संगरूर: DC ऑफिस में शख्स ने निगला जहरीला पदार्थ, अब पुलिस का चौंकाने वाला खुलासा
संगरूर के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में एक व्यक्ति द्वारा जहरीला पदार्थ निगलने के बाद एसएसपी नवजोत ग्रेवाल ने बताया कि आरोपी पर पहले से 9 आपराधिक मामले दर्ज थे, इसी को लेकर वे दबाव बनाना चाह रहा था.

पंजाब के संगरूर के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में एक व्यक्ति द्वारा संदिग्ध/जहरीला पदार्थ निगलने की घटना के मामले में संगरूर पुलिस ने अहम जानकारी साझा की है. संगरूर के एसएसपी नवजोत ग्रेवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि उक्त व्यक्ति जग्गा सिंह के खिलाफ पहले से 9 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 4 मामलों में उसे दोषी ठहराया जा चुका है. पुलिस का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों पर दबाव बनाने के उद्देश्य से उसके द्वारा यह कदम उठाया गया. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.
वीडियो में बोला- 'कार्रवाई नहीं हुई तो जान दे दूंगा'
संगरूर डीसी कार्यालय में बीती 20 तारीख को करीब शाम 4 बजे गांव जनाल के रहने वाले जग्गा सिंह द्वारा संदिग्ध/जहरीला पदार्थ निगलने की घटना सामने आई थी. एसएसपी नवजोत ग्रेवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि जग्गा सिंह का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है. पुलिस के मुताबिक उसके खिलाफ आबकारी अधिनियम, एनडीपीएस एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं के तहत कुल 9 एफआईआर दर्ज हैं. एसएसपी के अनुसार, इनमें से चीमा थाना और पटियाला से संबंधित चार मामलों में उसे दोषी ठहराया जा चुका है, जबकि बाकी मामले अदालत में विचाराधीन हैं.
पुलिस के मुताबिक, 12 तारीख को जग्गा सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो डालकर कहा था कि यदि उसके मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो वह अपनी जान को नुकसान पहुंचाने जैसा कदम उठाएगा. एसएसपी ने कहा कि किसी भी पब्लिक सर्वेंट पर काम करवाने के लिए इस तरह दबाव बनाना कानूनन अपराध है. वहीं पंचायत की ओर से भी पुलिस के सामने अपना पक्ष रखा गया है. पुलिस का कहना है कि पूरे मामले के तथ्यों और दोनों पक्षों के बयानों की जांच की जा रही है.
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मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर भेजी इलाका मजिस्ट्रेट को
एसएसपी नवजोत ग्रेवाल ने स्पष्ट किया कि किसी सरकारी कर्मचारी या पुलिस अधिकारी पर दबाव बनाने के उद्देश्य से अपनी जान को नुकसान पहुंचाने की धमकी देना या ऐसा कदम उठाना भारतीय न्याय संहिता की धारा 226 के तहत अपराध की श्रेणी में आ सकता है. पुलिस के मुताबिक, इस संबंध में 12 तारीख को पहले ही रिपोर्ट दर्ज कर इलाका मजिस्ट्रेट को कलंदरा भेज दिया गया था.
दूसरी ओर, गांव की पंचायत ने पुलिस के सामने दावा किया है कि गांव में नशे के खिलाफ कार्रवाई किए जाने पर पंचायत और प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश की जाती है और इस मामले में राजनीतिक शह होने का भी आरोप लगाया है. पुलिस प्रशासन का कहना है कि पंचायत के इन आरोपों सहित दोनों पक्षों के बयानों और उपलब्ध तथ्यों की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
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