सर्जियो गोर के बयान पर महबूबा मुफ्ती बोलीं- CM से सहमत, JK का हल US नहीं करेगा
Mehbooba Mufti News: महबूबा मुफ्ती ने कहा कि मैं सीएम उमर अब्दुल्ला की बात से सहमत हूं कि जो जम्मू कश्मीर के मसले हैं, इनका हल अमेरिका से नहीं मिल सकता.

पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने गुरुवार (20 अगस्त) को जम्मू-कश्मीर में विदेशी मेहमानों के दौरे के तरीके की आलोचना की. उन्होंने कहा कि 2019 के बाद से उनके दौरे पहले से तय होते हैं और उन्हें समाज के अलग-अलग वर्गों की बात सुनने का मौका नहीं मिलता. उनकी यह टिप्पणी भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के श्रीनगर दौरे के एक दिन बाद आई.
गोर ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की और जम्मू-कश्मीर को भारत का एक अहम हिस्सा बताया. गोर ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका J&K के लिए अपनी ट्रैवल एडवाइजरी की समीक्षा करेगा और इस क्षेत्र के साथ आर्थिक जुड़ाव बढ़ाने पर विचार करेगा.
पहले जब राजदूत यहां आते थे, वे हर वर्ग के लोगों से मिलते थे- महबूबा मुफ्ती
मुफ्ती ने कहा, "यह पहली बार नहीं है जब कोई राजदूत, खासकर अमेरिका से, जम्मू-कश्मीर आया है." उन्होंने आगे कहा, "फर्क यह है कि 2019 से पहले जब भी राजदूत यहां आते थे, वे समाज के हर वर्ग के लोगों से मिलते थे." उन्होंने कहा कि पहले विदेशी मेहमान लौटने से पहले पर्यटन, व्यापार, यात्रा और समाज के अन्य वर्गों के प्रतिनिधियों से बातचीत करते थे.
महबूबा मुफ्ती ने उमर अब्दुल्ला की किस बात से जताई सहमति?
पूर्व सीएम ने कहा, "लेकिन 2019 के बाद, इन विदेशी मेहमानों के दौरे पहले से तय होते हैं. वे आते हैं, मुख्यमंत्री से मिलते हैं, गवर्नर से मिलते हैं, शिकारा की सवारी करते हैं और चले जाते हैं." मुफ्ती ने अब्दुल्ला की इस बात से सहमति जताई कि जम्मू-कश्मीर की समस्याओं का समाधान वाशिंगटन नहीं कर सकता.
उन्होंने कहा, "मैं उमर साहब की इस बात से सहमत हूं कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दों का समाधान अमेरिका नहीं कर सकता. नई दिल्ली को ही इनका समाधान करना होगा." हालांकि, उन्होंने मुख्यमंत्री की इस बात के लिए आलोचना की कि उन्होंने राजदूत के दौरे का इस्तेमाल J&K के लोगों की चिंताओं को उठाने के लिए नहीं किया.
महबूबा मुफ्ती ने ईरान पर हमले का भी किया जिक्र
उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद थी कि उमर साहब कम से कम अमेरिकी राजदूत को जम्मू-कश्मीर के लोगों की चिंताओं के बारे में बताएंगे." उन्होंने खासकर ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और मुस्लिम देशों पर इसके असर का जिक्र किया. मुफ्ती ने यह भी कहा कि अब्दुल्ला को जम्मू-कश्मीर के उन मुद्दों को उठाना चाहिए था, जिनमें उनकी राय में नई दिल्ली के दखल की जरूरत है.
जम्मू-कश्मीर में दम घुटने जैसा माहौल- महबूबा मुफ्ती
उन्होंने पुलवामा में सुरक्षा अभियानों के दौरान कथित उत्पीड़न का जिक्र करते हुए कहा, "हमारे हजारों लोग जेलों में हैं. हर दिन लोगों को नौकरी से निकाला जा रहा है. हर दिन छापे मारे जा रहे हैं. संपत्तियां जब्त की जा रही हैं और जम्मू-कश्मीर में एक तरह का दम घुटने जैसा माहौल है." उन्होंने कहा, "ये ऐसे मुद्दे हैं जिन पर उमर साहब बात कर सकते हैं. इनके लिए वॉशिंगटन से बात करने की कोई ज़रूरत नहीं है."
मुफ्ती मोहम्मद सईद के कार्यकाल का भी जिक्र
मुफ्ती ने अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के कार्यकाल का भी ज़िक्र किया और कहा कि उनकी सरकार ने अलग-अलग पक्षों के साथ बातचीत और सुलह की कोशिशें की थीं. उन्होंने कहा, "जब मुफ्ती साहब ने वाजपेयी सरकार को मनाया, तो सुलह की प्रक्रिया शुरू हुई. यहां बातचीत हुई. हर वर्ग के साथ बातचीत हुई. पाकिस्तान के साथ भी बातचीत हुई. रास्ते खोले गए." उन्होंने सीएम अब्दुल्ला से अपील की कि वे भी नई दिल्ली को जम्मू-कश्मीर के लोगों के मुद्दों को हल करने के लिए मनाएं.
उम्मीद है कि ट्रैवल एडवाइजरी की समीक्षा होगी- महबूबा मुफ्ती
गोर के इस संकेत पर कि अमेरिका जम्मू कश्मीर के लिए अपनी ट्रैवल एडवाइज़री की समीक्षा करेगा और आर्थिक जुड़ाव बढ़ाएगा, मुफ्ती ने कहा कि अगर रोज़गार पैदा करने वाले क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाए तो इस कदम से क्षेत्र को फ़ायदा हो सकता है. उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि वे इसकी समीक्षा करेंगे. उन्होंने कहा कि हम जम्मू-कश्मीर के साथ आर्थिक रूप से ज़्यादा जुड़ेंगे."
उन्होंने आगे कहा, "अगर वे यहां बागवानी और हस्तशिल्प के क्षेत्र में जुड़ते हैं, जिससे नौकरियां पैदा हो सकें और हमें आर्थिक फ़ायदा हो, तो मुझे लगता है कि इस पर विचार किया जाना चाहिए."
जहां भी अमेरिका ने दखल दिया, वहां तबाही ही आई- महबूबा मुफ्ती
गोर द्वारा J&K को "भारत का अहम हिस्सा" बताए जाने पर मुफ्ती ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "मुझे नहीं लगता कि हमें अमेरिका को इतनी गंभीरता से लेने की जरूरत है." उन्होंने कहा, "दुनिया में जहां भी अमेरिका ने दखल दिया है, वहां तबाही ही आई है, वियतनाम से लेकर ईरान तक." उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका इस स्थिति में नहीं है कि वह जम्मू-कश्मीर पर भारत की स्थिति को प्रमाणित करे. मुफ्ती ने कहा, "वे हमारे मालिक नहीं हैं कि कुछ भी कहने से पहले हमें उनसे सर्टिफ़िकेट लेना पड़े."
जम्मू में बारिश का कहर! वैष्णो देवी यात्रा दोबारा शुरू, हेली सेवा प्रभावित




















