दिल्ली: JLN स्टेडियम में 20 फरवरी से 'कारीगर बाजार', 200 से ज्यादा शिल्पकार दिखाएंगे हुनर
Delhi Karigar Bazaar 2026: दिल्ली में 20 फरवरी से 1 मार्च 2026 तक जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 'कारीगर बाजार' लगेगा. इसमें 200 से अधिक शिल्पकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे.

राजधानी दिल्ली एक बार फिर देश की समृद्ध शिल्प विरासत की मेजबानी करने जा रही है. 20 फरवरी से 1 मार्च 2026 तक दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में ‘कारीगर बाजार – दिल्ली एडिशन 2026’ का आयोजन होगा, जहां देशभर से आए पुरस्कार विजेता और अनुभवी शिल्पकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे. यह आयोजन हर दिन सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक आम लोगों के लिए खुला रहेगा.
इस शिल्प मेले में प्रवेश के लिए दर्शकों को गेट नंबर 13 का उपयोग करना होगा. प्रवेश शुल्क 50 रुपये तय किया गया है, जिससे आम लोग भी आसानी से इस आयोजन का हिस्सा बन सकें. आयोजकों के अनुसार, दस दिनों तक चलने वाले इस विशेष बाजार में 200 से अधिक मास्टर क्राफ्ट्समैन, राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित कारीगर, महिला शिल्पकार और युवा क्राफ्ट उद्यमी शामिल होंगे. यहां देश की विविध हस्तशिल्प और हैंडलूम परंपराओं की झलक एक ही छत के नीचे देखने को मिलेगी.
टेक्सटाइल से लेकर मिट्टी कला तक, दुर्लभ शिल्प का अनोखा प्रदर्शन
इस आयोजन में टेक्सटाइल, लोक कला, धातु शिल्प, लकड़ी की नक्काशी, टेराकोटा प्रोडक्ट्स, पारंपरिक आभूषण और सजावटी वस्तुओं की विस्तृत रेंज उपलब्ध रहेगी. कई ऐसी पारंपरिक कलाएं भी यहां प्रदर्शित होंगी, जो धीरे-धीरे मुख्यधारा से ओझल होती जा रही हैं. खास बात यह है कि आगंतुक सिर्फ खरीदारी ही नहीं, बल्कि इन कलाओं की बारीकियों को करीब से समझ भी सकेंगे.
वर्कशॉप में खुद सीख सकेंगे पारंपरिक क्राफ्ट तकनीक
फेस्टिवल को केवल प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रखा गया है. यहां इमर्सिव क्राफ्ट वर्कशॉप का आयोजन भी किया जाएगा, जहां लोग सीधे कारीगरों से पारंपरिक तकनीकों को सीखने का अवसर पाएंगे. चाहे ब्लॉक प्रिंटिंग हो या मिट्टी के बर्तन बनाना, आगंतुक खुद अपने हाथों से कला को आकार दे सकेंगे.
लोक संगीत और खास फूड कोर्ट से सजेगा माहौल
शिल्प और खरीदारी के साथ-साथ सांस्कृतिक रंग भी इस आयोजन की खास पहचान होंगे. लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां पूरे माहौल को जीवंत बनाएंगी. इसके अलावा, खाने के शौकीनों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया फूड कोर्ट भी आकर्षण का केंद्र रहेगा, जहां अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखा जा सकेगा.
शिल्पकारों को सीधा मंच, परंपराओं को नई पहचान
आयोजकों का कहना है कि यह मंच शिल्पकारों को सीधे ग्राहकों से जोड़ने का काम करेगा. इससे न केवल कलाकारों को आर्थिक मजबूती मिलेगी, बल्कि पारंपरिक कलाओं के संरक्षण और प्रचार को भी बल मिलेगा. 20 फरवरी से 1 मार्च तक चलने वाला यह आयोजन दिल्लीवासियों के लिए कला, संस्कृति और स्वाद का अनोखा संगम साबित हो सकता है.
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Source: IOCL

























