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उपचुनाव: नेशनल कॉन्फ्रेंस के तीनों उम्मीदवारों की जीत, BJP के सत शर्मा ने भी हुए विजयी

Jammu and Kashmir: जम्मू-कश्मीर के राज्यसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने तीन और बीजेपी ने एक सीट जीती है. यह केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद पहला चुनाव है, जिसमें वरिष्ठ नेता विजयी रहे.

जम्मू-कश्मीर में राज्यसभा चुनाव संपन्न होने के बाद अब राजनीतिक हलकों में विश्लेषण और समीक्षाओं का दौर शुरू हो गया है. इस बार के चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन सीटों पर कब्जा जमाया है, जबकि बीजेपी को एक सीट पर जीत मिली है. यह राज्यसभा चुनाव इसलिए भी ऐतिहासिक रहा क्योंकि जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन और केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद यह पहला राज्यसभा चुनाव था.

हालांकि, इस चुनाव में क्रॉस वोटिंग और जानबूझकर वोट अमान्य करने के आरोप भी लगे. लेकिन अंततः चार नेता संसद के उच्च सदन तक पहुंचने में सफल हुए.

चार बार के विधायक रह चुके है चौधरी मोहम्मद रमजान

75 वर्षीय चौधरी मोहम्मद रमजान चार बार के विधायक और पूर्व मंत्री रह चुके हैं. उन्होंने 1983 में कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा से पहली बार विधानसभा चुनाव जीता था और 1987 तथा 1996 में भी यह सीट अपने पास रखी. 2002 में हार के बाद वे 2008 में फिर से विधायक बने, लेकिन 2014 और 2024 के चुनावों में सज्जाद गनी लोन से हार गए. रमजान 1996 में फारूक अब्दुल्ला सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं.

फारूक अब्दुल्ला सरकार में मंत्री थे सज्जाद अहमद के पिता

60 वर्षीय सज्जाद किचलू किश्तवाड़ जिले के एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से आते हैं. उनके पिता बशीर अहमद किचलू 1980 और 1996 में फारूक अब्दुल्ला सरकार में मंत्री रहे थे. पिता के निधन के बाद सज्जाद ने राजनीति में कदम रखा और 2002 में किश्तवाड़ से जीत हासिल की. 2008 में उन्होंने दोबारा जीत दर्ज की लेकिन 2014 और 2024 के चुनावों में हार का सामना करना पड़ा. 2015 में वे विधान परिषद (एमएलसी) के सदस्य बने.

राज्यसभा में भेजे जाने वाले दूसरे सिख सांसद बने गुरविंदर सिंह

56 वर्षीय गुरविंदर सिंह ओबेरॉय, जिन्हें शम्मी ओबेरॉय के नाम से भी जाना जाता है. जम्मू-कश्मीर से राज्यसभा में भेजे जाने वाले दूसरे सिख सांसद बने हैं. पेशे से व्यवसायी ओबेरॉय ने होटल प्रबंधन में डिप्लोमा किया है. वे नेशनल कॉन्फ्रेंस के कोषाध्यक्ष हैं और दिवंगत नेता धर्मवीर सिंह ओबेरॉय के पुत्र हैं. पार्टी में वे फारूक और उमर अब्दुल्ला दोनों के करीबी माने जाते हैं.

बीजेपी की ओर से सत शर्मा की जीत

64 वर्षीय सत शर्मा बीजेपी की जम्मू-कश्मीर इकाई के अध्यक्ष हैं और पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं. उन्होंने जम्मू पश्चिम सीट से 2014 का विधानसभा चुनाव जीता था और बाद में पीडीपी-बीजेपी गठबंधन सरकार में मंत्री भी बने. शर्मा पहले भी 2015 से 2018 तक प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष रह चुके हैं और अब दोबारा उसी पद पर नियुक्त हैं.

राज्यसभा चुनावों में बीजेपी के लिए सत शर्मा की जीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे पार्टी को केंद्र शासित प्रदेश में अपनी राजनीतिक उपस्थिति बनाए रखने का अवसर मिला है.

इन परिणामों के साथ यह स्पष्ट है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपनी पकड़ और प्रभाव को फिर से मजबूत किया है, जबकि बीजेपी ने एक सीट बचाकर यह संदेश दिया है कि वह जम्मू-कश्मीर की राजनीति में अभी भी निर्णायक भूमिका निभा सकती है.

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