राजस्थान: मॉनसून सत्र के पहले दिन हंगामा, विधानसभा के गेट पर चढ़े कांग्रेसी
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश व मीडिया कवरेज पर कथित प्रतिबंध का मुद्दा उठाया.

राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र बृहस्पतिवार, 20 अगस्त को शुरू हुआ जिसमें मुख्य विपक्षी दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विधायकों ने भाग नहीं लिया. कांग्रेस विधायकों ने राज्य के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर कथित प्रतिबंध के मुद्दे पर विधानसभा परिसर के बाहर धरना दिया. इस दौरान कई कांग्रेसी नेता विधानसभा के गेट पर चढ़ गए.
वहीं सत्र की कार्यवाही शुरू होने पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विपक्ष के सदस्यों के सदन में नहीं होने पर खेद जताया. उन्होंने कहा कि विपक्ष की बेंचों को खाली देखकर मन में पीड़ा है. विपक्ष के सदस्यों से कार्यवाही में भाग लेने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि यह स्थिति ठीक नहीं है. सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग और संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने भी सदन से अनुपस्थित रहने के लिए कांग्रेस के विधायकों पर कटाक्ष किया. सदन में कुछ विधायी कार्य निपटाए गए और दिवंगतों को श्रद्धांजलि देने के बाद कार्यवाही शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी गई.इससे पहले कांग्रेस विधायक बृहस्पतिवार की सुबह पोद्दार मूक-बधिर स्कूल पहुंचे थे.
क्या बोले सचिन पायलट?
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश व मीडिया कवरेज पर कथित प्रतिबंध का मुद्दा उठाया. जूली ने कहा कि इस आदेश को वापस लिया जाए. उन्होंने कहा कि सरकार बच्चों के आंदोलन को दबाना चाहती है.बाद में ये विधायक जूली की अगुवाई में पोद्दार स्कूल से पैदल मार्च करते हुए विधानसभा के मुख्य दरवाजे तक पहुंचे.. जब विधायकों ने समूह में विधानसभा में जाने की कोशिश की तो पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर उन्हें रोक दिया. इस दौरान पुलिस से धक्का-मुक्की भी हुई. कई नेता बैरिकेड्स पर चढ़ गए. ये विधायक विधानसभा के बाहर धरने पर बैठ गए.कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि विधायकों को छह नंबर दरवाजे से अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है तथा दरवाजे पर ताला लगा दिया गया है.
वहीं इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता सचिन पायलट. ने कहा कि पूरे राजस्थान में हमने स्कूलों की खस्ता हालत देखी है. लोग विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. हालात सुधारने के बजाय, सरकार लोगों को स्कूलों में घुसने से रोक रही है और फ़ोटोग्राफ़ी पर पाबंदी लगा रही है-ताकि अपनी नाकामियों को छिपा सके. हाई कोर्ट ने भी सरकार को फटकार लगाई है और स्कूलों को बेहतर बनाने के निर्देश दिए हैं. सरकार शिक्षा, बच्चों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर नहीं है.'






















