राज ठाकरे का IPS विश्वास नांगरे पाटिल पर हमला, कहा- खाकी वर्दी अब संघ के खाकी रंग से जुड़ी?
Mumbai News In Hindi: राज ठाकरे ने IPS विश्वास नांगरे पाटिल पर RSS सम्मेलन में शामिल होकर प्रशंसा करने का आरोप लगाया. दोहरी निष्ठा बताते हुए इस्तीफे की सलाह दी. मुख्यमंत्री-गृहमंत्री पर भी सवाल उठाए.

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने प्रसिद्ध आईपीएस अधिकारी विश्वास नांगरे पाटिल पर निशाना साधते हुए उन पर दोहरी निष्ठा का आरोप लगाया है. राज ठाकरे ने कहा कि एक पुलिस अधिकारी की निष्ठा केवल अपने विभाग और संवैधानिक कर्तव्यों के प्रति होनी चाहिए, न कि किसी संगठन के प्रति.
राज ठाकरे ने अपने पोस्ट में लिखा कि वर्तमान में राज्य में हिंदू सम्मेलन आयोजित हो रहे हैं. इन्हीं में से एक सम्मेलन में शामिल होकर विश्वास नांगरे पाटिल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उसके संस्थापकों की खुलकर प्रशंसा की. राज ने कहा, “भले ही ये सम्मेलन गैर-राजनीतिक बताए जा रहे हों, लेकिन ये राजनीतिक ही हैं.”
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“सरकारी अधिकारी को ऐसे मंच पर नहीं जाना चाहिए”
राज ठाकरे ने सवाल उठाया कि क्या किसी सरकारी कर्मचारी, खासकर पुलिस अधिकारी को ऐसे कार्यक्रम में जाना उचित है? उन्होंने कहा, “यदि संघ के प्रति लगाव है तो मन में रखें या इस्तीफा देकर भाजपा या संघ से जुड़ जाएं. सत्ता के करीबी अधिकारियों के लिए पुनर्वास की गारंटी पहले से चल रही है.” उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, “हम सोचते थे कि नांगरे पाटिल की खाकी वर्दी पुलिस विभाग का प्रतीक है, लेकिन अब लगता है वह RSS के पुराने खाकी रंग से जुड़ी हुई है.”
सरकार की चुप्पी पर सवाल
राज ठाकरे ने मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से भी सवाल किया कि क्या उन्हें यह दोहरी निष्ठा स्वीकार है? उन्होंने चेतावनी दी कि आज चुप रहना कल गलत परंपरा की नींव रख देगा. उन्होंने 2012 के एक मामले का हवाला देते हुए कहा- साल 2012 में रजा अकादमी के विरोध में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना द्वारा निकाले गए मोर्चे में एक कॉन्स्टेबल ने आकर मेरा अभिनंदन किया था कि हमने पुलिस का समर्थन किया. उस समय की सरकार ने निष्पक्षता का उल्लंघन मानते हुए उन्हें अनिवार्य अवकाश पर भेज दिया था. तो क्या नांगरे पाटिल के मामले में भी सरकार वही रुख अपनाएगी?
राज ठाकरे ने आगे कहा कि जब विधायक और सांसद भी सत्ता के साथ दौड़ते दिख रहे हैं, तो यदि सरकारी अधिकारी भी निष्पक्ष नहीं रहे तो जनता किसकी ओर देखेगी. उन्होंने नांगरे पाटिल से अनुरोध किया कि वे सक्षम अधिकारी हैं, अपनी अंतरात्मा और विवेक को किसी भी राजनीतिक दल या संगठन के सामने गिरवी न रखें. यह विवाद महाराष्ट्र में पुलिस अधिकारियों की निष्पक्षता और राजनीतिक संगठनों से दूरी को लेकर नए सिरे से बहस छेड़ने वाला माना जा रहा है.


























