सिरोही में तिरंगा यात्रा, BJP कार्यकर्ताओं पर ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाने का आरोप
Sirohi News: सिरोही प्रधान हंसमुख कुमार भी बिना हेलमेट दुपहिया वाहन चलाते हुए दिखाई दिए हैं. वहीं, राज्यमंत्री ओटाराम देवासी दुपहिया वाहन पर पीछे बैठकर खड़े होकर तिरंगा लहराते नजर आए.

हर घर तिरंगा अभियान के तहत भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ओर से सिरोही शहर में भव्य तिरंगा वाहन रैली निकाली गई. रामझरोखा से शुरू हुई रैली शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए शहीद स्मारक पहुंची. यहां देश के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई. रैली के दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथों में तिरंगा लेकर भारत माता की जय और वंदे मातरम् के जयघोष लगाए.
रैली में राज्यमंत्री ओटाराम देवासी, बीजेपी जिलाध्यक्ष डॉ. रक्षा भंडारी सहित पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे. जिला महामंत्री एवं तिरंगा यात्रा संयोजक गणपत सिंह राठौड़ के नेतृत्व में वाहन रैली निकाली गई. इस यात्रा के दौरान ट्रैफिक नियमों अब सवालों के घेरे में है.
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तिरंगा यात्रा के बीच ट्रैफिक नियमों की अनदेखी पर उठे सवाल
देशभक्ति के संदेश के बीच रैली से सामने आई तस्वीरों और वीडियो को लेकर ट्रैफिक नियमों की अनदेखी पर सवाल खड़े हो गए हैं. आरोप है कि रैली के दौरान राज्यमंत्री ओटाराम देवासी समेत कई बीजेपी नेता और जनप्रतिनिधि बिना हेलमेट दुपहिया वाहनों पर नजर आए.
सिरोही प्रधान हंसमुख कुमार भी बिना हेलमेट दुपहिया वाहन चलाते हुए दिखाई दिये हैं. वहीं, राज्यमंत्री ओटाराम देवासी दुपहिया वाहन पर पीछे बैठकर खड़े होकर तिरंगा लहराते नजर आए. यदि तस्वीरों और वीडियो में दिखाई दे रही स्थिति सही है, तो यह यातायात सुरक्षा के लिहाज से गंभीर सवाल खड़े करती है.
आम वाहन चालकों के चालान, नेताओं पर कार्रवाई क्यों नहीं?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ट्रैफिक नियम राजनीतिक रैलियों के दौरान भी उतने ही लागू होते हैं, जितने आम नागरिकों पर? सिरोही में पुलिस और यातायात विभाग की ओर से बिना हेलमेट वाहन चलाने वाले आम लोगों के खिलाफ कार्रवाई और चालान की कार्रवाई की जाती है. ऐसे में यदि किसी राजनीतिक रैली में जनप्रतिनिधि ही बिना हेलमेट नजर आते हैं, तो कार्रवाई को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है. रैली के दौरान पुलिस की मौजूदगी के बीच ऐसी तस्वीरें सामने आने से यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या पुलिस प्रशासन ने इस मामले को देखा? और यदि देखा तो क्या कोई कार्रवाई की गई?
बीजेपी की रैली में देशभक्ति का संदेश
बीजेपी जिला मीडिया प्रभारी रोहित खत्री के अनुसार, रामझरोखा से शुरू हुई तिरंगा यात्रा शहीद स्मारक पहुंची, जहां वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई. कार्यकर्ताओं ने तिरंगे के सम्मान और राष्ट्र की एकता-अखंडता के लिए संकल्प लिया. राज्यमंत्री ओटाराम देवासी ने कहा कि तिरंगा देश की आन-बान-शान का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि हर घर तिरंगा अभियान केवल घर पर झंडा लगाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि देशभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प है.
कांग्रेस पर भी बरसे देवासी
राज्यमंत्री देवासी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ दिन पहले कांग्रेस ने मशाल जुलूस निकालकर लोगों को गुमराह करने का काम किया. उन्होंने दावा किया कि ढाई साल में सिरोही विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए 1500 करोड़ रुपये लाए गए हैं. बीजेपी जिलाध्यक्ष डॉ. रक्षा भंडारी ने तिरंगा यात्रा को देश के स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बताया. वहीं, गणपत सिंह राठौड़ ने कहा कि तिरंगे के तीन रंग त्याग, शांति और समृद्धि का संदेश देते हैं.
अब बड़ा सवाल- क्या कानून सभी के लिए बराबर है?
तिरंगा यात्रा ने जहां राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया, वहीं बिना हेलमेट दुपहिया वाहनों पर नजर आए नेताओं की तस्वीरों ने ट्रैफिक नियमों के समान पालन को लेकर बहस छेड़ दी है. सवाल सीधा है, यदि आम नागरिक के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य है, तो जनप्रतिनिधियों के लिए भी यही नियम लागू होना चाहिए या नहीं? और यदि नियमों की अनदेखी हुई है, तो क्या पुलिस प्रशासन इस मामले में कार्रवाई करेगा?
खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नियमों के पालन को लेकर सामने आए कई उदाहरण का भी हवाला दिया जा रहा है. स्वयं प्रधानमंत्री इसको लेकर सख्त हैं तो उनकी पार्टी के नेता इतने लापरवाह कैसे? सवाल उठ रहे हैं कि जब शीर्ष नेतृत्व सार्वजनिक जीवन में नियमों और अनुशासन को महत्व देने की बात करता है, तो स्थानीय स्तर पर पार्टी के जनप्रतिनिधियों से भी उसी अनुशासन की अपेक्षा क्यों नहीं की जानी चाहिए?
बीजेपी खुद अनुशासन और राष्ट्रहित की बात करती है. ऐसे में पार्टी की तिरंगा यात्रा के दौरान यदि उसके ही नेता ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करते नजर आते हैं, तो यह पार्टी की कार्यशैली और अनुशासन को लेकर असहज सवाल खड़े करता है. देशभक्ति के संदेश के साथ निकली तिरंगा यात्रा अब ट्रैफिक नियमों की पालना को लेकर उठे इन सवालों के कारण भी चर्चा में है.
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