स्वतंत्रता दिवस उमर अब्दुल्ला का बड़ा दावा, 'PoK के लोग जम्मू कश्मीर से...'
India Independence Day: उमर अब्दुल्ला ने देश के स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने लोकतंत्र और संघवाद को मजबूत करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया.

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कहा कि अगर 5 अगस्त 2019 की घटना नहीं हुई होती, तो आज पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर के लोग भारत में शामिल होने के लिए संघर्ष कर रहे होते, वो हिस्सा हमारा ही है. उन्होंने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा और संवैधानिक गारंटी बहाल करने की मांग की और कहा कि भारत के संघवाद (फेडरलिज्म) को बचाने की लड़ाई जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली से शुरू होगी.
शनिवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने देश के स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने लोकतंत्र और संघवाद को मजबूत करने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए पिछले 80 वर्षों में भारत की यात्रा पर विचार करने का आह्वान किया.
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शहीदों को किया याद
अलामा इक़बाल के गीत का ज़िक्र करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा, "आज का दिन 'खुशी, याद और चिंतन' का दिन है, जब हम उन सभी शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने अपनी जान कुर्बान कर दी. लेकिन हमें अपने कामों पर भी आत्म-चिंतन करने की ज़रूरत है कि क्या हमने 'सारे जहाँ से अच्छा' वाला हिंदुस्तान हासिल कर लिया है, और अगर नहीं, तो भविष्य में इसे हासिल करने के लिए क्या करना बाकी है."
आज जश्न के इस दिन हम उन सभी शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने अपनी जान कुर्बान कर दी और अपने कामों पर आत्म-चिंतन करते हैं कि क्या हमने 'सारे जहाँ से अच्छा' वाला हिंदुस्तान हासिल कर लिया है, और अगर नहीं, तो इसे हासिल करने के लिए क्या करना बाकी है.
शेख मोहम्मद अब्दुल्ला को बताया सबसे महान नेता
उमर अब्दुल्ला ने शेख मोहम्मद अब्दुल्ला को विशेष श्रद्धांजलि दी, जिन्हें उन्होंने जम्मू-कश्मीर का "सबसे महान नेता" और "सबसे साहसी व्यक्ति" बताया. उन्होंने कहा कि भारतीय सेना के आने से पहले जम्मू-कश्मीर के लोगों की मदद से एक प्रतिरोध सेना (रेसिस्टेंस आर्मी) बनाने में उनके योगदान को याद किए बिना जम्मू-कश्मीर में स्वतंत्रता दिवस पर कोई भी चिंतन अधूरा रहेगा.
उमर ने कहा, "भारतीय सेना के इलाके में पहुँचने से पहले ही गाँवों, कस्बों और सड़कों पर लोग आक्रमण के खिलाफ खड़े हो गए थे. जिनके पास हथियार थे, उन्होंने हथियारों का इस्तेमाल किया, जबकि जिनके पास हथियार नहीं थे, उन्होंने नकली बंदूकें दिखाकर भी आक्रमणकारियों का मुकाबला किया." उन्होंने कहा कि हज़ारों लोगों ने अपनी जान कुर्बान कर दी.
एलओसी का किया जिक्र
लाइन ऑफ़ कंट्रोल (LoC) के पार की स्थिति का ज़िक्र करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में लोगों की हालत दुख और अफ़सोस की बात है. उन्होंने कहा कि वहाँ के लोगों को आज भी अपना माना जाता है, न कि अजनबी या बाहरी. "मेरा मानना है कि अगर 2019 में हमारी स्थिति नहीं बदली होती, तो शायद आज PoK के लोग हमारे साथ आने के लिए विरोध-प्रदर्शन कर रहे होते, क्योंकि वे हमारे राज्य का ही हिस्सा हैं."
उमर अब्दुल्ला ने भारत के साथ आने के फ़ैसले का समर्थन करते हुवे कहा "जब हम आज LOC के पार की स्थिति को देखते हैं, तो हमें एहसास होता है कि भारत में शामिल होने का हमारे नेताओं का फ़ैसला कितना सही था." उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में उस इलाके के प्रतिनिधियों के लिए अभी भी सीटें आरक्षित हैं, और उम्मीद जताई कि एक दिन वहां के लोग उन सीटों पर बैठ सकेंगे.
लोकतंत्र और संघवाद को बताया सबसे बड़ी ताकत
लोकतंत्र और संघवाद को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि हर स्थिति में लोकतंत्र की रक्षा करना, उसे मजबूत करना और उसे जीवित रखना सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है और संघवाद को भी असल में मजबूत किया जाना चाहिए. "संघीय ढांचे को मजबूत करने की शुरुआत जम्मू-कश्मीर से होनी चाहिए। हमसे जो कुछ भी छीना गया था, वह हमें वापस मिलना चाहिए. हमें भारत में संघवाद की रक्षा भी करनी है और इसकी शुरुआत हम J&K से करेंगे, लेकिन यह सिर्फ़ एक केंद्र शासित प्रदेश को राज्य का दर्जा देने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सभी राज्यों को सशक्त बनाने की दिशा में भी काम होना चाहिए."
उमर ने जोर देकर कहा कि संघवाद को मजबूत करने का मतलब सिर्फ़ एक केंद्र शासित प्रदेश को राज्य का दर्जा बहाल करना नहीं है, बल्कि देश के सभी राज्यों को सशक्त बनाना है.
एजेंसियों के इस्तेमाल पर चेतावनी
उमर अब्दुल्ला ने चेतावनी दी कि जब केंद्रीय एजेंसियां राज्यों के अधिकार क्षेत्र वाले मामलों में दखल देती हैं या जब राज्यों को मिली शक्तियां कम हो जाती हैं या शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा जैसे मामलों में केंद्रीय एजेंसियां उन शक्तियों का इस्तेमाल करती हैं, तो संघवाद को नुकसान पहुंचता है. "हालांकि NEET, NET और JEE जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं ने दाखिले के तरीके को बदल दिया है, लेकिन राज्य के शिक्षण संस्थानों को अपनी परीक्षाएं और दाखिले आयोजित करने का कोई अधिकार नहीं है." उमर अब्दुल्ला ने देश भर में और J&K में भी हाल ही में हुए छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए यह बात कही.
उमर अब्दुल्ला ने कहा, "छात्रों के विरोध-प्रदर्शन शिक्षा क्षेत्र में केंद्र सरकार के दखल का सीधा नतीजा हैं. हमने J&K में भी ऐसे विरोध-प्रदर्शन देखे हैं, क्योंकि सभी राज्यों का शिक्षा और भर्ती प्रक्रिया पर से नियंत्रण खत्म हो गया है."
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार, विपक्ष और मीडिया सभी की अहम भूमिका होती है. विपक्ष को विधानसभा के अंदर और बाहर सरकार को जवाबदेह ठहराना चाहिए, जबकि मीडिया को दोनों पक्षों को जवाबदेह ठहराना चाहिए. उमर अब्दुल्ला ने दावा किया कि उनकी सरकार सही रास्ते पर है और संवैधानिक गारंटियों को बहाल करने की दिशा में काम कर रही है.
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