'शराब पीने की समस्या का...', जम्मू कश्मीर सरकार के शराबबंदी वाले फैसले पर बोले फारूक अब्दुल्ला
Jammu Kashmir News In Hindi: जम्मू-कश्मीर में शराबबंदी को लेकर सियासत तेज हो गई है. विपक्ष की ओर से सरकार पर लगातार निशाना साधा जा रहा है. इस बीच फारूक अब्दुल्ला ने सरकार का बचाव किया है.

जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला सरकार ने शराब की दुकानों पर प्रतिबंध लगा दिया है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने उमर अब्दुल्ला सरकार के जम्मू-कश्मीर में 'शराबबंदी' लागू न करने के फैसले का बचाव किया. उन्होंने कहा कि शराब पीने की समस्या का हल सिर्फ बैन लगाने से नहीं हो सकता.
डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि शराब पीना सिर्फ पाबंदियों से नहीं रोका जा सकता. उन्होंने जोर देकर कहा कि जो लोग शराब पीना चाहते हैं, वे इसे हासिल करने के तरीके ढूंढ़ ही लेंगे. भले ही जम्मू-कश्मीर में शराब की बिक्री पर बैन लगा दिया जाए. उन्होंने कहा कि जो लोग शराब पीते हैं, वे इसे कहीं से भी हासिल कर लेंगे. आज जो लोग इतना शोर मचा रहे हैं, वे तब कहां थे जब शराब की दुकानें खोली जा रही थीं?
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शराब बिक्री को लेकर क्या बोले फारूक अब्दुल्ला?
फारूक अब्दुल्ला ने आगे कहा कि सरकार शराब की बिक्री से होने वाले राजस्व पर काफी हद तक निर्भर है. उन्होंने आलोचकों को चुनौती दी कि अगर वे शराब की दुकानों को बंद करवाना चाहते हैं, तो वे इस राजस्व के नुकसान की भरपाई करें.
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि हमें शराब की बिक्री से होने वाला राजस्व दे दीजिए और हम दो मिनट के अंदर शराब की दुकानें बंद कर देंगे.उनकी ये टिप्पणियां जम्मू-कश्मीर में शराब की दुकानों के संचालन और विस्तार को लेकर विभिन्न हलकों से हो रही बहसों और आलोचनाओं के बीच आई हैं.
प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तेल के इस्तेमाल को तर्कसंगत बनाने की अपील पर टिप्पणी करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने इसका समर्थन किया और चेतावनी दी कि यह क्षेत्र ईंधन और गैस संकट की ओर बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि इससे अर्थव्यवस्था 'संकट और अनिश्चितता' में फंस सकती है.
डॉ. फारूक ने कहा कि वैश्विक तनाव और चल रहे भू-राजनीतिक संघर्ष स्थिति को और भी बदतर बना सकते हैं. उन्होंने कहा कि हम एक संकट की ओर बढ़ रहे हैं. एक ईंधन संकट, एक गैस संकट और हम तबाही की ओर जा रहे हैं.
उन्होंने आगे कहा कि अगर स्थिति ऐसी ही बनी रही, तो अर्थव्यवस्था पर इसके परिणामों का अंदाजा लगाना मुश्किल होगा. उन्होंने यह भी कहा कि इस स्थिति से निकलने का कोई रास्ता ढूंढ़ने की जरूरत है और चेतावनी दी कि लगातार बनी रहने वाली अनिश्चितता के गंभीर परिणाम हो सकते हैं.
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