दिल्ली: चांदनी चौक में अंडरग्राउंड होंगे तार, 17 हजार करोड़ के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान का ऐलान
Delhi News: दिल्ली सरकार ने राजधानी की बिजली व्यवस्था को विश्वस्तरीय बनाने के लिए 17000 करोड़ रुपये के 'पावर इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान' की घोषणा की है. इस योजना के तहत चांदनी चौक में तारों को भूमिगत किया जाएगा.

राजधानी दिल्ली में बिजली व्यवस्था को विश्वस्तरीय, सुरक्षित और निर्बाध बनाने के लिए सरकार ने कई बड़ी परियोजनाओं का ऐलान किया है. दिल्ली में तेजी से बढ़ती बिजली की मांग को देखते हुए आने वाले तीन सालों के लिए 17 हजार करोड़ रुपये का 'पावर इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान' तैयार किया गया है. इस महायोजना के तहत ऐतिहासिक बाजार चांदनी चौक को तारों के जंजाल से मुक्त करने से लेकर नई 'बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली' (BESS) स्थापित करने जैसे बड़े कदम उठाए जा रहे हैं.
इस योजना की सबसे बड़ी और बहुप्रतीक्षित घोषणा चांदनी चौक की 26 सड़कों को लेकर है. यहां करीब 52.5 किलोमीटर लंबे ओवरहेड तारों के नेटवर्क को अब जमीन के नीचे (अंडरग्राउंड) किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट पर लगभग 160 करोड़ रुपये खर्च होंगे. चांदनी चौक देश के सबसे पुराने और भीड़भाड़ वाले बाजारों में से एक है, जहां संकरी गलियों में लटकते तारों से हमेशा आग और शॉर्ट-सर्किट का भारी खतरा बना रहता है. अधिकारियों के मुताबिक, काम मुख्य रूप से रात में किया जाएगा ताकि जनता और कारोबारियों को असुविधा न हो. इससे 40 से 50 हजार लोगों को सीधा और सुरक्षित फायदा मिलेगा.
मंडोली में 66 केवी ग्रिड सब-स्टेशन की आधारशिला
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के निवासियों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने मंडोली में 66 केवी जीआईएस (GIS) ग्रिड सब-स्टेशन की आधारशिला भी रखी है. करीब 55.5 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह ग्रिड डेढ़ लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं, छोटे उद्योगों और अस्पतालों को बेहतर बिजली सप्लाई करेगा. इससे वोल्टेज फ्लक्चुएशन और बार-बार होने वाली कटौती से स्थायी निजात मिलेगी.
बैटरी ऊर्जा भंडारण और भविष्य का विजन
ऊर्जा मंत्री ने किलोकरी में शुरू हुई 20 मेगावाट की 'बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली' (BESS) का विशेष जिक्र किया, जो दक्षिण एशिया की बड़ी परियोजनाओं में शुमार है. यह सिस्टम पीक डिमांड (अत्यधिक मांग) के समय बिजली सप्लाई को स्थिर रखता है. जल्द ही शिवालिक, द्वारका और गोयला खुर्द में चार नई बैटरी परियोजनाएं शुरू होंगी, जिनसे 55 मेगावाट से ज्यादा की अतिरिक्त क्षमता जुड़ेगी.
सरकार का कहना है कि इन बड़े बदलावों के दौरान शुरुआती दौर में थोड़ी असुविधा जरूर हो सकती है, लेकिन दिल्ली के सुरक्षित भविष्य और एक मजबूत बिजली व्यवस्था के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी है.
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Source: IOCL


























