जालोर में मौसम ने बदला मिजाज, सीजन की पहली मावठ, बारिश के बाद बढ़ी सर्द हवाएं और कोहरा!
Rajasthan News: जालोर जिले में बुधवार शाम को सीजन की पहली मावठ के रूप में बारिश हुई, जिससे औसतन 1.5 एमएम की बारिश दर्ज हुई है. वहीं बारिश के कारण अगले दो दिनों तक घना कोहरा रहेगा और पारा ओर गिरेगा.

जालोर जिले में बुधवार शाम को मौसम का मिजाज अचानक बदल गया और सीजन की पहली मावठ के रूप में जिले के विभिन्न हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई, जिससे औसतन 1.5 एमएम वर्षा दर्ज की गई. वहीं बारिश के बाद शीतलहर का असर बढ़ गया है और अगले दो दिनों तक घना कोहरा छाने के साथ-साथ 3 जनवरी के बाद तापमान में और गिरावट की संभावना भी जताई गई है.
बारिश के कारण जिलेभर में ठंडी हवाएं बड़ी
राजस्थान के जालोर जिले में बुधवार दोपहर बाद पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से आसमान में बादल छा गए और शाम होते-होते शहर के मुख्य चौराहों सहित कई इलाकों में रिमझिम बारिश शुरू हो गई. बारिश के साथ ही जिलेभर में ठंडी हवाएं चलने लगीं, जिससे ठिठुरन ओर भी बढ़ गई.
देर शाम और रात के समय धुंध और कोहरे का असर भी देखने को मिला रहा है. वहीं गुरुवार सुबह से ही सड़कों पर कोहरे के कारण दृश्यता कम रही, जिससे वाहन चालकों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है.
जिले का अधिकतम तापमान 25.8 डिग्री और न्यूनतम तापमान 10.9 डिग्री रहा
कृषि विज्ञान केंद्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार बुधवार को जिले का अधिकतम तापमान 25.8 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 10.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. वहीं जिले में हुई इस पहली मावठ के दौरान औसतन 1.5 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई है.
मौसम विभाग के अनुसार 1 जनवरी को जिले के उत्तरी व पूर्वी भागों में भी मावठ की संभावना बनी हुई है, जबकि 3 जनवरी तक उत्तरी, पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों में घना कोहरा छाया रह सकता है. इसके बाद मौसम शुष्क रहने के आसार भी हैं, लेकिन तापमान में और गिरावट आने से ठंड का असर तेज होगा.
कृषि विशेषज्ञ ने कहा- बारिश के कारण फसलों को फिलहाल कोई नुकसान नहीं
कृषि विशेषज्ञ भंवर लखानी, कृषि पर्यवेक्षक ने बताया कि मावठ की हल्की बारिश और बूंदाबांदी से रबी फसलों को फिलहाल कोई नुकसान नहीं है, बल्कि यह नमी कई स्थानों पर फसलों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी.
हालांकि यदि मौसम लगातार बिगड़ता है और तेज बारिश या ओलावृष्टि होती है तो सरसों की फसल में फूल व फलियां झड़ने के साथ रोग लगने की संभावना भी बढ़ सकती है, वहीं अरंडी की फसल को भी आंशिक नुकसान हो सकता है. उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि आगामी तीन दिनों तक सिंचाई अथवा किसी भी प्रकार की दवा या स्प्रे का उपयोग न करें.
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