'दिल्ली में विकास या नामकरण की राजनीति', मेट्रो स्टेशनों के नाम बदलने पर कांग्रेस ने रेखा सरकार को घेरा
Devender Yadav News: दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने कहा कि रेखा गुप्ता की सरकार ने मेट्रो कॉरिडोर और मेट्रो स्टेशनों के नाम तय करने की शक्ति को अपने अधीन कर लिया है.

दिल्ली में मेट्रो स्टेशनों के नाम बदलने का मुद्दा गरमाता जा रहा है. दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाने के बजाय सरकार नाम बदलने की राजनीति में उलझी हुई है. उनका कहना है कि इससे न तो दिल्ली को कोई ठोस फायदा होगा और न ही आम जनता की समस्याओं का समाधान होगा.
मेट्रो स्टेशनों के नामों में बदलाव पर सवाल
देवेन्द्र यादव ने कहा, ''भाजपा की दिल्ली सरकार ने मेट्रो कॉरिडोर और मेट्रो स्टेशनों के नाम तय करने की शक्ति को अपने अधीन कर लिया है. इसी के तहत सात मेट्रो स्टेशनों के नामों में संशोधन किया गया है और दो स्टेशनों के नाम पूरी तरह बदल दिए गए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम राजनीतिक लाभ लेने की मंशा से उठाया गया है.''
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को दिल्ली में बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान देना चाहिए था, लेकिन सरकार नाम बदलने को ही उपलब्धि बताने में जुटी है. नमो भारत दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के शुभारंभ को ढांचागत विकास का बेहतर उदाहरण बताने को भी उन्होंने जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश करार दिया.
बजट खर्च न कर पाने का आरोप
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि पिछले एक वर्ष में सरकार ने खोखली घोषणाओं और बयानबाजी के अलावा कोई ठोस काम नहीं किया. उन्होंने कहा कि एक लाख करोड़ रुपये के बजट में से करीब 58 हजार करोड़ रुपये खर्च ही नहीं किए जा सके. उनके अनुसार यह प्रशासनिक अक्षमता का प्रमाण है.
मेट्रो की स्वायत्तता खत्म करने का आरोप
देवेन्द्र यादव ने आगे कहा, ''पिछले 24 वर्षों से मेट्रो कॉरिडोर और स्टेशनों के नाम निर्धारण की शक्ति मेट्रो प्राधिकरण के पास थी. अब यह अधिकार सरकार द्वारा अपने अधीन लेकर मेट्रो की स्वायत्तता को कमजोर किया जा रहा है.'' उन्होंने इसे तानाशाही रवैया बताया. यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार केंद्र की भाजपा सरकार की तर्ज पर नाम बदलने की राजनीति कर रही है. उनके मुताबिक भाजपा की सोच में बदले की भावना घर कर चुकी है और यही प्रवृत्ति शासन के हर स्तर पर दिख रही है.
'कई योजनाओं और स्कूलों के नाम भी बदले गए'
देवेन्द्र यादव ने कहा कि मेट्रो स्टेशनों के अलावा दिल्ली सरकार की कई योजनाओं और स्कूलों के नाम भी बदले गए हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली सरकार के स्कूलों का नाम ‘सीएम श्री’ किया गया और लड़कियों को आर्थिक सहायता देने वाली लाडली योजना का नाम बदलकर ‘लखपति बिटिया’ कर दिया गया.
नाम बदलने से यात्रियों को दिक्कत- देवेन्द्र यादव
उनका कहना है कि नाम बदलने से रोजाना मेट्रो से सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों को दिक्कत होगी. जो लोग कभी-कभार यात्रा करते हैं, उनके लिए यह बदलाव और भी ज्यादा भ्रम पैदा कर सकता है. उन्होंने आशंका जताई कि मेट्रो स्टाफ को भी तकनीकी और प्रबंधन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि नए नाम अभी तक सिस्टम में शामिल नहीं थे.
बुनियादी समस्याओं पर ध्यान देने की मांग
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि एक साल के शासन में सरकार पूरी तरह विफल रही है. उन्होंने कहा कि ध्वस्त परिवहन व्यवस्था, बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं, पिछड़ती शिक्षा व्यवस्था, बढ़ता प्रदूषण, दूषित पानी, भारी बिजली बिल, जलभराव और कूड़े की समस्या जैसी बुनियादी चुनौतियों पर कोई ठोस काम नहीं हुआ है.
देवेन्द्र यादव ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में दिल्ली का स्वरूप लगातार बिगड़ता गया है. उनका आरोप है कि विकास परियोजनाओं को अंतिम रूप देने के बजाय सरकार राजनीतिक मुद्दों में उलझी हुई है, जिससे राजधानी का समग्र विकास प्रभावित हो रहा है.
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Source: IOCL

























