Jammu-Kashmir: डोडा में पहली बार भाल पादरी महोत्सव, प्रकृति, संस्कृति और पर्यटन का संगम
Jammu-Kashmir News: जम्मू-कश्मीर के डोडा के भाल पादरी में पहली बार वन एवं पर्यटन महोत्सव का आयोजन हुआ. इसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रतियोगिताएं और मुशायरे के साथ पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा दिया.

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के पहले भाल पादरी वन एवं पर्यटन महोत्सव में प्रकृति प्रेमियों और सांस्कृतिक उत्साही लोगों की भारी भीड़ उमड़ी. डोडा जिले के भाल पादरी के शांत मैदानों में एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला, पहली बार भाल पादरी वन एवं पर्यटन महोत्सव बड़े उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया.
शैक्षिक, पर्यावरण, सामाजिक, खेल एवं सांस्कृतिक सोसाइटी भालेसा (EESS&CS) ने डोडा जिला प्रशासन, जम्मू-कश्मीर पर्यटन विभाग, वन विभाग (भद्रवाह संभाग), जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी, मेरा युवा भारत डोडा और सिविल सोसाइटी भालेसा के सहयोग से इस महोत्सव का आयोजन किया.
स्थानीयों और विशिष्ट अतिथियों की भागीदारी
इस महोत्सव में क्षेत्र की शानदार प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन की अपार संभावनाओं को प्रदर्शित किया गया. इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण जागरूकता, सतत पर्यटन और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना और भालेसा के छिपे हुए रत्नों को पर्यटन मानचित्र पर सबसे आगे लाना था.
इस महोत्सव में स्थानीय लोगों, पर्यटकों, अधिकारियों और सांस्कृतिक उत्साही लोगों की एक बड़ी भीड़ उमड़ी. इस अवसर पर उपस्थित विशिष्ट अतिथियों में जिला विकास परिषद (डीडीसी) डोडा के अध्यक्ष धनंतर सिंह कोतवाल, भद्रवाह के विधायक दलीप सिंह परिहार और डोडा के उपायुक्त हरविंदर सिंह शामिल थे.
प्रशासनिक उपस्थिति के साथ सांस्कृतिक उत्सव
इसके अलावा डोडा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार, भद्रवाह विकास प्राधिकरण के सीईओ जोगिंदर जसरोटिया और भद्रवाह के अतिरिक्त उपायुक्त सुनील भुटयाल भी उपस्थित रहे.
उनके साथ एसडीएम गंदोह, 4 राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर और कई अन्य अधिकारी भी शामिल हुए. इन सभी ने इस भव्य समारोह में अपनी उपस्थिति और समर्थन दिया. इस जीवंत कार्यक्रम में पारंपरिक संगीत, तराना-ए-भल्लेसा, लोक नृत्य, एकता के प्रतीक नात और भजन का अनूठा संयुक्त प्रदर्शन शामिल था.
प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम
साथ ही, पूर्वजों को भावभीनी श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई. गणमान्य अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया, जबकि सीएसएएम-एचएसएस किल्होत्रान के छात्रों ने राष्ट्रगान और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिन्होंने दर्शकों का मन मोह लिया.
कई प्रतियोगिताओं और गतिविधियों ने दिन में रोमांच और सामुदायिक भावना का संचार किया, जिनमें 2 किमी की भल्लेसा दौड़, 8 किमी का इको वॉक, देखो लोक नृत्य, रस्साकशी, घुड़दौड़, और वृक्षारोपण अभियान "एक पेड़ मां के नाम" शामिल थे.
कविता और कला से सजी समापन शाम
शाम का समापन एक भावपूर्ण मुशाय "शाम-ए-सुखन: भल्लेसा के नाम" के साथ हुआ, जहां प्रसिद्ध कवियों और कलाकारों ने अपनी कविताएं सुनाईं और क्षेत्र की साहित्यिक विरासत का जश्न मनाया.
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Source: IOCL






















