Haryana: सरसों खरीद के पहले ही दिन अव्यवस्था का अंबार, AAP बोली- 'नायब सिंह सरकार की खुली पोल'
Haryana News: हरियाणा की मंडियों में सरसों खरीद के पहले दिन भारी अव्यवस्था रही, 90% मंडियों में खरीद ठप रही और किसान घंटों लाइन में खड़े रहे. इसको लेकर आप नेता अनुराग ढांडा ने सरकार पर हमला किया है.

Haryana News: हरियाणा की मंडियों में सरसों की सरकारी खरीद के पहले ही दिन जिस स्तर की अव्यवस्था, लापरवाही और खुली लूट देखने को मिली है, उसने भाजपा की नायब सिंह सरकार की पूरी तरह पोल खोल दी है. आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने तीखा हमला करते हुए कहा कि प्रदेश की 90% से अधिक मंडियों में सरकारी खरीद पूरी तरह ठप पड़ी रही, जबकि हजारों किसान सुबह 5 बजे से शाम 7 बजे तक अपनी फसल लादे लाइन में पसीना बहाते रहे.
उन्होंने कहा कि राज्य भर में सरसों की आवक 1.2 लाख क्विंटल से अधिक पहुंच चुकी है, लेकिन सरकारी एजेंसियों ने 5% तक खरीद भी नहीं की. यह सीधे-सीधे साबित करता है कि सरकार खरीद करना ही नहीं चाहती. जबकि सरकार खुद 13 लाख मीट्रिक टन सरसों खरीदने का लक्ष्य तय कर चुकी है, ऐसे में पहले दिन की यह हालत सरकार की नीयत और तैयारी दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करती है.
किसानों को घंटों करना पड़ा इंतजार- अनुराग ढांडा
अनुराग ढांडा ने कहा, "जींद, हिसार, फतेहाबाद, रेवाड़ी, रोहतक और कई अन्य जिलों में किसानों को घंटों धूप में खड़ा रहना पड़ा. जींद में तो किसान खाली हाथ वापस लौटते दिखे." उन्होंने कहा कि ई-खरीद पोर्टल पूरी तरह ध्वस्त रहा. सर्वर क्रैश, डेटा वेरिफिकेशन में करीब 70% गड़बड़ी और सिस्टम अपडेट न होने के कारण किसानों को गेट पास तक नहीं मिल सके.
5000 से ज्यादा किसानों को “रिकॉर्ड मैच नहीं” का बहाना बनाकर वापस भेज दिया गया. यह सवाल सीधा है कि जब खरीद की तारीख पहले से तय थी, तो सरकार का IT सिस्टम क्यों सोया रहा? यह डिजिटल इंडिया नहीं, बल्कि किसानों के साथ डिजिटल धोखा है.
मंडियों में बुनियादी सुविधाओं की कमी- अनुराग ढांडा
अनुराग ढांडा ने कहा, "मंडियों में हालात और भी बदतर हैं. न बारदाना उपलब्ध है, न तुलाई के कांटे, न पर्याप्त लेबर. पीने के पानी, शौचालय और बैठने की व्यवस्था तक नहीं है. किसान अपनी फसल लेकर धूप में तड़पते रहे, लेकिन सरकार और उसके अधिकारी गायब रहे. यह सरकार किसानों की नहीं, अव्यवस्था और लापरवाही की सरकार बन चुकी है."
MSP से कम दाम पर बेचने को मजबूर किसान
उन्होंने कहा कि MSP 6200 रुपये प्रति क्विंटल तय करने के बावजूद किसान 5300 से 5800 रुपये तक प्राइवेट व्यापारियों को बेचने को मजबूर हैं. यानी सरकार ने MSP का सिर्फ दिखावा किया है, जबकि असल में निजी खरीद को बढ़ावा दिया जा रहा है. यह सरकारी मंडियों को खत्म करने की सोची-समझी साजिश है.
आप ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
अनुराग ढांडा ने नायब सिंह सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह सरकार घोषणाओं में नंबर वन और जमीन पर जीरो है. किसानों को बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन जब फसल बेचने का समय आया तो सरकार पूरी तरह नाकाम साबित हुई.
उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में गेहूं की फसल भी मंडियों में पहुंचेगी. अगर सरकार ने तुरंत व्यवस्था नहीं सुधारी तो हालात और भयावह हो जाएंगे और लाखों किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा.
अनुराग ढांडा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तुरंत प्रभाव से ई-खरीद पोर्टल दुरुस्त नहीं किया गया, मंडियों में बारदाना, लेबर और अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाई गईं और किसानों की फसल की समय पर खरीद सुनिश्चित नहीं की गई, तो पार्टी किसानों की आवाज हर मंच पर उठाएंगी.
अनुराग ढांडा ने कहा कि आम आदमी पार्टी किसानों के हक की लड़ाई पूरी ताकत से लड़ेगी और भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियों को जनता के सामने उजागर करती रहेगी.
























