रिठाला-कुंडली मेट्रो का रास्ता साफ, दिल्ली-यूपी- हरियाणा के बीच मिलेगी सीधी कनेक्टिविटी
Delhi News In Hindi: रिठाला-कुंडली मेट्रो का रास्ता साफ हो गया है. इस रूट पर 3500+ पेड़ों की शिफ्टिंग और 400 केवी लाइन हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. 26.5 किमी लंबे कॉरिडोर पर 21 स्टेशन बनेंगे.

दिल्ली-एनसीआर की मेट्रो नेटवर्क को मजबूत करने वाली महत्वाकांक्षी रिठाला-कुंडली मेट्रो परियोजना अब तेज गति से आगे बढ़ने की तैयारी में है. लंबे समय से पर्यावरणीय मंजूरियों और हाईटेंशन बिजली लाइनों की बाधाओं के कारण धीमी पड़ी इस परियोजना में दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) ने अहम कदम उठा लिए हैं.
पेड़ों के स्थानांतरण और 400 केवी हाईटेंशन लाइन को शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिससे निर्माण कार्य जल्द तेज होने की उम्मीद है. इससे दिल्ली-NCR के लाखों लोगों को फायदा होगा.
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3,500 से अधिक पेड़ों का होगा प्रबंधन, 527 को काटने की अनुमति मांगी
प्रस्तावित 26.463 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के मार्ग में करीब 3,500 पेड़ आ रहे हैं. इनमें से 527 पेड़ों को काटना अनिवार्य है, जबकि बाकी पेड़ों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा. डीएमआरसी ने पिछले महीने वन विभाग को आवश्यक अनुमति के लिए प्रस्ताव भेज दिया है. पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए डीएमआरसी ने पेड़ों की कटाई के बदले नए पौधे लगाने की भी योजना बनाई है, ताकि हरित क्षेत्र पर न्यूनतम प्रभाव पड़े.
400 केवी लाइन शिफ्टिंग पर 18.97 करोड़ का टेंडर जारी
बवाना स्थित वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के पास से गुजरने वाली 400 केवी हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइन परियोजना की सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती थी. डीएमआरसी ने इस लाइन को स्थानांतरित करने या उसकी ऊंचाई बढ़ाने के लिए टेंडर जारी कर दिया है. इस कार्य पर अनुमानित 18.97 करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद है. टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्य तेजी से शुरू होगा.
21 स्टेशनों वाला कॉरिडोर बदलेगा उत्तर-पश्चिम दिल्ली की तस्वीर
केंद्र सरकार ने दिसंबर 2024 में इस परियोजना को दिल्ली मेट्रो फेज-4 के तहत मंजूरी दी थी. अनुमानित लागत 6,230 करोड़ रुपये है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2025 में शिलान्यास किया था. इस कॉरिडोर में 21 एलिवेटेड स्टेशन प्रस्तावित हैं, जिनमें रोहिणी के तमाम सेक्टर, बवाना, नरेला और कुंडली शामिल हैं. पूरा होने पर यह रेड लाइन का विस्तार होगा और गाजियाबाद, दिल्ली व हरियाणा के बीच सीधी मेट्रो कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी.
गौरतलब है कि रोहिणी, बवाना, नरेला जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में मेट्रो पहुंच बढ़ने से यातायात की समस्या कम होगी, प्रदूषण घटेगा और आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी. दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के लाखों यात्रियों को लाभ मिलेगा. डीएमआरसी अधिकारियों के अनुसार, सभी बाधाएं दूर होने के बाद निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने का लक्ष्य है.
यह परियोजना न केवल सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाएगी बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी नई गति देगी. पेड़ शिफ्टिंग और बिजली लाइन हटाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मेट्रो निर्माण की मुख्य गतिविधियां तेजी से शुरू हो जाएंगी.
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