पंजाब: मोगा में सिख किसान ने पेश की इंसानियत की मिसाल, मुस्लिम कब्रिस्तान के लिए दान की जमीन
Moga News: गांव की पंचायत ने कब्रिस्तान के लिए स्थायी रास्ता देने पर विचार किया. पंचायत के फैसले से सहमत होकर गांव के सिख किसान जगदीश सिंह ने कब्रिस्तान तक जाने के लिए अपनी जमीन दान दे दी.

पंजाब के मोगा जिले के गांव मेंहिना में एक किसान ने आपसी भाईचारे की अनोखी मिसाल पेश की. सिख किसान ने गांव के मुसलमान परिवारों के कब्रिस्तान तक जाने के लिए अपनी जमीन दान कर दी. गांव में कुछ मुसलमान परिवार 1947 से पहले से रह रहे हैं. उनका कब्रिस्तान खेतों के बीच स्थित है, लेकिन वहां जाने के लिए कोई पक्का रास्ता नहीं था. जब भी किसी की मृत्यु होती थी तो मृतक को दफनाने के लिए लोगों को किसानों की खड़ी फसलों के ऊपर से होकर गुजरना पड़ता था. कुछ दिन पहले एक बुजुर्ग मुस्लिम महिला के निधन के बाद उनके जनाजे को गेहूं के खेतों से होकर कब्रिस्तान तक ले जाना पड़ा, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा.
पंचायत ने रास्ते के लिए दान दी जमीन
इस घटना के बाद गांव की पंचायत ने कब्रिस्तान के लिए स्थायी रास्ता देने पर विचार किया. पंचायत के फैसले से सहमत होकर गांव के सिख किसान जगदीश सिंह ने कब्रिस्तान तक जाने के लिए अपनी जमीन दान करने का फैसला लिया.
इससे पहले भी इसी गांव में एक सिख परिवार द्वारा मस्जिद के लिए जमीन दान की गई थी. इस कदम से मोगा के इस किसान ने फिर से सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की मिसाल कायम की है.
जमीन दान देने वाले किसान ने दी यह जानकारी
किसान जगदीश सिंह ने बताया कि गांव में 1947 से पहले से कुछ मुस्लिम परिवार रह रहे हैं और हम सभी एक परिवार की तरह मिल-जुलकर रहते हैं. कुछ दिन पहले एक बुजुर्ग माता का निधन हो गया था. उनके जनाजे को कब्रिस्तान तक ले जाने के लिए मेरे खेत के ऊपर से होकर जाना पड़ा.
उन्होंने बताया कि कब्रिस्तान तो बहुत पुराना है, लेकिन वहां तक जाने के लिए कोई पक्का रास्ता नहीं है और पहले किसी ने इसकी मांग भी नहीं की थी. अब पंचायत ने रास्ता देने के बारे में सोचा है, तो हम जमीन देने के लिए आगे आए हैं.
उन्होंने कहा कि रास्ते के लिए जितनी भी जमीन की जरूरत होगी, हम देने को तैयार हैं, क्योंकि हम सभी एक ही गांव में एक परिवार की तरह रहते हैं. हमारा फर्ज बनता है कि हम एक-दूसरे का साथ दें और आपसी भाईचारा बनाए रखें.
इस मामले पर क्या बोले गांव के लोग?
मामले पर गांव के लोगों का कहना है कि गांव में मुसलमान परिवार 1947 से पहले से रह रहे हैं. गांव में सभी लोग एकजुट होकर एक परिवार की तरह रहते हैं. कब्रिस्तान के रास्ते के लिए जगदीश सिंह द्वारा दी गई जमीन ने गांव में फिर से आपसी भाईचारे का संदेश दिया है. इससे पहले भी एक सिख परिवार ने मस्जिद के लिए जमीन दान की थी, जो आपसी सौहार्द और एकता की मिसाल है.
सरपंच ने क्या कहा?
गांव के सरपंच अमनदीप सिंह भीमा ने बताया कि कब्रिस्तान तक जाने के लिए कागजों में कोई आधिकारिक रास्ता दर्ज नहीं है और न ही पहले कभी इसकी मांग की गई थी. उन्होंने कहा कि जैसे ही यह मामला उनके ध्यान में आया, सबसे पहले रास्ता देने के बारे में सोचा गया. इसके लिए किसान जगदीश सिंह से बात की गई, जिन्होंने एक ही बार में जमीन देने के लिए सहमति जता दी.
सरपंच ने बताया कि इसके लिए पटवारी से भी बातचीत हो चुकी है और जमीन को लिखित रूप में पक्का कर आधिकारिक तौर पर रास्ता तैयार करके दिया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि यही आपसी भाईचारे की मिसाल है, क्योंकि सभी लोग लंबे समय से मिल-जुलकर साथ रह रहे.
Source: IOCL



























