NCP में सब कुछ ठीक नहीं? सुनेत्रा पवार ने विधायक से मांगा इस्तीफा, MLA ने साफ किया इनकार
Maharashtra News: NCP में सियासी हलचल के बीच विधायक इद्रीस नाईकवाडी से इस्तीफे की मांग की चर्चा तेज है. देवगिरी बंगले पर हुई बैठक में उन्होंने विधायक पद छोड़ने से साफ इनकार कर दिया.

महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर चल रही हलचल एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है. पहले विधान परिषद और फिर राज्यसभा चुनाव को लेकर पार्टी के अंदर असंतोष की खबरें सामने आई थीं. अब पार्टी के विधायक इद्रीस नाईकवाडी के संभावित इस्तीफे को लेकर नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई है.
सूत्रों के मुताबिक, राज्यसभा चुनाव में NCP की ओर से राजेंद्र जैन को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के कई नेताओं ने हैरानी जताई थी. इस फैसले के बाद वरिष्ठ नेता और मंत्री छगन भुजबल की नाराजगी की भी चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में लगातार सुनाई दे रही हैं. भुजबल के हालिया बयानों को भी इसी नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है.
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देवगिरी बंगले पर हुई महत्वपूर्ण बैठक
इसी बीच पार्टी नेतृत्व ने विधायक इद्रीस नाईकवाडी को लेकर एक अहम बैठक बुलाई. यह बैठक मुंबई स्थित देवगिरी बंगले पर आयोजित की गई, जिसमें पार्टी के कई बड़े नेता मौजूद रहे.
जानकारी के अनुसार, बैठक में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, पार्थ पवार और विधायक इद्रीस नाईकवाडी के बीच लंबी चर्चा हुई. बैठक का मुख्य विषय नाईकवाडी के इस्तीफे को लेकर बताया जा रहा है.
इस्तीफे के बदले बड़े अवसर का आश्वासन
सूत्रों का दावा है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इद्रीस नाईकवाडी से विधायक पद छोड़ने का आग्रह किया. उन्हें यह भरोसा भी दिलाया गया कि भविष्य में पार्टी उनकी राजनीतिक भूमिका को और मजबूत करेगी और उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी.
हालांकि, बैठक में नाईकवाडी अपने रुख पर कायम नजर आए. बताया जा रहा है कि उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वे विधायक पद से इस्तीफा नहीं देंगे. उनके इस रुख के बाद पार्टी के भीतर चल रही चर्चाएं और तेज हो गई हैं.
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फिलहाल NCP की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. लेकिन लगातार सामने आ रही राजनीतिक गतिविधियों ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि पार्टी के भीतर कई अहम फैसलों को लेकर मंथन जारी है. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इद्रीस नाईकवाडी अपने फैसले पर कायम रहते हैं या पार्टी नेतृत्व कोई नया राजनीतिक रास्ता निकालता है.
























