'सूर्यकुमार यादव का बयान ढोंग, अरे थू है तुम्हारे...', उद्धव गुट का तंज, अब राम कदम ने किया पलटवार
India-Pak Match Controversy: सामना संपादकीय ने भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव के बयान को ढोंग और भारत की जीत को फिक्सिंग बताया है. इसमें BJP सरकार पर पाकिस्तान को आर्थिक मदद देने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं.

14 सितंबर को एशिया कप के तहत खेला गया भारत बनाम पाकिस्तान का मैच तो खत्म हो गया लेकिन उसके विरोध में उठ रही आवाजें तेज होती जा रही है. महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (यूबीटी) मुखपत्र ‘सामना’ में छपे लेख ने एक नया विवाद खड़ा कर रहा है. इस बार बात खिलाड़ियों तक भी जा पहुंची है.
सामना के ताजा संपादकीय में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच और भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव को लेकर तीखा हमला किया गया है. उसमें कहा गया कि दुबई में हुआ एशिया कप मैच बीजेपी सरकार की “देशभक्ति के ढोंग” की पोल खोलता है.
सामना ने सूर्यकुमार यादव द्वारा सेना को समर्पित किए गए बयान को “ढोंग” और मैच की जीत को “फिक्सिंग” करार देते हुए कहा कि यह पहलगाम, पुलवामा और अन्य आतंकी हमलों में शहीद हुए भारतीय जवानों के प्रति असम्मान है.
बीजेपी ने किया पलटवार
बीजेपी विधायक राम कदम ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "उद्धव ठाकरे और उनके नेताओं को हो क्या गया है, भारत पाक मैच में भारत जीत गया, जीत के बाद भारत ने ये जीत हमारे देश के सेनाओं के नाम कर दिया, इस पर भी उन्हें आपत्ति है. क्या चाहते थे आप, भारत हार जाए ये मंशा थी आपकी?
उन्होंने कहा कि बार बार पाकिस्तान के प्रवक्ता के नाते बयान देने वाले उद्धव ठाकरे और उनके नेता ये न भूलें कि देश ने अभी भी ये याद रखा है कि जब आपके सांसद इस लोकसभा में जीते थे तो उसने पाकिस्तान के झंडे लहराने का काम उद्धव ठाकरे के नेता कर रहे थे."
उन्होंने ये भी कहा कि उद्धव ठाकरे की पार्टी की ऑपरेशन सिंदूर पर बार बार सवाल उठा रही थी तभी भारत की जी उन्हें मंजूर नहीं हो रही है. यही कारण है कि ये नेता इस जीत को भी ढोंग कह रहे हैं.
दुबई मैच और बीजेपी पर निशाना
संपादकीय के अनुसार, भारत-पाकिस्तान मैच का महाराष्ट्र सहित देशभर में बहिष्कार किया गया लेकिन बीजेपी और उसके सहयोगी नेताओं ने बंद दरवाजों के पीछे बैठकर इस खेल का आनंद लिया. सामना ने लिखा कि पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने का फैसला केंद्र सरकार और बीसीसीआई अध्यक्ष जय शाह का था, जिन्हें बीजेपी के वरिष्ठ नेता अमित शाह का पुत्र बताकर निशाना बनाया गया.
नाना पाटेकर और अन्य लोगों के बयानों का हवाला देते हुए सामना ने कहा कि जब देश के लोगों का खून बहा हो, तब पाकिस्तान के साथ खेलने की अनुमति देना “राष्ट्रवाद” नहीं बल्कि “व्यवसाय” है. यह भी सवाल उठाया गया कि जब दिलजीत दोसांझ की फिल्म पाकिस्तान अभिनेत्री के कारण रोकी जा सकती है तो पाकिस्तानी खिलाड़ियों को खेलने क्यों दिया गया.
सट्टा, पैसे और सेना के नाम पर खेल- सामना
संपादकीय में लिखा गया कि इस मैच से पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने हजारों करोड़ रुपये कमाए और सट्टेबाजी का बड़ा खेल हुआ है और पैसा आतंकवादी नेटवर्क तक पहुंचा और बीजेपी सरकार ने अप्रत्यक्ष रूप से ऐसे नेटवर्क को मजबूत किया.
लेख में कहा गया कि भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव द्वारा सेना को समर्पित किया गया बयान “ढोंग” है, क्योंकि वही टीम पाकिस्तानी खिलाड़ियों के साथ खेल रही थी. असावरी जगदाले जैसी शहीद परिजनों की भावुक प्रतिक्रियाओं का हवाला देते हुए सामना ने सवाल उठाया कि क्या भारतीय क्रिकेट टीम सेना और युद्ध को खेल समझती है.
उद्धव गुट का हमला और राजनीतिक संदेश
संपादकीय के अंत में उद्धव ठाकरे गुट ने भाजपा और शिंदे गुट को भी घेरा. सामना में लिखा गया कि बीजेपी की “देशभक्ति” और शिंदे गुट की “चाटुकारिता” का असली चेहरा सामने आ गया है. शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि यह उन भारतीय महिलाओं का अपमान है जिनके पति शहीद हुए हैं और जिनकी मांग का सिंदूर मिट चुका है.
लेख का निष्कर्ष था कि बीजेपी सरकार ने एशिया कप मैच के ज़रिए आतंकवादियों को आर्थिक मदद पहुंचाई और राष्ट्रवाद को व्यापार का जरिया बना दिया. सामना ने अंत में लिखा, “अरे थू है तुम्हारे ढोंग और पाखंड पर!” यह संपादकीय आने वाले दिनों में राजनीतिक तापमान को और बढ़ा सकता है.
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Source: IOCL






















