परिसीमन विधेयक पर महाराष्ट्र में हलचल, शरद पवार की पार्टी पर टिकी सबकी नजर; NCP ने दी सफाई
Maharashtra Politics: परिसीमन विधेयक को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. ऐसे में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं. अब सबकी निगाहें शरद पवार पर टिकी हैं.

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास ‘वर्षा’ पर आधी रात की बैठकें, दल-बदल की चर्चाएं और दिल्ली में आने वाले परिसीमन विधेयक को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. ऐसे में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं. क्या शरद पवार के 8 लोकसभा सांसद वही अहम कड़ी हैं, जिसकी बीजेपी को अपने बड़े विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए जरूरत है? आइए देखते हैं.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास ‘वर्षा’ पर देर रात हुई गोपनीय बैठकों ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर तेज कर दिया है. NCP के दोनों गुटों के नेताओं ने मुख्यमंत्री से अलग-अलग और संयुक्त रूप से मुलाकात की. इस बीच ऐसी भी चर्चा है कि NCP (SP) के आधे विधायक विकास निधि के लिए NDA में शामिल होना चाहते हैं. लेकिन सबसे बड़ा मुद्दा मोदी सरकार का प्रस्तावित परिसीमन विधेयक है.
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एनसीपी (एसपी) नेता सुप्रिया सुले का बड़ा बयान
संसद में सीमित बहुमत के चलते बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA को अतिरिक्त समर्थन की जरूरत है, ऐसे में शरद पवार की राजनीतिक ताकत अहम मानी जा रही है. इस बीच सुप्रिया सुले का बयान सामने आया. उन्होंने कहा, “हमने परिसीमन को लेकर किसी से कोई चर्चा नहीं की है और न ही किसी ने हमसे संपर्क किया है. जब विधेयक आएगा, तब हम अपना रुख तय करेंगे. लेकिन किसी भी विधेयक पर INDIA गठबंधन के भीतर विस्तार से चर्चा होगी."
उन्होंने आगे कहा, "INDIA गठबंधन ने परिसीमन की मांग नहीं की है. हमारी मांग है कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए. पिछले बजट सत्र में किरेन रिजिजू ने असदुद्दीन ओवैसी, मुझे और अरविंद सावंत को अलग-अलग बुलाया था. मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में हमने अमित शाह को पत्र लिखकर सभी दलों को एक साथ बुलाने की मांग की थी."
सुप्रिया सुले के बयान से साफ है कि विपक्ष परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर एकजुट होकर लड़ना चाहता है और बीजेपी के साथ किसी भी तरह की अंदरूनी बातचीत की अटकलों को खारिज कर रहा है.
जयंत पाटील ने सीएम से मुलाकात पर दी सफाई
वहीं NCP (SP) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने भी मुख्यमंत्री से अपनी देर रात की मुलाकात पर सफाई दी. उन्होंने इसे पूरी तरह विकास कार्यों से जुड़ा बताया, हालांकि परिसीमन को लेकर अपनी व्यक्तिगत राय भी रखी. उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री से मेरी मुलाकात पूरी तरह मेरे विधानसभा क्षेत्र के एक नगराध्यक्ष की कलेक्टर द्वारा की गई अयोग्यता के मामले को लेकर थी. कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई."
उन्होंने आगे कहा, "जहां तक NCP के दोनों गुटों के विलय का सवाल है, अजित पवार के निधन के बाद वह चर्चा पूरी तरह समाप्त हो गई, क्योंकि यही उनकी अंतिम इच्छा थी. परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण पर अंतिम फैसला हमारा केंद्रीय नेतृत्व करेगा. लेकिन मेरी व्यक्तिगत राय है कि राज्य के भीतर विधानसभा सीटों की संख्या में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जानी चाहिए."
संजय राउत ने जयंत पाटील की मुलाकात पर किया बचाव
NCP की ओर से स्थिति स्पष्ट करने की कोशिशों के बीच उसके सहयोगी दल भी सामने आए हैं. शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने जयंत पाटिल का बचाव करते हुए केंद्र सरकार की संसदीय रणनीति पर भी सवाल उठाए.
राउत ने कहा, "आपकी जानकारी गलत है. जयंत पाटिल मुख्यमंत्री फडणवीस से अपने क्षेत्र के एक नगराध्यक्ष की कथित अवैध अयोग्यता के मामले को लेकर मिले थे. बस इतनी ही बात थी." उन्होंने आगे कहा, "जहां तक संसद का सवाल है, अगर सरकार महिला आरक्षण विधेयक दोबारा लाती है, तो हमारे संशोधन स्वीकार किए बिना विपक्ष उसका समर्थन नहीं करेगा. हमने सरकार से कहा है कि पहले विधेयक की कमियां दूर की जाएं."
उद्धव ठाकरे गुट के 6 सांसद एनडीए में शामिल
बता दें कि उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसद पहले ही एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो चुके हैं. ऐसे में NCP (SP) के सामने अपने सांसदों और विधायकों को एकजुट बनाए रखने की बड़ी चुनौती है.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शरद पवार राज्य के लिए विकास निधि सुनिश्चित करने के उद्देश्य से NDA का साथ देंगे या फिर INDIA गठबंधन के साथ मिलकर ऐतिहासिक परिसीमन विधेयक का विरोध करेंगे? महाराष्ट्र की राजनीति की यह सबसे बड़ी सस्पेंस कहानी बनी हुई है.
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