एकनाथ शिंदे के साथ आएंगे शरद पवार! NDA का हिस्सा कैसे बनेगी NCP-SP, तय हो गया फॉर्मूला
Sharad Pawar Alliance with Shiv Sena: शरद पवार अब MVA को छोड़कर NDA का हिस्सा बनने जा रहे हैं. वह सीधे तौर पर महायुति में अपनी पार्टी का विलय नहीं करेंगे बल्कि एकनाथ शिंदे के साथ गठबंधन करेंगे.

महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी (MVA) को बड़ा झटका लगा है. शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) अब एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ अलायंस का फैसला ले चुकी है. यानी महायुति गठबंधन के अंदर ही एक और गठबंधन होने जा रहा है. शरद पवार सीधे तौर पर NDA में पार्टी का विलय नहीं करेंगे बल्कि एकनाथ शिंदे की शिवसेना को समर्थन देते हुए गठबंधन में शामिल होने वाले हैं.
सूत्रों के हवाले से एक बड़ी खबर यह भी मिली है कि जयंत पाटील को सरकार में वित्त मंत्री का पद दिया जा सकता है. यह पद पहले एनसीपी चीफ अजित पवार के पास हुआ करता था. ऐसा कहा जाता है कि सुनेत्रा पवार की एनसीपी सीएम देवेंद्र फडणवीस की करीबी है. अब जब शरद पवार गुट एकनाथ शिंदे के साथ जाएगा तो सियासी समीकरण क्या होंगे?
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महायुति का फॉर्मूला अब क्या होगा? यह बड़ा सवाल है. शरद पवार के नेता जयंत पाटील ने दो दिन पहले ही सीएम देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की थी. इसके बाद गुरुवार (16 जुलाई) को जयंत पाटील और जितेंद्र आह्वाड डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे से मिले. जितेंद्र आह्वाड और एकनाथ शिंदे, दोनों ही ठाणे से आते हैं और वहां एक दूसरे के धुर विरोधी माने जाते हैं. ऐसे में यह मुलाकात अहम मानी जा रही थी.
NCP के दोनों गुटों का मर्जर संभव नहीं था
जब पहली बार शरद पवार के NDA में शामिल होने के बात हुई तो प्रमुख दल बीजेपी की तरफ से प्रस्ताव रखा गया कि शरद पवार और अजित पवार की NCP वापस से एकसाथ मिल जाएं. हालांकि, यह बात दोनों ही पार्टियों को मंजूर नहीं थी. सुनेत्रा पवार यह नहीं चाहती थीं कि पार्टी में पावर का बंटवारा हो. दूसरी ओर, शरद गुट भी यह कह रहा था कि शरद पवार जैसे दिग्गज नेता और सुप्रिया सुले जैसी सीनियर सांसद सुनेत्रा पवार के मातहत काम कैसे कर सकते हैं? इन सभी वजहों से दोनों गुटों का मर्जर हो नहीं सका.
शरद पवार के सामने रखी गईं क्या शर्तें?
बीजेपी भी यह नहीं चाहती कि इतने बड़े दलों के शामिल होने के बाद महायुति में खिचड़ी की स्थिति बने. सीट शेयरिंग को लेकर को विवाद न हो, इसके लिए पार्टी ने एक फॉर्मूला तय किया. शरद पवार और एकनाथ शिंदे पहले से ही इसपर बातचीत कर रहे थे. दोनों ने तय किया था कि शिवसेना और एनसीपी-एसपी मिलकर अलायंस करेंगे. शरद गुट महायुति में मर्ज नहीं होगा. भविष्य में जो भी चुनाव होंगे, उसमें सीट शेयरिंग शिंदे गुट और शरद गुट के बीच में होगी. दोनों ही अपने-अपने गढ़ों में अपने कैंडिडेट्स उतारकर एनडीए का हिस्सा बनेंगे. इसके अलावा, शरद पवार के सामने यह शर्त भी रखी गई थी कि वह परिसीमन बिल को समर्थन दें.
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