जयपुर: निर्माणाधीन बिल्डिंग का खुला टैंक बना काल, 8 फीट गहरे पानी में डूबकर दो मासूम बच्चियों की मौत
Jaipur News In Hindi: घटनास्थल की तस्वीरें बेहद मार्मिक हैं. टैंक के किनारे पड़ी दोनों बच्चियों की चप्पलें इस हादसे की खामोश गवाह बनी हुई हैं.

राजस्थान की राजधानी जयपुर के शिप्रापथ थाना इलाके की जगन्नाथपुरी सेकंड कॉलोनी में लापरवाही ने दो मासूम जिंदगियां छीन लीं. यहां एक निर्माणाधीन मकान के पास बने खुले पानी के टैंक में गिरने से दो बच्चियों की दर्दनाक मौत हो गई.
जानकारी के मुताबिक, जिस बिल्डिंग का निर्माण कार्य चल रहा था, वह पिछले करीब 10 दिनों से बंद पड़ा था. लेकिन वहां बने करीब 8 फीट गहरे पानी के टैंक को बिना ढके ही छोड़ दिया गया. यही लापरवाही इस बड़े हादसे की वजह बनी.
डूबकर निकल नहीं पाईं बच्चियां
मंगलवार देर शाम 5 साल की राधिका और 6 साल की गौसिया कॉलोनी में खेल रही थीं. खेलते- खेलते दोनों बच्चियां टैंक के पास पहुंचीं और अनजाने में उसमें गिर गईं. टैंक गहरा होने के कारण वे बाहर नहीं निकल सकीं और डूबने से उनकी मौत हो गई.
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टैंक के किनारे मिलीं बच्चियों की चप्पलें
घटनास्थल की तस्वीरें बेहद मार्मिक हैं. टैंक के किनारे पड़ी दोनों बच्चियों की चप्पलें इस हादसे की खामोश गवाह बनी हुई हैं. दोनों परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार के हैं और जयपुर में किराए पर रहकर कामकाज करते हैं. राधिका के पिता दिव्यांग हैं और ट्राइसाइकिल पर मोबाइल कवर बेचकर परिवार का गुजारा करते हैं. वहीं गौसिया के पिता पेंटिंग का काम करते हैं.
सीसीटीवी फुटेज आए सामने
घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है. पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है और मामले की जांच जारी है. इस बीच, घटना से पहले के CCTV फुटेज भी सामने आए हैं, जिनमें दोनों बच्चियां टैंक के आसपास खेलती नजर आ रही हैं.
बिल्डिंग मालिक के खिलाफ एक्शन की मांग
शुरुआती जानकारी के मुताबिक निर्माणाधीन मकान भरतपुर के एक व्यक्ति का बताया जा रहा है. स्थानीय लोगों ने इस हादसे के लिए सीधी तौर पर लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है और बिल्डिंग के मालिक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की है.
'टैंक को ढक दिया जाता तो नहीं होता हादसा'
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर टैंक को ढक दिया जाता तो शायद ये हादसा नहीं होता. लोगों का कहना है कि यहां बच्चे रोज खेलते हैं, लेकिन सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं था. ऐसे निर्माण स्थलों की नियमित जांच होनी चाहिए. इसके साथ ही पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिए जाने की भी मांग की गई है.
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Source: IOCL


























