ट्विशा शर्मा केस: 'दहेज का सवाल ही पैदा नहीं होता क्योंकि...', समर्थ के वकील का बड़ा दावा
Twisha Sharma Death Case: ट्विशा शर्मा आत्महत्या मामले में समर्थ सिंह के वकील ने इंदौर में दहेज और हत्या के आरोपों को निराधार बताया. उन्होंने कहा कि दोनों की शादी परिवार की सहमति से हुई थी.

ट्विशा शर्मा आत्महत्या मामले में अब समर्थ सिंह की तरफ से भी खुलकर बयान सामने आया है. इंदौर में समर्थ के वकील एडवोकेट आशीष शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई आरोपों पर जवाब दिया. उन्होंने कहा कि यह शादी पूरी तरह दोनों परिवारों की सहमति से हुई थी और दहेज या हत्या जैसे आरोप बेबुनियाद हैं.
वकील आशीष शर्मा ने बताया कि समर्थ सिंह और ट्विशा शर्मा की मुलाकात एक मेट्रोमोनियल एप के जरिए हुई थी. करीब डेढ़ साल तक दोनों के बीच बातचीत चली, जिसके बाद परिवारों की सहमति से शादी हुई. उन्होंने कहा कि यह लव कम अरेंज मैरिज थी.
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वकील के मुताबिक दोनों परिवार पढ़े-लिखे और आर्मी बैकग्राउंड से जुड़े हुए हैं. समर्थ के पिता सेना में थे और शहीद हो चुके हैं. उनकी मां अच्छी सरकारी पोस्ट पर रहीं हैं, जबकि भाई एयरफोर्स में है. ऐसे में दहेज का तो सवाल ही पैदा नहीं होता है.
हत्या के आरोपों को बताया गलत
द्विशा की हत्या किए जाने के आरोपों पर एडवोकेट आशीष शर्मा ने कहा कि वायरल सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखाई दे रहा है कि ट्विशा खुद जाती हुई नजर आ रही हैं.
उन्होंने कहा कि शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी आत्महत्या की बात सामने आई है और बचाव पक्ष उसी आधार पर आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि हत्या के आरोप पूरी तरह निराधार हैं और मामले को गलत दिशा देने की कोशिश की जा रही है.
वकील ने बताया कि घटना के बाद सबसे पहले समर्थ सिंह ने ही ट्विशा को फंदे से नीचे उतारा और तुरंत अस्पताल लेकर गए. उन्होंने कहा कि लोग सवाल उठा रहे हैं कि पहले पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी गई, लेकिन ऐसे हालात में किसी भी व्यक्ति की पहली कोशिश सामने वाले की जान बचाने की होती है.
प्रेग्नेंसी को लेकर भी रखा पक्ष
द्विशा के प्रेग्नेंट होने के मुद्दे पर भी वकील ने बयान दिया. उन्होंने कहा कि कंसीव होने के बाद ट्विशा बच्चा नहीं रखना चाहती थीं. वहीं समर्थ और उनकी मां गिरिबाला सिंह चाहते थे कि बच्चा रखा जाए. इसको लेकर दोनों डॉक्टर के पास काउंसिलिंग के लिए भी गए थे.
समर्थ सिंह के फरार होने के आरोपों पर भी आशीष शर्मा ने सफाई दी. उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज होने के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत पहले अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई गई थी.
गिरिबाला सिंह को बेल मिलने के बाद भोपाल सेशन कोर्ट और फिर जबलपुर हाईकोर्ट में समर्थ की जमानत याचिका दायर की गई. जब राहत नहीं मिली तो समर्थ ने खुद सरेंडर कर दिया.
उन्होंने यह भी कहा कि गिरिबाला सिंह की बेल निरस्त करने का कोई आधार नहीं बनता, क्योंकि उन्होंने बेल की किसी शर्त का उल्लंघन नहीं किया है.
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Source: IOCL

























