Rajasthan: ब्यावर नगर परिषद सभापति नरेश कनौजिया 23 दिन बाद दूसरी बार निलंबित, जानें- क्या है वजह
कनौजिया के निलंबन होने के बाद सभापति की कुर्सी फिर खाली हो गई है. पिछली बार सरकार ने इस सीट पर कांग्रेस पार्षद का मनोनयन किया था. अब एक बार फिर इस कुर्सी पर कांग्रेस पार्षद बैठने की प्रबल संभावना है.

Rajasthan News: राजस्थान सरकार के स्वायत्त शासन विभाग ने ब्यावर नगर परिषद सभापति नरेश कनौजिया को सभापति व सदस्य पद से एक बार फिर निलंबित कर दिया है. सभापति पद वापस संभालने के 23 दिन बाद ही सरकार ने दूसरी बार कनौजिया का निलंबन किया है. विभाग ने कनौजिया के खिलाफ चल रही न्यायिक जांच प्रभावित होने के चलते यह फैसला किया है. सभापति पद से गत 17 जून को निलंबित किए जाने के बाद कनौजिया ने न्यायालय की शरण ली थी. कोर्ट में एक जुलाई से सुनवाई शुरू हुई. पिछली 23 नवंबर को कोर्ट ने कनौजिया के निलंबन आदेश को निरस्त करने का फैसला सुनाया. कोर्ट के आदेश पर कनौजिया एक बार फिर सभापति पद पर आसीन हो सके थे.
भ्रष्टाचार के आरोप में हुआ था निलंबन
बीजेपी नेता कनौजिया को पहली बार गत 17 जून 2022 को स्वायत्त शासन विभाग ने पट्टे जारी करने में अनियमितताएं और भ्रष्टाचार के आरोप में ब्यावर नगर परिषद सभापति नरेश कनौजिया को निलंबित किया था. निलंबन से पहले विभाग ने सभापति को नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा था. सभापति को नोटिस देने से पहले विभाग के क्षेत्रीय उपनिदेशक की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी ने पट्टा प्रकरण की जांच की थी. जांच में अधिकारियों ने सभापति को दोषी माना था. मामले में राज्य सरकार ने कनौजिया के खिलाफ राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 39 (3) के तहत न्यायिक जांच के आदेश भी दिए.
दूसरी बार इसलिए हुआ निलंबन
विभागीय आदेश के क्रम में राजस्थान हाईकोर्ट एस.बी.सिविल रिट नंबर 9244/2022 में 23 नवंबर 2022 को पारित आदेश की अनुपालना में विभागीय आदेश 2305, 17 जून 2022 को प्रत्याहारित कर दिया. इसके बाद स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक एवं संयुक्त सचिव ने जारी आदेश में बताया कि कनौजिया के विरुद्ध राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 39 (3) के अर्न्तगत न्यायिक जांच वर्तमान में प्रक्रियाधीन है. कनौजिया के पद पर बने रहने से न्यायिक जांच प्रभावित किए जाने की आशंका है. इसके चलते कनौजिया को सभापति व सदस्य के विरुद्ध राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 43 (10) के तहत आरोप प्रथम दृष्ट्या प्रमाणित पाए जाने के कारण राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 39 (6) के अर्न्तगत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए सभापति व सदस्य पद से निलंबित किया है.
अब सभापति मनोनयन का इंतजार
सभापति पद से कनौजिया का निलंबन होने के बाद सभापति की कुर्सी फिर खाली हो गई है. पिछली बार सरकार ने इस सीट पर कांग्रेस पार्षद का मनोनयन किया था. अब एक बार फिर इस कुर्सी पर कांग्रेस पार्षद बैठने की प्रबल संभावना है. वर्तमान में सभापति पद दलित वर्ग के लिए आरक्षित है. ऐसे में अभी छह पार्षद इस पद के योग्य हैं. सभी पार्षद एक्टिव मोड पर हैं और सभापति बनने की जुगत में लगे हैं. कनौजिया का निलंबन होने के बाद सियासी नेताओं-कार्यकर्ताओं के साथ आमजन को सभापति के मनोनयन का इंतजार है.
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