नेशनल हाईवे से लगता हिमाचल का ऐसा गांव, जहां आजादी के बाद से अब तक नल से नहीं आया पानी
Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने वर्ष 2023 में दावा किया कि हर घर में नल से पानी पहुंच रहा है, लेकिन सोलन जिले के कुराड़ग गांव में अभी भी पानी नहीं पहुंच पाया है.

Himachal Pradesh News: साल 2019 में 15 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल शक्ति मिशन लॉन्च किया था. इस मिशन के जरिए साल 2024 तक हर घर तक नल के जरिये जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था. क्योंकि देश में अभी भी कुछ ऐसे इलाके हैं, जहां आजादी के बाद से अभी तक नल से पानी नहीं आया है.
दरअसल, अगस्त 2023 में हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से दावा किया गया कि हिमाचल के हर घर में नल के ज़रिए जल पहुंचाया जा रहा है. केंद्र सरकार इस बात के लिए कई बार हिमाचल प्रदेश सरकार की पीठ थपथपा चुकी है. हिमाचल प्रदेश वहीं राज्य है, जहां दूरदराज के जिला लाहौल स्पीति तक के सबसे ऊंचे गांव तक भी नल के जरिए जल पहुंचाया जा चुका है.
आज तक नल से जल आता नहीं देखा
हैरानी की बात यह है कि हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन के जाबली के नजदीक कुराड़ग गांव आज तक नल के जरिये जल नहीं आ सका है. इस गांव की स्थिति सरकार के दावों की पोल खोलने वाली है. गांव के स्थानीय निवासी शांति देवी, मनीष शर्मा, ज्ञान प्रकाश, पूजा और मीनाक्षी का कहना है कि यहां नल तो कई बार लगे, लेकिन आज तक इसमें पानी नहीं देखा.
विधायक को भी शिकायत की, हुआ कुछ नहीं
गांव की ही बेटी मीनक्षी ने तो एक बार इसकी शिकायत स्थानीय विधायक विनोद सुल्तानपुरी से भी की, लेकिन बावजूद इसके कोई एक्शन नहीं हुआ. रोज़ाना गांव के लोगों को इधर-उधर से पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है. इन दिनों गांव के लोग एक प्लास्टिक की पाइप इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे दूर एक पानी के स्रोत से जोड़ा गया है. इसी प्लास्टिक की पाइप से आ रहे पानी के ज़रिए लोग यहां अपनी ज़रूरत पूरी कर रहे हैं.
क्या कहते हैं पंचायत के प्रतिनिधि?
वहीं, इस पूरे मामले में कोटी पंचायत के वार्ड सदस्य रूबिन कुमार का कहना है कि यहां लंबे वक़्त से पानी लाने की कोशिश की जा रही है. उठाऊ पेयजल योजना जाबाली का काम 80 फीसदी तक पूरा हो चुका है. दो साल पहले जब सरकार बदली, तो इसके बाद यह परियोजना के लिए बजट आना बंद हो गया.
अगर जल शक्ति विभाग इसके लिए बजट उपलब्ध करवा दे, तो पांच महीने में ही यहां पानी पहुंच जाएगा. उन्होंने कहा कि इस बारे में वे जल शक्ति विभाग के अधिकारियों से बात कर चुके हैं. अधिकारियों का कहना है कि बजट की कमी है. उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह से अनुरोध किया है कि वह इस परेशानी की तरफ ध्यान दें.
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