जम्मूू-कश्मीरः 'BJP की मदद के लिए...', SIR पर CM उमर अब्दुल्ला का बड़ा आरोप
एसआईआर को लेकर जम्मू कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने बड़ा बयान दिया है. सीएम उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि चुनावों में बीजेपी की मदद के लिए SIR की प्रक्रिया की जा रही है.

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि चुनावों में बीजेपी की मदद के लिए 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) की प्रक्रिया की जा रही है. उन्होंने चुनाव आयोग पर आई एक खोजी रिपोर्ट की विश्वसनीयता का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा, "अगर यह सही नहीं होती, तो सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करती, कम से कम मानहानि का मुकदमा तो करती."
श्रीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए, अब्दुल्ला ने 2019 में J&K में हुई परिसीमन (delimitation) प्रक्रिया का उदाहरण दिया, जो कथित तौर पर बीजेपी की मदद के लिए की गई थी. उन्होंने तर्क दिया कि केंद्र सरकार की पूरी तरह से निष्क्रियता और रिपोर्ट को कानूनी रूप से चुनौती न देना इस बात की खामोश स्वीकृति है कि रिपोर्ट तथ्यात्मक थी.
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सीईसी से विरोध प्रदर्शनों का किया बचाव
मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े विरोध प्रदर्शनों का बचाव करते हुए उमर अब्दुल्ला ने सवाल उठाया कि अगर अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट मनगढ़ंत थी, तो सरकार ने उसके खिलाफ मानहानि की कार्रवाई क्यों नहीं की. उन्होंने कहा, "अगर यह सही नहीं होती, तो सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करती, कम से कम मानहानि का मुकदमा तो करती." उन्होंने कहा कि चल रहे विरोध प्रदर्शन दिल्ली में हाल ही में हुई बैठक के बाद INDIA ब्लॉक के नेताओं द्वारा घोषित कार्यक्रम का हिस्सा थे.
अखबार की रिपोर्ट में ECI में मतभेद का हुआ था खुलासा
दरअसल, अखबार की रिपोर्ट में भारत के तीन सदस्यीय चुनाव आयोग (ECI) के भीतर अभूतपूर्व आंतरिक मतभेद का खुलासा हुआ था. इसमें बताया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार द्वारा उनकी जानकारी के बिना लिए गए फैसलों पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी. यह आपत्ति खास तौर पर मतदाता सूची के बेहद विवादास्पद 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) के मुद्दे पर थी, जिसके बारे में विपक्षी दलों का दावा है कि इससे लाखों मतदाता मताधिकार से वंचित हो गए हैं.
'चुनावों में दखल के लिए किया जा सकता है SIR का इस्तेमाल'
उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में मतदाता सूची के प्रस्तावित 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) पर भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल चुनावों में दखल देने के लिए किया जा सकता है.
अनुच्छेद 370 को हटाने और तत्कालीन J&K राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के बाद हुई परिसीमन प्रक्रिया का जिक्र करते हुए उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि उस समय भी इसका मकसद बीजेपी को फायदा पहुंचाना था और अब SIR भी उसी मकसद से, यानी बीजेपी की मदद के लिए किया जा रहा है. “हम पहले भी इस तरह के दखल का शिकार हो चुके हैं. हम अभी तक परिसीमन (डिलिमिटेशन) को भूले नहीं हैं.” उमर ने चेतावनी दी कि इसकी वजह से लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का भरोसा गंभीर संकट में है.
उमर अब्दुल्ला ने उम्मीद जताई कि J&K और दूसरे राज्यों में SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले, सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही – खासकर 'फॉर्म 6' से जुड़ी कार्यवाही – से वोटर लिस्ट से लोगों के नाम हटाना और मुश्किल हो जाएगा.
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