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ट्रिपल मर्डर के कातिल तक कैसे पहुंची दिल्ली पुलिस, घर वालों से क्यों नफरत करने लगा था अर्जुन? जानें सबकुछ

Delhi Triple Murder: दिल्ली पुलिस में ज्वाइंट सीपी एसके जैन के मुताबिक अर्जुन पर शक होने के पीछे कई कारण थे. पहला अर्जुन तंवर बयान बदलता रहा. पुलिस की तहकीकात में उसके जिम जाने की बात झूठी निकली.

Delhi Neb Sarai Triple Murder Case: दक्षिणी दिल्ली के नेब सराय इलाके में बुधवार तड़के एक ही परिवार के तीन लोगों की चाकू से गोदकर हत्या की खबर सुनकर राष्ट्रीय राजधानी में रहने वाले लोग सन्न रह गए. मां-बाप और बेटी की हत्या के चलते पूरी दिल्ली में हड़कंप मच गया, लेकिन पुलिस द्वारा ट्रिपल मर्डर केस का खुलासा करने के बाद भी लोग खुद को यह भरोसा नहीं दिला पा रहे थे कि एक बेटा कैसे अपने मां, बाप और बहन की हत्या का कातिल हो सकता है, लेकिन सच यही है. 

दिल्ली पुलिस में ज्वाइंट सीपी एसके जैन एबीपी न्यूज से एक्सक्लूसिव बातचीत में सिलसिलेवार तरीके से इसका खुलासा किया. ज्वाइंट सीपी का कहना है कि कोई भी इस घटना पर ऐतबार नहीं कर सकता. एक नासमझ बेटे, किसी शख्स की नहीं बल्कि अपने खाते-पीते अच्छे परिवार की हत्या कर दी. उन्होंने कहा कि घटना की सूचना पर तत्काल पुलिस अफसर और थाना पुलिस मौक पर पहुंची और जांच शुरू कर दी. 

जांच में यह पाया गया कि घर में जबरन कोई नहीं घुसा है, ना ही घर का सामान गायब मिला. इसके बाद हमें बेटे पर शक हुआ तो बेटे की गतिविधि के बारे में पूछताछ की गई. बेटे (अर्जुन तंवर) ने बताया कि वो घर पर नहीं था जब वारदात हुई. बेटे अर्जुन ने अपने बयान में बताया कि वो सुबह 5:30 से 6:30 के बीच घर पर नहीं था, जिस समय यह वारदात हुई. लिहाजा, पुलिस द्वारा इस समय के सभी CCTV खंगाले गए जिसमें यह पाया गया कि इस समय कोई संदिग्ध घर के पास नहीं गया.

बेटे के ऊपर कैसे शक हुआ?

ज्वाइंट सीपी एसके जैन का कहना है कि शक होने के पीछे कई कारण थे. पहला अर्जुन बयान बदलता रहा. उसके हाथ में ताजा चोट थी. उसने कहा था कि वो जिम गया था, लेकिन जिम नहीं गया था. जिम के रूट को रास्ते में लगे CCTV के जरिए मॉनिटर किया गया तो पुलिस को उसके बारे में इनपुट मिला.

हत्या के पीछे क्या था मकसद?

ये परिवार में उपेक्षित महसूस करता था. अपने पिता को लेकर उसके मन में कुंठा थी. पिता इसके दोस्तों के सामने मारते और डांटते थे. इसने कुंठा से ग्रसित होकर गुस्से में ये कदम उठाया. जांचकर्ताओं ने कहा कि अर्जुन अपने पिता के प्रति नाराज था, जिस पर उसने पक्षपात करने और अक्सर डांटने का आरोप लगाया था. संयुक्त सीपी जैन ने कहा कि 20 वर्षीय अर्जुन तंवर ने उन्हें बताया, " वह अपने घर में सौतेले बच्चे की तरह महसूस करता था."

4 दिसंबर को हत्या के लिए क्यों चुना?

दरअसल, चार दिसंबर उसके माता पिता की शादी की सालगिराह थी, इसलिए इसने यह दिन चुना. इसको लगा कि आज के दिन उसपर कोई शक नहीं करेगा और sympathy भी मिलेगी.

क्या पहले भी मर्डर करने की कोशिश की थी अर्जुन ने?

पुलिस को इस बारे में उसने कोई जानकारी नहीं दी है. क्राइम के मामलो में यह उसका पहला मर्डर अटेम्प्ट था. बहन देर तक पढ़ती थी, इसलिए सुबह देर तक सोती थी. मां—बाप भी सुबह देर से उठते थे, इसलिए उसने सुबह का समय चुना था. ताकि तीनों को मारने मौत की नींद सुला सके. वो सुबह को जिम जाता था.

क्या एक ही हथियार से मारा तीनों को? 

जिस चाकू से उसने तीनों की हत्या की वो घर का चाकू नहीं बल्कि आर्मी knife था. बहुत शार्प चाकू है. उसने बताया कि चाकू घर में ही था, क्योंकि पिता आर्मी में थे. अर्जुन का कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है.

अर्जुन क्या करता है?

अर्जुन तंवर दिल्ली यूनिवर्सिटी के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में सेकंड ईयर का छात्र है. वो BA पॉलिटिकल साइंस का छात्र है.

एचटी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस का मानना ​​है कि अर्जुन तंवर अपने पिता द्वारा सभी संपत्ति बहन कविता को हस्तांतरित करने की वजह से परेशान था. इस घटना के बाद से वो ज्यादा परेशान रहने लगा था. पुलिस का मानना है कि अपराध पूर्व नियोजित था.

पुलिस के मुताबिक अर्जुन ने पहले कविता पर हमला किया जब वह सो रही थी. फिर अपने पिता और मां को मारने के लिए ऊपर चला गया. उसकी मां, उस समय बाथरूम में थी, जब वह बाहर निकली तो उस पर हमला किया. 

पुलिस के पकड़ में ऐसे आया अर्जुन? 

जांचकर्ताओं ने कहा कि एक बड़ा सुराग इंटरलॉक की चाबियों पर खून के धब्बे थे. एक जांचकर्ता ने एचटी को बताया, "जिस चीज ने अर्जुन को पकड़ने में हमारी मदद की वह यह थी कि एफएसएल टीम को इंटरलॉक की चाबियों पर खून के निशान मिले थे. इससे संदेह पैदा हुआ क्योंकि सभी शव बिस्तर पर पाए गए थे और इंटरलॉक को केवल परिवार के सदस्य और आरोपी ही लॉक/अनलॉक/एक्सेस कर सकते थे. क्योंकि केवल उनके पास ही चाबियां थीं. हमें समझ में आया कि हत्यारे ने भी चाबियों का इस्तेमाल करके इंटरलॉक का इस्तेमाल किया”

परिवार नेब सराय में दो मंजिला घर में रहता था. अर्जुन के पिता राजेश साल 2010 में नायक सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए थे. वह कुछ समय के लिए एनएसजी कमांडो के रूप में भी काम किया था और सैनिक फार्म में एक व्यवसायी के लिए निजी सुरक्षा अधिकारी के रूप में काम कर रहे थे. पड़ोसियों ने परिवार को दयालु और मिलनसार बताया. 

पड़ोसी सौरभ सिंह ने कहा, “राजेश एक मददगार व्यक्ति थे और परिवार बहुत मिलनसार था. हमें अर्जुन द्वारा दरवाजे पीटने और यह चिल्लाने की आवाज सुनकर जगाया गया कि उसके परिवार की हत्या कर दी गई है.” अर्जुन का परिवार नेब सराय में दो मंजिला घर में रहता था.

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