DMRC का सुरक्षा कवच, दिल्ली की सड़कों पर मेट्रो निर्माण के बीच यात्रियों के लिए खास इंतजाम
Delhi News: दिल्ली मेट्रो निर्माण स्थलों पर यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. DMRCअत्याधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मार्शल, LED लाइट्स, रोड स्टड्स, और इको-फ्रेंडली बैरिकेड्स का उपयोग कर रहा है.

दिल्ली की व्यस्त और भीड़भाड़ भरी सड़कों पर मेट्रो निर्माण कार्य के बीच यात्रियों और पैदल चलने वालों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है. दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने अत्याधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानवबल और मजबूत बैरिकेडिंग के जरिए राजधानी में एक ऐसा सुरक्षा ढांचा खड़ा किया है, जो देश के अन्य शहरों के लिए मिसाल बन रहा है.
राष्ट्रीय राजधानी में इस समय लगभग 20 किलोमीटर क्षेत्र में दिल्ली मेट्रो के निर्माण स्थलों पर बैरिकेडिंग की गई है. इन बैरिकेड्स का उद्देश्य वाहनों और पैदल यात्रियों को निर्माण कार्य से सुरक्षित दूरी पर रखना है. यह व्यवस्था खास तौर पर उन इलाकों में की गई है, जहां ट्रैफिक का दबाव अधिक रहता है.
कम दृश्यता में भी दिखें बैरिकेड्स
सर्दियों के मौसम में कोहरे और कम रोशनी की समस्या को देखते हुए बैरिकेड्स पर 17 किलोमीटर लंबी एलईडी रोप लाइट्स और ब्लिंकर लगाए गए हैं. रात के समय ये लाइट्स दूर से ही निर्माण स्थल की पहचान कराती हैं और हादसों की आशंका को काफी हद तक कम करती हैं.
270 से अधिक ट्रैफिक मार्शल दिन-रात संभाल रहे मोर्चा
निर्माण स्थलों के आसपास ट्रैफिक को सुचारु और सुरक्षित बनाए रखने के लिए 270 से ज्यादा ट्रैफिक मार्शल तैनात किए गए हैं. ये सभी मार्शल ट्रैफिक विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षित हैं और खासकर रात के समय भारी मशीनरी और क्रेनों की आवाजाही में अहम भूमिका निभाते हैं.
रोड स्टड्स और चेतावनी संकेतों से पहले ही मिल जाता है अलर्ट
निर्माण स्थलों के नजदीक पहुंचते ही वाहनों की रफ्तार कम हो सके, इसके लिए सड़कों पर रोड स्टड्स लगाए गए हैं. इसके साथ ही वर्क इन प्रोग्रेस और डाइवर्जन से जुड़े चेतावनी संकेत पर्याप्त संख्या में लगाए गए हैं, ताकि चालक पहले से सतर्क हो सकें.
फेज-4 में इम्पैक्ट प्रोटेक्शन व्हीकल से बढ़ी सुरक्षा
दिल्ली मेट्रो के फेज-4 में विशेष इम्पैक्ट प्रोटेक्शन व्हीकल्स को शामिल किया गया है. ये वाहन सड़क पर भारी मशीनरी और क्रेन की तैनाती के दौरान कामगारों और अन्य वाहनों को संभावित टक्कर से बचाने के लिए बनाए गए हैं और तेज रफ्तार वाहनों के प्रभाव को झेलने में सक्षम हैं.
कोहरे के मौसम में अतिरिक्त इंतजाम, फॉग लाइट और रिफ्लेक्टिव टेप
सर्दियों में दिन और रात दोनों समय घने कोहरे की स्थिति को देखते हुए बैरिकेड्स पर फॉग लाइट्स भी लगाई गई हैं. इसके अलावा मेट्रो निर्माण में लगे कर्मचारियों के हेलमेट पर रिफ्लेक्टिव टेप और हाई-विजिबिलिटी जैकेट अनिवार्य किए गए हैं.
डाइवर्जन पर तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू
जहां भी सड़क डायवर्जन किया जाता है, वहां पर्याप्त संकेतक बोर्ड लगाए जाते हैं. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस से परामर्श के बाद डायवर्जन को अंतिम रूप दिया जाता है. इन स्थानों पर प्लास्टिक बैरियर, रेत या पानी से भरे ड्रम और कंक्रीट क्रैश बैरियर के जरिए तीन लेयर की सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाती है.
तेज हवा और बारिश के दौरान बैरिकेड्स के गिरने की आशंका को खत्म करने के लिए इन्हें नीचे से भारी डिजाइन में बनाया गया है. बैरिकेड्स को जमीन में कील से फिक्स किया जाता है और नट-बोल्ट की मदद से आपस में जोड़ा जाता है, जिससे खराब मौसम में भी ये अपनी जगह से नहीं हिलते.
रीसाइकल्ड मटीरियल से बने इको-फ्रेंडली कंक्रीट बैरियर
दिल्ली मेट्रो द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे कंक्रीट क्रैश बैरियर पर्यावरण के अनुकूल हैं और निर्माण कचरे को रीसाइकल कर बनाए गए हैं. ये हार्ड बैरिकेड्स हादसे की स्थिति में वाहनों को भारी मशीनरी से टकराने से रोकते हैं और इनके आगे भी अतिरिक्त सुरक्षा परतें लगाई जाती हैं.
ठेकेदारों के लिए सख्त नियम
सुरक्षा उपकरणों की गुणवत्ता और एकरूपता बनाए रखने के लिए डीएमआरसी ने टेंडर दस्तावेजों में ट्रैफिक मैनेजमेंट से जुड़ा अलग चैप्टर शामिल किया है. ये दिशा-निर्देश फेज-1 के अनुभव और इंडियन रोड कांग्रेस के मानकों के अनुरूप तैयार किए गए हैं और ठेकेदारों पर बाध्यकारी हैं.
भीड़भाड़ वाले शहरी इलाकों में मास ट्रांजिट सिस्टम का निर्माण हमेशा चुनौतीपूर्ण रहता है. इसके बावजूद दिल्ली मेट्रो निर्माण स्थलों के आसपास अब तक वाहन और पैदल यात्रियों की आवाजाही बड़े हादसों से काफी हद तक सुरक्षित रही है, जो इस व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की सफलता को दर्शाता है.
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Source: IOCL


























