जम्मू: कश्मीरी पंडितों की जगती कॉलोनी बदहाल, करंट का खौफ
जम्मू की जगती कॉलोनी में रहने वाले कश्मीरी पंडित सरकारी उपेक्षा का शिकार हैं. बारिश में छतों से पानी टपकने के कारण करंट का खौफ रहता है. करोड़ों के टेंडर पास, पर काम नहीं.

जम्मू-कश्मीर में सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच कितना बड़ा फासला है, इसका खौफनाक उदाहरण प्रदेश की सबसे बड़ी कश्मीरी पंडित विस्थापित कॉलोनी में देखने को मिल रहा है. साल 1990 में कश्मीर घाटी से विस्थापित होकर आए कश्मीरी पंडितों के लिए बनाई गई 'जगती कॉलोनी' आज सरकारी नजरअंदाजगी का सबसे बड़ा स्मारक बन चुकी है. हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि बरसात के दिनों में यहां रह रहे हजारों लोग करंट लगने के खौफ से अपने घरों की बिजली तक ऑन नहीं कर पाते हैं.
जम्मू की इस जगती कॉलोनी में करीब 4200 क्वार्टर हैं, जिन्हें साल 2010 में सरकार ने विस्थापितों के लिए बनवाया था. लेकिन इन वर्षों में उचित रखरखाव और मरम्मत न होने के कारण ये क्वार्टर खंडहर में तब्दील होने लगे हैं. कॉलोनी के ब्लॉक 42 में रहने वाले रमेश रैना की दास्तान हर किसी को झकझोर देने वाली है. उनका कहना है कि बारिश के दिनों में उनके क्वार्टर की छत और दीवारें पूरी तरह से गीली हो जाती हैं, जिससे पूरे घर में करंट फैलने का गंभीर खतरा बना रहता है.
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'पत्नी मरते-मरते बची, अब स्विच ऑन करने में लगता है डर'
रमेश रैना ने बताया कि पिछले साल बरसात के दौरान छत पूरी तरह गीली थी, उसी वक्त स्विच ऑन करते हुए उनकी पत्नी को जोरदार करंट लगा और वह मरते-मरते बचीं. उस घटना के बाद से उनका परिवार बरसात के दो-ढाई महीनों तक घर का कोई भी स्विच ऑन करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता. आलम यह है कि मेन स्विच बंद होने के बाद भी पानी रिसने के कारण कई बार बिजली खुद-ब-खुद चालू हो जाती है. अधिकारियों को कई बार लिखित शिकायत देने के बावजूद जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो मजबूरन रमेश को खुद छत पर प्लास्टिक की शीट बिछानी पड़ी ताकि पानी अंदर न आ सके.
ग्राउंड फ्लोर तक पहुंच रहा पानी, सामान पर बिछा रहे पन्नी
यह समस्या सिर्फ ऊपरी मंजिलों तक सीमित नहीं है. इसी कॉलोनी में रहने वाले संजय बताते हैं कि उनका क्वार्टर ग्राउंड फ्लोर पर है, लेकिन इसके बावजूद पानी दूसरी मंजिल से रिसता हुआ नीचे उनके घर तक पहुंच जाता है. बारिश के दिनों में वह अपने कीमती सामानों को बचाने के लिए उन पर प्लास्टिक की शीट बिछाते हैं. संजय के मुताबिक, उनके क्वार्टर की मरम्मत आखिरी बार 2017 में हुई थी, उसके बाद से कोई अधिकारी सुध लेने नहीं आया.
करोड़ों के टेंडर जारी, लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं
जगती कॉलोनी में ही रहने वाले पेशे से वकील विश्व रंजन पंडित एक और बड़ा और गंभीर दावा करते हैं. उनका कहना है कि इस कॉलोनी के 4200 क्वार्टर्स में 5000 से अधिक परिवार रहते हैं. पिछले 16 सालों में इन क्वार्टर्स की मरम्मत के नाम पर कई बार करोड़ों रुपये के टेंडर जारी किए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर एक ईंट तक नहीं लगाई गई है. विस्थापित कश्मीरी पंडितों ने सरकार से अपील की है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द इन क्वार्टर्स की मरम्मत सुनिश्चित करवाई जाए.
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