'अगर सचिन पायलट अपनी गलती मान लेते तो...', मानेसर कांड का जिक्र कर अशोक गहलोत का बड़ा बयान
Ashok Gehlot On Sachin Pilot: अशोक गहलोत ने कहा कि अगर सचिन पायलट कह देते कि उनकी राजनीतिक यात्रा में मेरा भी सहयोग किया था तो उन्हें खुशी होती. हालांकि इस पर पायलट का कोई भी बयान सामने नहीं आया है.

राजस्थान में गर्मी के साथ-साथ सियासी पारा भी हाई है. प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर कोरोना काल के चर्चित मानेसर प्रकरण की गूंज सुनाई दी है. बीजेपी नेताओं द्वारा लगातार मानेसर घटनाक्रम को लेकर की जा रही टिप्पणियों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार (7 जून) को न सिर्फ फिर से अपनी बात रखी, बल्कि बीजेपी से लेकर अपनी सरकार में डिप्टी सीएम रहे सचिन पायलट पर भी खुलकर बोले. उन्होंने कहा कि पायलट अपनी गलती मान लेते तो बीजेपी को बार बार मानेसर कांड पर बोलने का मौका नहीं मिलता.
इसके अलावा अशोक गहलोत ने सचिन पायलट को लेकर कई ऐसी बातें कहीं, जिन पर आने वाले दिनों में सियासी संग्राम मचना तय है. दरअसल, पूर्व सीएम गहलोत ने कहा कि बीजेपी बार-बार मानेसर प्रकरण को लेकर कांग्रेस पर तंज कसती है, जबकि यह कांग्रेस का आंतरिक मामला है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सभी नेता आपस में बैठकर गलतफहमियां दूर कर रहे हैं और पार्टी का हाईकमान आज भी राजस्थान कांग्रेस पर पूरा भरोसा करता है.
'कांग्रेस हाईकमान के खिलाफ नहीं थी बगावत'
25 सितंबर 2022 के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा कि उस समय कांग्रेस हाईकमान के खिलाफ कोई बगावत नहीं हुई थी. उनके मुताबिक उस वक्त केवल उस व्यक्ति का विरोध हुआ था, जिसका नाम मुख्यमंत्री पद के लिए चल रहा था.
तो मुझे सीएम पद पर नहीं रखा जाता- गहलोत
अशोक गहलोत ने कहा कि विधायकों की आपत्ति इस बात को लेकर थी कि जिन्होंने मानेसर जाकर सरकार गिराने की कोशिश की थी, उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि यदि वास्तव में हाईकमान के खिलाफ विद्रोह हुआ होता तो उन्हें बाद में मुख्यमंत्री पद पर बनाए नहीं रखा जाता.
ये भी पढ़ें: 'मेरे साथ साजिश हुई, वरना मैं बनता कांग्रेस अध्यक्ष', अशोक गहलोत के दावे से मचा हड़कंप
'सचिन पायलट से नहीं व्यक्तिगत कटुता'
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने यह भी कहा कि आज भी उनके और सचिन पायलट के बीच व्यक्तिगत स्तर पर कोई कटुता नहीं है. दोनों मिलते हैं, बातचीत करते हैं और हंसी-मजाक भी होता है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पायलट ने आज तक अपनी गलती स्वीकार नहीं की और इसी कारण यह मुद्दा बार-बार सामने आता रहता है.
BJP को बार-बार मौका नहीं मिलता- गहलोत
पूर्व सीएम ने याद दिलाया कि मानेसर प्रकरण के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से 'फॉरगेट एंड फॉरगिव' की बात कही थी, लेकिन उनकी भावना को समझा नहीं गया. अगर सचिन पायलट इसे समझ गए होते तो आज बीजेपी को बार-बार बोलने का मौका नहीं मिलता.
'पायलट को केंद्र में मंत्री बनाने में की मदद'
अपने बयान में गहलोत ने यह भी दावा किया कि उन्होंने सचिन पायलट को केंद्र में मंत्री बनाए जाने के लिए मदद की थी. उन्होंने कहा कि पायलट को यह बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार करनी चाहिए थी. गहलोत ने कहा कि यदि पायलट यह कह देते कि उनकी राजनीतिक यात्रा में गहलोत ने भी सहयोग किया था तो उन्हें खुशी होती.
गहलोत ने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि कुछ लोग लगातार पायलट को लेकर अवास्तविक राजनीतिक संभावनाएं गढ़ते रहते हैं, जिससे उनका ही नुकसान होता है. उन्होंने कहा कि देश और कांग्रेस दोनों संकट के दौर से गुजर रहे हैं और ऐसे समय में सभी कांग्रेस नेताओं को मिलकर पार्टी को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए.
क्या था पूरा मानेसर विवाद?
गौरतलब है कि जुलाई 2020 में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ हरियाणा के मानेसर चले गए थे. कांग्रेस नेतृत्व ने इसे सरकार के खिलाफ बगावत माना था, जबकि पायलट खेमे ने इसे राजनीतिक असहमति बताया था. इसके बाद राजस्थान कांग्रेस लंबे समय तक दो खेमों में बंटी रही.
वहीं सितंबर 2022 में कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान अशोक गहलोत के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की चर्चा के बीच मुख्यमंत्री बदलने की अटकलें तेज हुईं. उसी समय कांग्रेस विधायक दल की बैठक से पहले हुए समानांतर शक्ति प्रदर्शन को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था.
गहलोत के बयान के क्या हैं मायने?
गहलोत के ताजा बयान से साफ संकेत मिलता है कि वह अब भी मानेसर प्रकरण को कांग्रेस के भीतर हुए सबसे बड़े राजनीतिक विश्वासघात के रूप में देखते हैं. हालांकि उन्होंने व्यक्तिगत रिश्तों को सामान्य बताया है, लेकिन पायलट से 'गलती स्वीकार करने' की अपेक्षा दोहराकर यह संकेत भी दिया है कि उनके मन में उस घटनाक्रम की टीस अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.
सियासी जानकारों ने क्या कहा?
सियासी जानकारों का मानना है कि आगामी संगठनात्मक और चुनावी तैयारियों के बीच गहलोत का यह बयान कांग्रेस के भीतर पुराने विवादों को फिर चर्चा में ला सकता है. हालांकि साथ ही उन्होंने पार्टी की एकजुटता और सामूहिक नेतृत्व पर जोर देकर यह संदेश भी देने की कोशिश की है कि कांग्रेस को भविष्य की राजनीति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.
पायलट ने साध रखी है चुप्पी
अशोक गहलोत ने आज भले ही एक बार फिर से सचिन पायलट को लेकर कई बातें की हों, लेकिन उनके इस बयान पर सचिन पायलट ने चुप्पी साध रखी है. इस मामले पर पायलट का कोई बयान फिलहाल सामने नहीं आया है.
ये भी पढ़ें: राजस्थान: 'संभलकर रहना, गोली मार देंगे', मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बेटे को मिली धमकी

























