्थान के लाखों किसानों के साथ भी न्याय हो सकेगा.
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