7/11 मुंबई ब्लास्ट केस: 9 साल की गलत कैद के लिए वहिद शेख ने मांगा 9 करोड़ मुआवज़ा, बोले- 'ये इंसाफ का सवाल है'
Mumbai News: मुंबई लोकल ब्लास्ट केस में बरी डॉ. वहिद शेख ने 9 करोड़ रुपये मुआवजा मांगा. उन्होंने जेल में झेली यातनाओं, परिवार पर असर और अन्याय के लिए न्याय की मांग की.

मुंबई लोकल ट्रेन ब्लास्ट केस में बरी हुए एकमात्र आरोपी डॉ. वहिद शेख ने अब राज्य से 9 करोड़ रुपये का मुआवजा मांगते हुए बड़ी अपील दायर की है. उन्होंने कहा कि यह मुआवजा उनकी खोई हुई जिदगी, झेली गई यातनाओं और परिवार पर पड़े गंभीर असर की भरपाई के लिए है.
वहिद शेख ने एबीपी न्यूज से बातचीत में बताया कि मैंने 9 साल निर्दोष होकर जेल में बिताए. इस दौरान मेरी जिंदगी, करियर, सेहत और परिवार सबकुछ तबाह हो गया. अब मैं किसी दान या खैरात की नहीं, बल्कि न्याय की मांग कर रहा हूं.
28 साल की उम्र में उन्हें ATS ने झूठे आरोपों के तहत गिरफ्तार किया
वहिद शेख ने कहा कि 2006 में 28 साल की उम्र में उन्हें ATS ने झूठे आरोपों के तहत गिरफ्तार किया और MCOCA लगाकर जेल भेज दिया. साल 2015 में सेशन कोर्ट ने उन्हें सबूतों के अभाव में बरी कर दिया.
उनका कहना है कि जेल में रहने के दौरान उन्होंने कस्टोडियल टॉर्चर झेला, उनकी सेहत पर गहरा असर पड़ा, पिता का निधन हो गया, मां मानसिक तनाव से बीमार हो गईं और परिवार पर 30 लाख रुपये का कर्ज चढ़ गया. उनकी पत्नी और बच्चों को भी समाज में अपमान सहना पड़ा.
सह आरोपियों की बरी के बाद शेख की मुआवजा मांग
शेख ने यह भी कहा कि उन्होंने इतने साल मुआवजा इसलिए नहीं मांगा क्योंकि उनके सह-आरोपी अब भी जेल में थे. मगर हाल में उनकी भी बरी होने के बाद यह साफ हो गया है कि पूरा केस फर्जी था. इसलिए अब उनका मुआवजा मांगना और भी जायज हो जाता है.
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी हवाला दिया जिसमें 2018 में ISRO वैज्ञानिक डॉ नंबी नारायणन को गलत गिरफ्तारी और यातना के लिए 50 लाख रुपये का मुआवजा मिला था.
9 साल नहीं लौट सकते, मुआवजा न्याय का तरीका - डॉ वहिद शेख
डॉ. वहिद शेख ने कहा कि पैसे से मेरी जिंदगी के 9 साल वापस नहीं आ सकते, लेकिन यह मुआवज़ा उस अन्याय को स्वीकार करने और जिम्मेदारी तय करने का तरीका है. उन्होंने बताया कि इसके लिए उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, अल्पसंख्यक आयोग समेत कई संस्थाओं को अपनी शिकायत भेज दी है और अब अपनी मांग जनता के सामने भी रख रहे हैं.
Source: IOCL






















