'धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जवाबदेही की पहली सीढ़ी...', NEET मुद्दे पर बोलीं प्रियंका चतुर्वेदी
NEET Paper Leak Issues: छात्रों के प्रदर्शन को लेकर देशभर में सियासी घमासान जारी है. इस बीच शिवसेना यूबीटी नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर सरकार को घेरा है.

जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के प्रदर्शन को लेकर देशभर में सियासी घमासान जारी है. इस बीच शिवसेना यूबीटी नेता प्रियंका चतुर्वेदी का बयान सामने आया है. प्रियंका चतुर्वेदी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर सरकार को घेरा है. उन्होंने कहा, "धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जवाबदेही की दिशा में पहली सीढ़ी होगी."
पूर्व राज्यसभा सांसद ने कहा, "इससे सरकार यह साबित करेगी कि वह जनता की है, जनता के लिए है और जनता द्वारा चलाई जा रही है, और जनता की अपेक्षाओं के प्रति संवेदनशील है. कड़े कदम उठाने का एक समय होता है, लेकिन वह समय अब बीत चुका है. यह कदम पहले ही उठाया जाना चाहिए था, न कि अब जब छात्रों का इतना आक्रोश उमड़ रहा है."
Dharmendra Pradhan resigning will be the first step in accountability, the government will prove that it is of the people, for the people and by the people and is sensitive to what the people expect the government to do. There is a timing for announcing strict measures, however… pic.twitter.com/P1m7CLFhzy
— Priyanka Chaturvedi🇮🇳 (@priyankac19) July 24, 2026
नीट पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को घेरा
उन्होंने कहा कि सरकार लगातार कह रही है कि वह NEET पेपर लीक पर चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष जितना समय चाहे, उतना समय दिया जाएगा. लेकिन सरकार एक अहम बात नहीं बता रही. यह चर्चा सिर्फ चर्चा होगी, इससे किसी तरह की कार्रवाई तय नहीं होगी. यानी बहस तो होगी, दोनों पक्ष अपनी-अपनी बातें रखेंगे, लेकिन इससे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की कोई गारंटी नहीं है, जबकि यही छात्रों की सबसे बड़ी मांग है.
प्रियंका ने कहा कि सरकार परीक्षा सुधारों पर भी कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं दे रही है. अगर सिर्फ घंटों बहस होगी तो उसमें आरोप-प्रत्यारोप, विषय से भटकाने वाली बातें और पुरानी सरकारों या इतिहास तक की चर्चा हो सकती है. लेकिन जिस जवाब और कार्रवाई की छात्र मांग कर रहे हैं, वह शायद फिर भी नहीं मिलेगी.
उन्होंने कहा कि आज देशभर में प्रदर्शन कर रहे NEET के छात्र तीन बातें चाहते हैं. पहली, उन्होंने कभी टकराव नहीं मांगा, लेकिन उन्हें टकराव मिला. दिल्ली की सड़कों पर पहली बार छात्रों के खिलाफ पैलेट गन, लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ. 16 से 27 साल तक के छात्र सड़कों पर थे, लेकिन उनसे बातचीत करने के बजाय उनके साथ बल प्रयोग किया गया.
'अगर शिक्षा मंत्री इस्तीफा देते हैं तो....'
प्रियंका ने कहा कि छात्रों की दूसरी मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है. उनका मानना है कि अगर शिक्षा मंत्री इस्तीफा देते हैं तो इससे यह संदेश जाएगा कि सरकार जनता की भावनाओं के प्रति संवेदनशील है और जवाबदेही तय करने को तैयार है. इससे सरकार की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी. लेकिन फिलहाल ऐसा होता नहीं दिख रहा.
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उन्होंने कहा कि तीसरी मांग परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की है. छात्रों की मांग है कि सरकार उनसे बातचीत करे, परीक्षा व्यवस्था में बदलाव लाए और पेपर लीक माफिया पर प्रभावी कार्रवाई करे. उन्होंने दावा किया कि पिछले डेढ़ दशक में करीब 152 पेपर लीक हुए, लेकिन किसी मामले में दोषसिद्धि नहीं हुई.
पीएम मोदी के 'एक्स' पोस्ट पर कसा तंज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पोस्ट का जिक्र करते हुए प्रियंका ने कहा कि शुक्रवार (24 जुलाई) की सुबह प्रधानमंत्री ने X पर छात्रों के भविष्य और उनके हितों की बात की. उन्होंने लिखा कि युवाओं का भविष्य सबसे महत्वपूर्ण है और पेपर लीक के मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे. साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
हालांकि प्रियंका ने कहा कि सिर्फ ऐसे बयान अब लोगों का भरोसा नहीं जीत पा रहे हैं. उनका कहना था कि पिछले तीन वर्षों से प्रधानमंत्री और सरकार बार-बार यही बातें दोहरा रहे हैं कि पेपर लीक माफिया को बख्शा नहीं जाएगा और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई होगी.
अप्रैल 2024 और जुलाई 2024 में भी इसी तरह के बयान दिए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं दिखी. वीडियो के आखिर में प्रियंका ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जवाबदेही तय होगी और संसद जल्द सामान्य रूप से चलेगी, क्योंकि कई अहम विधेयक लंबित हैं और उन पर चर्चा होना भी जरूरी है.
प्रियंका चतुर्वेदी ने जारी किया वीडियो एपिसोड
इस वीडियो में प्रियंका चुतर्वेदी ने कहा, "पार्लियामेंट्री पीसी के दूसरे एपिसोड में आपका स्वागत है. पहले एपिसोड में मैंने वादा किया था कि संसद में पेश किए जा रहे बिल के अलावा भी शून्य काल को लेकर मैं कुछ और भी करना चाहती हूं. प्रियंका ने अपने लंबे वीडियो में कहा कि संसद में जो बिल पेश किए जाते हैं, उनके साथ-साथ मैं उन दिलचस्प जीरो आवर के मुद्दों पर भी बात करूंगी, जिन्हें सांसद उठाते हैं.
उन्होंने कहा, "आमतौर पर जीरो आवर में जनता से जुड़े मुद्दे, अपने-अपने क्षेत्र की समस्याएं या ऐसे विषय उठाए जाते हैं जिन पर चर्चा जरूरी होती है. अगर किसी सांसद का नाम बैलेट में आता है तो वह उस मुद्दे को सदन में रखता है और उस पर अहम चर्चा होती है." उन्होंने आगे कहा कि संसद का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा क्वेश्चन आवर होता है. इसमें सदन के पटल पर मंत्रियों से सवाल पूछे जाते हैं.
इसके अलावा कुछ अनस्टार्ड क्वेश्चन भी होते हैं, जिनका जवाब सदन में नहीं दिया जाता बल्कि मंत्रालय लिखित रूप में देता है. ऐसे सवालों और उनके जवाबों पर भी बात होनी चाहिए. प्रियंका ने कहा कि बिजनेस आवर के दौरान जिस बिल को पेश किया जाना होता है, उस पर तय समय तक चर्चा होती है. लेकिन दुर्भाग्य से पिछले चार दिनों से संसद ठीक तरीके से नहीं चल पा रही है. सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच पूरी तरह गतिरोध बना हुआ है.
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