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Explained: तुर्कमान गेट हिंसा- कैसे, कब और क्यों? मई 2025 से शुरू हुआ पूरा मामला, 22 अप्रैल को होनी थी सुनवाई

Delhi Turkman Explained: दिल्ली स्थित तुर्कमान गेट के पास स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास मौजूद अतिक्रमण को हटाने से लेकर अब तक क्या-क्या हुआ? पढ़ें यहां-

दिल्ली स्थित तुर्कमान गेट के पास 6 और 7 जनवरी 2026 की दरम्यानी रात नगर निगम के 32 बुलडोजर फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास स्थित अतिक्रमण हटाने के लिए पहुंचे. इसके बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया. पुलिस, प्रशासन और एमसीडी की टीम पर पत्थरबाजी हुई. आरोप है कि मौके पर समाजवादी पार्टी के सांसद और संसद वाली मस्जिद के इमाम मोहिबुल्लाह नदवी ने भी भीड़ को उकसाया. हालांकि सांसद पर दिल्ली पुलिस का कहना है कि अभी इस मामले में जांच जारी है. जरूरत पड़ने पर सांसद को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है.

भारतीय जनता पार्टी जहां रामपुर सांसद की मौजूदगी को साजिश का हिस्सा करार दे रही है तो वहीं सपा नेताओं का कहना है कि जो हुआ वह क्रिया की प्रतिक्रिया है. इस मामले में सपा के तमाम नेता तो खामोश हैं लेकिन पूर्व सांसद एसटी हसन पूरी तरह से रामपुर सांसद का समर्थन करते हुए लगभग हिंसा का बचाव कर रहे हैं.

इन सबके बीच आइए आपको बताते हैं कि बीते करीब 48 घंटों में क्या, कब, कैसे और क्यों हुआ?

तुर्कमान गेट हिंसा के टाइम लाइन की बात करें तो  6-7 जनवरी की दरम्यानी रात 12 बजे के करीब पुलिस को तुर्कमान गेट के पास डिप्लॉय किया गया. करीब साढ़े 12 बजे 32 बुलडोजर, 50 डंपर और दो सौ से जायदा मजदूर मौके पर पहुंचे थे. रात एक बजे बुल्डोजर की कार्रवाई शुरू होनी थी लेकिन वहाँ लोगों की भीड़ इक्कठा होनी शुरू हो गई. जिसके बाद करीब सवा एक बजे पुलिस ने लोगों को वापस भेजना शुरू कर दिया. करीब 1.23 मिनट पर पुलिस पर पत्थरबाजी शुरू हुई.दस मिनट तक मौके पर बवाल हुआ. 

पुलिस ने भीड़ और उपद्रवियों को खदेड़ना शुरू किया. इस बीच आंसू गैस के गोले भी पुलिस की तरफ़ से छोड़े गए. करीब 1 बजकर 30 मिनट पर बुलडोजर की कार्रवाई शुरू हो गई थी.जो करीब साढ़े पांच घंटे सुबह 7 बजे तक चली. इसके बाद से मलबा हटाने का काम फिलहाल जारी है.


Explained: तुर्कमान गेट हिंसा- कैसे, कब और क्यों? मई 2025 से शुरू हुआ पूरा मामला, 22 अप्रैल को होनी थी सुनवाई

तुर्कमान गेट हिंसा में कितने लोग अरेस्ट किए गए?

समाचार लिखे जाने तक इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. 10 लोग हिरासत में हैं और 30 लोगों की पहचान हो चुकी है. जिन्हें दबोचने के लिए पुलिस की दबिश जारी है. इस बीच एक यूट्यूबर सलमान का नाम भी सामने आया है जिसे नोटिस भेजा गया है. गिरफ्तार किए गए लोगों में काशिफ, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद अरीब, अदनान, समीर शामिल हैं.

तुर्कमान गेट मामले में क्या बोले मुस्लिम नेता?

इस मामले में सबसे पहला नाम आया उत्तर प्रदेश स्थित रामपुर से सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का. वह रात करीब 1.30 बजे मौके पर देखे गए थे. हालांकि उनके संदर्भ में पुलिस का कहना है कि जब एमसीडी ने अपनी कार्रवाई शुरू की तब तक वो वहां से जा चुके थे. अगर कोई जानकारी जांच के दौरान सामने आएगी तो उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा. अभी तक इस मामले में रामपुर सांसद की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.


Explained: तुर्कमान गेट हिंसा- कैसे, कब और क्यों? मई 2025 से शुरू हुआ पूरा मामला, 22 अप्रैल को होनी थी सुनवाई

उधर, यूपी के ही मुरादाबाद से सपा नेता और पूर्व सांसद डॉक्टर एसटी हसन ने रामपुर सांसद की मौजूदगी पर सवाल उठाने वालों को कटघरे में खड़ा किया. उन्होंने कहा कि बतौर इमाम और सांसद उन्हें कहीं भी जाने का प्रोटोकॉल हासिल है. वह वहां पत्थर और कट्टा लेकर तो नहीं गए थे. हिंसा से जुड़े एक सवाल पर एसटी हसन ने यहां तक कहा था कि यह क्रिया की प्रतिक्रिया है. 

फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण मामले में याचिकाकर्ता कौन?

फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अवैध कब्जे पर याचिकाकर्ता और सेव इंडिया फाउंडेशन के प्रीत सिरोही हैं. एमसीडी की कार्रवाई के बाद उन्होंने कहा कि जब मैंने दरगाह इलाही कॉम्प्लेक्स पर रिसर्च करना शुरू किया, तो मुझे पता चला कि पब्लिक जमीन पर कॉम्प्लेक्स और अवैध निर्माण हैं. जमीन का मालिकाना हक PWD और MCD के पास है. 

हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रीत सिरोही जानबूझकर ऐसे मामले उठाते हैं. इलाके में रहने वाले एक शख्स ने दावा किया था कि प्रीत सिरोही मुस्लिमों को लेकर हिंसक बयानबाजी करते हैं. 

 

शख्स ने लगाए थे प्रीत सिरोही पर आरोप
शख्स ने लगाए थे प्रीत सिरोही पर आरोप

तुर्कमान गेट का पूरा मामला क्या है?

मई 2025 में ‘सेव इंडिया फाउंडेशन’ नामक संस्था ने सरकार से शिकायत की कि रामलीला मैदान के पास सरकारी जमीन पर मस्जिद/मरकज के अलावा बैंक्वेट हॉल, डायलिसिस सेंटर और कई कमर्शियल पैथोलॉजी लैब्स अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं. इसके बाद अक्टूबर 2025 में एल एंड डीओ, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और एमसीडी की संयुक्त सर्वे टीम ने निरीक्षण किया, जिसमें सड़क और फुटपाथ पर 2,512 वर्ग फुट तथा रामलीला मैदान की जमीन पर 36,248 वर्ग फुट अतिक्रमण पाया गया.

फिर 12 नवंबर को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एमसीडी को अतिक्रमण और कथित अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए. इसके बाद 22 दिसंबर को एमसीडी ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया कि मस्जिद कमेटी और दिल्ली वक्फ बोर्ड का अधिकार केवल 0.195 एकड़ तक सीमित है.


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इससे आगे की जमीन सन् 1940 की लीज में शामिल नहीं है. आदेश में यह भी कहा गया कि मस्जिद, दरगाह या कब्रिस्तान का उपयोग शादी समारोह या क्लिनिक जैसी गतिविधियों के लिए नहीं किया जा सकता.


Explained: तुर्कमान गेट हिंसा- कैसे, कब और क्यों? मई 2025 से शुरू हुआ पूरा मामला, 22 अप्रैल को होनी थी सुनवाई

1 जनवरी 2025 को एमसीडी अधिकारियों ने स्थल का दौरा कर कार्रवाई के लिए सीमांकन करने की प्रक्रिया शुरू की और मस्जिद कमेटी को कार्रवाई की सूचना दी गई. इसके बाद कमेटी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की और संरक्षण की मांग की, लेकिन यह याचिका जस्टिस अमित बंसल ने खारिज कर दी. अदालत से अंतरिम राहत न मिलने के कुछ ही घंटों के भीतर एमसीडी ने कार्रवाई शुरू कर दी.

6 जनवरी की सुनवाई में क्या हुआ था?

फैज-ए-इलाही मस्जिद और कब्रिस्तान से सटी भूमि पर अतिक्रमण हटाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 6 जनवरी 2026 को हुई सुनवाई में संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया था. जस्चिस अमित बंसल की बेंच ने इस मामले में  एमसीडी,  डीडीए , शहरी विकास मंत्रालय के भूमि एवं विकास कार्यालय, लोक निर्माण विभाग  पीडब्ल्यूडी और दिल्ली वक्फ बोर्ड को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था. इस याचिका पर अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होनी थी.

तुर्कमान गेट मामले में क्या कहती है मस्जिद कमेटी?

मस्जिद कमेटी का तर्क है कि जिस भूमि पर मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तान स्थित हैं, वह कोई हालिया अतिक्रमण नहीं बल्कि सौ साल से भी अधिक पुरानी वक्फ संपत्ति है. कमेटी के अनुसार ये धार्मिक स्थल ऐतिहासिक रूप से स्थापित हैं और लंबे समय से समुदाय द्वारा उपयोग में रहे हैं.


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कमेटी ने यह भी दावा किया कि मस्जिद से सटा खुला मैदान वक्फ भूमि का ही हिस्सा है, जिसका उपयोग समय-समय पर सामुदायिक गतिविधियों और सामाजिक आयोजनों के लिए किया जाता रहा है.

कमेटी का कहना है कि कब्रिस्तान भी इसी वक्फ क्षेत्र का हिस्सा है और वह 0.195 एकड़ की सीमा के भीतर या उससे जुड़े क्षेत्र में आता है, इसलिए पूरे परिसर को अवैध अतिक्रमण बताना तथ्यात्मक और ऐतिहासिक रूप से गलत है.

तुर्कमान गेट से कितना हटा अतिक्रमण?

एमसीडी के मेयर राजा इकबाल सिंह ने एक बयान में कहा था कि मलबे को हटाने में समय लगेगा. इसमें 250 से 300 ट्रकों के जरिए मलबा हटाया जाएगा. इसकी सफाई में समय लगेगा.

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