योगेंद्र यादव ने SIR को लेकर SC में पेश की दलील, 'मताधिकार से वंचित करने की सबसे बड़ी कवायद'
Yogendra Yadav On SIR: सोशल एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव ने कहा कि यह किसी एक राज्य में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का मामला नहीं है, बल्कि वयस्क मताधिकार की सार्वभौमिकता को कमजोर करने का मामला है.

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले एसआईआर को लेकर देशभर में राजनीति गरमाई हुई है. इस बीच सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार (12 अगस्त) को इस मामले को लेकर सुनवाई भी हुई. सोशल एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव ने SIR के दौरान हुई गड़बड़ियों को लेकर अपनी दलीलें पेश कीं. उन्होंने वक्त देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का आभार भी प्रकट किया. योगेंद्र यादव ने SIR को लोकतंत्र में मताधिकार से वंचित करने की सबसे बड़ी कवायद बताया.
योगेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ''मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मामले में मुझे अपनी दलीलें पेश करने की अनुमति देने के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय का आभारी हूं और वह भी सामान्य अदालती समय के बाद.''
Grateful to the Hon’ble Supreme Court for allowing me to present my arguments in the matter of the Special Intensive Revision (SIR) of electoral rolls. And that too beyond usual court hours.
— Yogendra Yadav (@_YogendraYadav) August 12, 2025
This is not about revision of voter list in one state but about diluting the… pic.twitter.com/EddMYVzWqX
SIR लोकतंत्र की संरचना में बड़ा बदलाव- योगेंद्र यादव
उन्होंने आगे कहा, ''यह किसी एक राज्य में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का मामला नहीं है, बल्कि वयस्क मताधिकार की सार्वभौमिकता को कमज़ोर करने का मामला है. SIR लोकतंत्र की संरचना में एक बड़ा बदलाव है, किसी भी लोकतंत्र में मताधिकार से वंचित करने की सबसे बड़ी कवायद.''
कानूनी टीम पर गर्व- योगेंद्र यादव
इसके साथ ही योगेंद्र यादव ने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, प्रशांत भूषण, वृंदा ग्रोवर, गोपाल शंकरनारायण और शादान फरासत सहित कानूनी टीम का आभार जताया. उन्होंने कहा कि असंवैधानिक नीति को विफल करने के लिए इस कानूनी टीम पर गर्व है.
SIR को योगेंद्र यादव ने बताया असफल
सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने एक महिला और एक पुरुष को शीर्ष अदालत में पेश करते हुए कहा कि उन्हें बिहार में एसआईआर प्रक्रिया के बाद जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 'मृत' घोषित कर दिया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग की ओर से किया गया विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान असफल रहा और इसकी वजह से बिहार में 65 लाख वोटर्स प्रभावित हुए.
Source: IOCL






















