मुंडका में सिस्टम की लापरवाही ने ली 2 साल की मासूम की जान, खुले नाले में गिरकर मौत
Delhi News: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि बच्ची की मौत पानी में डूबने के कारण हुई. एक महीने पहले सफाई के दौरान नाले का ढक्कन हटाया गया था. उसे दोबारा कभी बंद नहीं किया गया.

दिल्ली में बुनियादी ढांचे की अनदेखी एक बार फिर एक मासूम की जिंदगी पर भारी पड़ी. बाहरी दिल्ली के मुंडका इलाके में खुले नाले में गिरने से दो साल की एक बच्ची की मौत ने सिस्टम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सफाई के बाद नाले को ढंकने में बरती गई लापरवाही ने एक मां-बाप की इकलौती संतान को उससे छीन कर जिंदगी भर न भूलने वाला गम दे दिया.
घर के बाहर खेलते-खेलते अचानक लापता हुई मासूम
बाहरी दिल्ली स्थित मुंडका इलाके के 60 फुटा रोड स्थित राज मंदिर के सामने रहने वाले विकास अपनी पत्नी के साथ शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे. इसी दौरान उनकी दो साल की बेटी अंशिका घर के बाहर खेल रही थी. जो खेलते-खेलते उनकी नजरों से ओझल हो गई, और परिवार में हड़कंप मच गया.
नाले में मिला बच्ची का सुराग
परिजनों ने तुरंत आसपास खोजबीन शुरू की, लेकिन जब कोई पता नहीं चला तो उन्होंने पड़ोसियों से पूछताछ की और उन्हें भी साथ लेकर उसकी तलाश में जुट गए. करीब आधे घंटे बाद घर के पास ही खुले नाले के भीतर बच्ची के गिरने का पता चला. तुरंत ही परिजनों ने उसे बाहर निकाला और अस्पताल ले ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डूबने से मौत की पुष्टि
पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि बच्ची की मौत पानी में डूबने के कारण हुई. घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित परिस्थितियों की पड़ताल की जा रही है.
नाले की सफाई के बाद नहीं लगाया गया ढक्कन
स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब एक माह पहले सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने नाले की सफाई करवाई थी. सफाई के दौरान नाले के ऊपर से ढक्कन हटाया गया, लेकिन बाद में उसे दोबारा बंद नहीं किया गया. इसी लापरवाही ने नाले को खुले खतरे में बदल दिया.
बताया जा रहा है कि यह नाला करीब 60 फुट के डेड-एंड हिस्से से जुड़ा है, जहां से पानी का बहाव दिल्ली से हरियाणा की ओर मुड़ता है. इस संरचना के कारण नाले में गिरने के बाद उससे बाहर निकल पाना लगभग असंभव सा हो जाता है जो हादसों को और भी खतरनाक बना देता है.
शव घर पहुंचते ही फूटा लोगों का गुस्सा
बताया जा रहा है कि, मृत बच्ची के पिता विकास की शादी करीब तीन साल पहले हुई थी और अंशिका उनकी इकलौती संतान थी. जिसे विभागीय लापरवाही ने उनसे छीन लिया.
पोस्टमार्टम के बाद जब बच्ची का शव घर लाया गया तो इलाके में आक्रोश फैल गया. स्थानीय लोगों ने घटना को प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. देखते ही देखते लोगों की भीड़ जमा हो गई और सड़क पर जाम जैसी स्थिति बन गई.
विभागीय अधिकारियों पर लापरवाही के आरोप
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना था कि यदि सफाई के बाद नाले को ठीक से ढक दिया जाता तो यह हादसा नहीं होता. लोगों ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की.
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को शांत कराने की कोशिश की. अधिकारियों ने जांच और उचित कार्रवाई का भरोसा देकर स्थिति को नियंत्रित किया.
पहले भी हो चुके हैं हादसे, फिर भी नहीं सुधरी व्यवस्था
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस तरह के हादसे इलाके में पहले भी हो चुके हैं. इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों ने स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए, जिससे खतरा लगातार बना हुआ है.
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Source: IOCL

























