ईरान-US सीजफायर पर फारूक अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया, भारत सरकार के इस फैसले को बताया 'सबसे बुरा कदम'
Iran America Ceasefire: जम्मू-कश्मरी के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने ईरान और अमेरिका के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि लड़ाई किसी चीज का हल नहीं है.

अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा के बाद जम्मू-कश्मीर नेशनल कांफ्रेस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहूंगा कि उसने ईरान और अमेरिका को एक मेज पर बैठकर अपने मसले तय करने की हिम्मत दी, क्योंकि बातचीत के बिना कोई रास्ता नहीं है.
उन्होंने आगे कहा कि लड़ाई किसी चीज का हल नहीं है. लड़ाई से न हल कभी हुआ है और न ही कभी होगा. इसलिए मैं अपनी और अपने लोगों की तरफ से मुबारकबाद देता हूं. उन्होंने कहा कि जो बैठकर बातचीत करेंगे इन सब मुल्कों को मुबारक देता हूं.
शांति की बात हो और शांति आए- फारूक अब्दुल्ला
फारूक अब्दुल्ला ने कहा, "मैं अल्लाह से दुआ करता हूं कि इनकी बातचीत में शांति की बात हो और शांति आए.क्योंकि इस लड़ाई से सारी दुनिया परेशान हो गई है. हालत यह है कि अगर यह लड़ाई और आगे बढ़ी तो दुनिया की दिक्कतें इतनी बढ़ जाएंगी कि उसे सिर्फ खुदा ही जानता है कि क्या हाल होगा." फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि एनर्जी सोर्स दुनिया के लिए सबसे जरूरी है. खुदा ने इन मुल्कों को उस एनर्जी सोर्स को दिया हुआ है.
बाहर काम करने वाले नागरिकों को लेकर जताई चिंता
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि हमारे इलाके के बहुत से लोग अरब देशों में काम करते हैं. आज सबकी जिंदगियां इस जंग में हिल गई हैं. उन्होंने कहा पता नहीं अमन आने में कितनी देर लगेगी, क्योंकि हमारे खानदानों में से और जम्मू-कश्मीर के लोगों में से कई लोग हैं जो बाहर मुल्कों में काम करके घर में पैसा भेजते हैं, जिससे उनके घर चलते हैं. इसलिए यह लड़ाई बंद होनी चाहिए.
उन्होंने आगे कहा कि मैं उम्मीद करूंगा कि इसमें भारत भी मदद करेगा. क्योंकि भारत अमेरिका का दोस्त है. वरना हम पर भी लड़ाई का बहुत जबरदस्त असर पड़ेगा.
बता दें कि ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच शुरू हुई जंग के 40 दिन बीतने के बाद आखिरकार दो हफ्तों के युद्धविराम की घोषणा की गई है. इसके लिए ईरान ने अपनी तरफ से 10 सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया है, जिसको लेकर 10 अप्रैल को पाकिस्तान में दोनों देशों के प्रतिनिधियों की बीच बातचीत होगी.
भारत सरकार से नाराज फारूक अब्दुल्ला
फारूक अब्दुल्ला ने मोदी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि भारत ने युद्ध से पहले फिलिस्तीन के मुद्दे को छोड़कर और इजरायल का पक्ष लेकर 'सबसे बुरा कदम' उठाया है. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि कुछ समय पहले तक दुनिया में केवल अमेरिका ही एकमात्र महाशक्ति था, लेकिन अब दुनिया बदल चुकी है. अब चीन और रूस दोनों ही बड़ी ताकतें बन चुके हैं और दुनिया अब 'एक-ध्रुवीय' (Unipolar) नहीं रही है.
भारत सरकार को सलाह देते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा, "गुटनिरपेक्षता की नीति के कारण हम हर देश के मित्र थे, और सरकार को भी इस तथ्य को समझना चाहिए. हमारे रूस के साथ समझौते हैं और चीन के साथ 'पंचशील' समझौता है. भले ही दूसरे देशों ने हमारे प्रति शत्रुता दिखाई हो, फिर भी हमारी किसी भी देश से कोई दुश्मनी नहीं थी. मैं भारत सरकार को कोई सुझाव नहीं दूंगा, लेकिन हमें सभी देशों के साथ मित्रतापूर्ण संबंध बनाने चाहिए."
फारूक अब्दुल्ला की पाकिस्तान को चेतावनी
फारूक अब्दुल्ला ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को भी चेतावनी देते हुए कहा कि उस देश को भी आतंकवाद का रास्ता छोड़कर शांति और विकास की राह अपनानी चाहिए. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लगातार जारी संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ता. ऐसे में उन्होंने उम्मीद जताई कि यह संघर्ष विराम कायम रहेगा और 10 अप्रैल को पाकिस्तान में होने वाली शांति वार्ता के बाद इस क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित होगी.
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